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नए जम्मू-कश्मीर का एक सालः तीन दशक से नासूर बने अलगाववादियों के घरों से भी उठने लगे विकास के स्वर

Tue, 04 Aug 2020 10:31 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : अमर उजाला
अलगाववादी नेता और डेमोक्रेटिक लिबरेशन पार्टी के प्रमुख हाशिम कुरैशी ने अपनी बेटी लैला कुरैशी से जुलाई महीने में नाता तोड़ लिया। बेटी और उनके साथियों के जम्मू-कश्मीर सोशल पॉलिटिकल एक्टिविस्ट मूवमेंट (जेकेएसपीएमएम) बनाने से नाराज होकर हाशिम ने लैला से कन्नी काट ली। इस ग्रुप का गठन घाटी में अलगाववादी विचारधारा के विपरीत शांति, सद्भाव और विकास के लिए किया गया है।

 
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : अमर उजाला
हाशिम कुरैशी तिहाड़ जेल में फांसी की सजा पाने वाले मकबूल भट का करीबी रहा है। वह तब चर्चा में आया, जब जनवरी 1971 में इंडियन एयरलाइंस के विमान का अपहरण कर लाहौर ले गया था। वहां सारे यात्रियों को उतारने के बाद विमान को आग लगा दी गई थी। वह पहले नेशनल लिबरेशन फ्रंट का सदस्य था, जो बाद में जेकेएलएफ बना।

 
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हाल-ए-कश्मीर
पाकिस्तान के बहकावे में आकर अलगाववादियों की ओर से पिछले तीन दशक से घाटी में लगातार देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया। किसी भी मुद्दे पर बवाल मचाना और जुमे की नमाज के बाद सुरक्षाबलों पर पथराव करना इनका शगल हो गया था। अलगाववादियों की वजह से ही 2010 की हिंसा में 100 से अधिक लोगों की जान चली गई। हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भड़की हिंसा में भी व्यापक पैमाने पर लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा। कई लोगों की आंख की रोशनी चली गई तो कई गंभीर रूप से घायल हुए।

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जितेंद्र सिंह
पीएमओ में राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि अलगाववादियों का दोहरा चरित्र लोगों के सामने आने से उनकी जमीन खिसक गई है। उन्हें पता चल गया है कि किसी भी अलगाववादी का बेटा या बेटी पत्थरबाजी या देश विरोधी गतिविधियों में शामिल नहीं है।
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह - फोटो : अमर उजाला
सिंह ने कहा कि अलगाववादियों की संतानें या तो विदेश में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं या फिर सरकारी नौकरी में हैं। ऐसे में वे अलगाववाद और पाकिस्तान के नाम पर क्यों खून बहाएं। अलगाववाद की कब्र खुद गई है। अब यह प्रसंग ही दफन हो गया है। 

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