कारगिल
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पांच गोलियां लगने के बावजूद आठ किमी चलकर नीचे पहुंचे
हम एक ग्लेश्यिर में थे। इसके बाद हमें दिल्ली भेजा गया। वहां से मैं छुट्टी पर घर आया था। इसी बीच हमें वापस बुलाया गया। जून के महीने में ही हमें बटालिक सेक्टर में भेजा गया। यहां हमें पहाड़ी नंबर 5203 पर कब्जा करना था। हम ऊपर चढ़ाई कर रहे थे। जैसे ही पहाड़ी पर पहुंचे तो वहां कुछ घुसपैठिये घात लगाकर बैठे थे। हम सर्च कर रहे थे, तभी दो ने पकड़ लिया। उनसे हाथापाई हुई। लेकिन हमने उन्हें तेजधार हथियार से मार गिराया। पोस्ट कब्जे में आ गई थी। लेकिन पांच गोलियां लग चुकी थीं। इसके बावजूद आठ किलोमीटर तक नीचे पैदल चलकर पहुंचे। इसके बाद बेहोश हो गया। कुछ दिन बाद होश आया तो पता चला कि उधमपुर के सैन्य अस्पताल में हूं। कारगिल युद्ध का वह दृश्य आज भी जोश से भर जाता है।
- राइफलमैन संसार सिंह, 12 जैकलाई