जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर सरकारी प्राइमरी स्कूल मानी खास 10 साल से बिना छत की इमारत में चल रहा है। विभाग की ओर से इमारत तो खड़ी कर दी गई, लेकिन छत्त डलवाना भूल गया है। घोरड़ी जोन के इस स्कूल में 27 नौनिहाल खुले आसमान तले शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार, प्रशासन और विभाग है सुध लेना ही भूल गया है। प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की तरफ से घर द्वार पर शिक्षा देने के दावे किए जा रहे हैं, जिनकी घोरड़ी के प्राइमरी स्कूल मानी खास में हवा निकल रही है। दस साल से बच्चे सरकारी उदासीनता के चलते खुले आसमान तले पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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उधमपुर का एक प्राइमरी स्कूल
- फोटो : ani
2004 में यह ईवीएस सेंटर के रूप में शुरू करने के बाद 2006 में प्राइमरी स्कूल बनाया गया। शुरू में मंदिर के पास किराए के कमरे में कक्षाएं लगाई गईं। 2010 में शिक्षा विभाग की ओर से इमारत का निर्माण शुरू करवाया गया, लेकिन अभी तक स्थिति जस के तस है। विवाद के चलते काम को बंद कर दिया गया। इमारत नहीं होने के कारण विद्यार्थी खुले आसमान तले शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। बारिश में विद्यार्थियों को टीन के कमरे में जगह मिलती है, जहां मिड-डे-मील और स्कूल का सामान रखा हुआ है।
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उधमपुर का एक प्राइमरी स्कूल
- फोटो : ani
विभाग की बेरुखी से अभिभावक चिंतित
स्कूल में कुल 27 विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। अभिभावक बच्चों के खुले आसमान तले शिक्षा ग्रहण करने से काफी चिंतित है। अभिभावकों ने कई बार स्कूल की अपनी इमारत का निर्माण कार्य शुरू करने की मांग को शिक्षा विभाग के सीईओ व अन्य अधिकारियों से की है, लेकिन आजतक कुछ नहीं हुआ है।
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उधमपुर का एक प्राइमरी स्कूल
- फोटो : ani
टीन के कमरे में बनता है मिड-डे-मील
टीन के कमरे में मिड-डे-मील बनाया जाता है। स्कूल के पास केवल एक टीन का कमरा है। इसमें स्कूल का रिकार्ड रखने के साथ मिड-डे-मील का सामान रखा जाता है। बारिश बच्चों को वहीं बिठाया जाता है। एक कमरे में यह सब करना बहुत मुश्किल है।
इमारत का निर्माण एसएसए शुरू हुआ था। दो वर्ष पहले योजना को बंद कर दिया गया है। इसके लिए नए सिरे से प्लान बनाकर भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। निर्माण कार्य ग्रामीणों के आपसी विवाद के कारण बंद करना पड़ा था। -भारत भूषण, इंचार्ज जेडईओ, घोरड़ी जोन