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अनुच्छेद 370: 33 दिन बाद कुछ ऐसा है कश्मीर घाटी का माहौल, देखिए तस्वीरें

Sat, 07 Sep 2019 02:08 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू/श्रीनगर
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : बासित जरगर
पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख को केंद्र शासित राज्य बनाए जाने के फैसले के बाद घाटी में पहली बार प्रतिबंध लगाए गए थे। जिनमें समय बीतने के साथ परस्पर ढील भी दी गई। अधिकारियों ने कहा कि शहर के कुछ हिस्सों में शुक्रवार की नमाज से पहले एहतियात के तौर पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : बासित जरगर
शुक्रवार की नमाज के बाद हिंसा की आशंका के चलते कश्मीर घाटी के कुछ इलाकों में ऐतिहातन प्रतिबंध लगा दिया गया। लोगों ने भीड़ भाड़ वाले इलाके में स्थित बड़ी मस्जिदों में जाने की अपेक्षा घर पर ही नमाज पढ़ना ज्यादा बेहतर समझा।
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : बासित जरगर
इसके कारण पिछले एक महीने से कश्मीर की किसी भी प्रमुख मस्जिद में शुक्रवार की नमाज नहीं अदा की गई। घाटी में शुक्रवार को पाबंदी के 33वें दिन सामान्य जनजीवन धीमी गति से चलता रहा। शुक्रवार को अन्य दिनों की अपेक्षा सड़क पर कुछ कम वाहन देखे गए। दूसरी ओर लैंडलाइन टेलीफोन चालू होने से लोग काफी राहत महसूस कर रहे हैं।

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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : बासित जरगर
वहीं शनिवार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने कहा कि वह इस बात से पूरी तरह आश्वस्त हैं कि अधिकतर कश्मीरी अनुच्छेद 370 के हटने से खुश हैं। वे अधिक से अधिक अवसर, भविष्य, आर्थिक प्रगति और रोजगार के अवसरों को देख रहे हैं, केवल कुछ शरारती तत्व ही इसका विरोध कर रहे हैं।
 
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : बासित जरगर
डोभाल ने कहा कि सेना के अत्याचारों का कोई सवाल नहीं उठता, राज्य (जम्मू-कश्मीर) पुलिस और कुछ केंद्रीय बल सार्वजनिक व्यवस्था संभाल रहे हैं। भारतीय सेना वहां आतंकियों से लड़ने के लिए है। जम्मू-कश्मीर के 199 पुलिस स्टेशन एरिया में से केवल दस में प्रतिबंधात्मक आदेश जारी हैं। बाकी पर कोई प्रतिबंध नहीं है।
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : बासित जरगर
उधर, घाटी के सेब उत्पादकों के लिए अच्छी खबर है। अनिश्चितता में फंसे बागवानों की पैदावार को बाजार तक पहुंचाने व उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार की पहल रंग लाती दिख रही है। राज्य प्रशासन अगले सप्ताह दस सितंबर को एक योजना शुरू कर सकता है।
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : बासित जरगर
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पिछले दिनों राज्य के सात लाख से अधिक सेब उत्पादकों के लिए सरकार ने राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) से संपर्क किया था। फल उत्पादकों को नुकसान से बचाने के लिए नेफेड से बातचीत की गई है। वह लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश कर कुल उत्पादन का 50 फीसदी खरीदेगा। इसके लिए नेफेड की एक टीम खरीद प्रक्रिया के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए यहां पहुंच चुकी है।

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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : बासित जरगर
चार सितंबर (बुधवार) को श्रीनगर के उपायुक्त शाहिद इकबाल चौधरी ने पारिमपोरा फल मंडी का दौरा किया था और वहां से फल बाहर भेजे जाने की तैयारियों का जायजा लिया। डीसी ने कहा, नेफेड के माध्यम से बागवानों को उत्पाद का उचित मूल्य मिलेगा साथ ही उनकी परिवहन संबंधी दिक्कतें भी दूर कराई जाएंगी।

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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : बासित जरगर
उन्होंने जम्मू-कश्मीर बागवानी योजना और विपणन बोर्ड से कहा है कि वह नेफेड को ऑफिस के लिए यहां जगह के साथ अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराए। घाटी में औसतन 22 लाख टन सेब का सालाना उत्पादन होता है।  इससे सात लाख किसान जुड़े हुए हैं।
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : बासित जरगर
वहीं कश्मीर घाटी में इस वर्ष भी मुहर्रम पर कोई जुलूस नहीं निकलेगा। सभी कार्यक्रम संबंधित इमामबाड़ों में ही होंगे। जम्मू और कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
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