दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में सबसे बड़े आतंकी हमले को लेकर देश में चारों ओर आक्रोश की लहर है। इस आतंकी हमले को अंजाम देने के पीछे जैश-ए-मोहम्मद संगठन से जुड़े आतंकी आदिल अहमद उर्फ वकास का नाम सामने आ रहा है। जानिए, कौन है आदिल अहमद, जिसने करीब 350 किलोग्राम विस्फोट से भरी स्कॉर्पियो को सीआरपीएफ जवानों से भरी बस में टक्कर मारी।
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जम्मू श्रीनगर हाईवे पर हमला
- फोटो : एएनआई
इस आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हो गए हैं। हमले के तुरंत बाद पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठन ने जिम्मेदारी ले ली थी। आतंकी हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद ने दावा किया कि उसके आतंकी आदिल अहमद ने विस्फोटक से भरी गाड़ी को उड़ाया है।
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जम्मू श्रीनगर हाईवे पर हमला
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, जम्मू पुलिस के अनुसार, आत्मघाती वाहन को चला रहे मानव बम की शिनाख्त कर ली गई है। वह पुलवामा जिले के काकापोर का आदिल अहमद था, जो वर्ष 2018 में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद में शामिल हुआ था। सूत्रों के मुताबिक, आदिल को हाल ही में अफगान मुजाहिद जैश के आतंकी गाज़ी रशीद ने आतंक की ट्रेनिंग दी थी।
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मौके पर जवान
- फोटो : अमर उजाला
जैश-ए-मोहम्मद ने दावा किया है कि आदिल पुलवामा के गुंडीबाग इलाके का ही रहने वाला था। धमाके से पहले जवानों की गाड़ी पर फायरिंग भी की गई है। बताया जा रहा कि ये काफिला जम्मू से कश्मीर की ओर जा रहा था। आतंकियों ने जिस तरह से ये हमला किया, इस तरीके का इस्तेमाल आम तौर पर अफगानिस्तान और पाकिस्तान में सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है।
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आतंकी आदिल अहमद
- फोटो : अमर उजाला
हमले के कुछ देर बाद ही फिदायीन आदिल अहमद का एक वीडियो वायरल हुआ। आतंकी आदिल वीडियो में साफ कहता सुनाई दे रहा है कि जब तक यह वीडियो आप लोगों तक पहुंचेगा उस समय मैं जन्नत में मजे लूट रहा होऊंगा। उसने कहा कि मैंने जैश ए मोहम्मद में आतंकी के रूप में एक साल बिताया है। अब यह मेरा कश्मीर के लोगों के लिए आखिरी मैसेज है। कश्मीर में सुरक्षा बलों पर हाल ही के दिनों किए गए आईईडी और स्नाइपर हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे कुछ कमांडरों को मारकर तुम हमें कमजोर नहीं कर पाओगे।
जानकारी के मुताबिक, आदिल हुसैन डार 19 मार्च 2016 को पुलवामा के गुंडीबाग से गायब हो गया था। उसके दो दोस्त तौसीफ और वसीम भी गायब हो गए थे। तौसीफ का बड़ा भाई मंजूर अहमद डार भी आतंकी था जो 2016 में मारा गया था। आदिल ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था। आदिल एक स्थानीय मस्जिद में अजान भी दिया करता था।