महिला दिवस पर हर साल इस दिन महिलाओं के उस वजूद की कहानियां हर ओर देखने-सुनने को मिलती हैं, जिन्होंने अपनी मौजूदगी से दुनिया के हर कोने में एक मुकाम हासिल किया है। इतिहास की तमाम कहानियों से लेकर आज के हिंदुस्तान तक के सफर में नारी का क्या स्थान है, शायद इसे बताने के लिए किसी नजीर की जरूरत नहीं है। यह बेहद गर्व की बात है कि हिंदुस्तान की बेटियों ने दुनिया के हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत के दम पर यह साबित किया है कि वे किसी से कम नहीं और इससे भी ज्यादा गर्व इस पर कि बेटियों की इस ताकत में कश्मीर से कन्या कुमारी तक की बेटियों की बराबर हिस्सेदारी है। हिम्मत और कोशिशों के बल पर अपनी मंजिल पाकर दुनिया के हर हिस्से को रोशन करने वाली रियासत की कई बेटियों ने यह साबित किया है कि जुनून की रोशनी के आगे खराब हालात का हर अंधेरा छोटा हो ही जाता है। जम्मू कश्मीर में ऐसी कई कहानियां मौजूद हैं, जो यह बता सकती हैं कि रियासत की बेटियों ने देश की पहचान विश्व के हर कोने तक पहुंचाई।
विज्ञापन
2 of 6
तजामुल
- फोटो : ANI
तजामुल इस्लाम
सात साल की कश्मीर की बिटिया जब किक बॉक्सिंग में परचम लहराने के बाद हिंदुस्तान पहुंची तो सारे देश ने उसकी हिम्मत को सलाम किया। निर्भीकता की मिसाल तजामुल ने अपने नन्हे हाथों की मेहनत और दम के बल पर हिंदुस्तान का नाम सारी दुनिया में रोशन किया और जब हिंदुस्तान लौटीं तो सेना प्रमुख से लेकर राज्य की सीएम महबूबा मुफ्ती तक ने कश्मीर की इस नन्ही बेटी की हिम्मत को सलाम किया। कश्मीर के उन हालातों में जबकि स्थानीय खिलाड़ियों को खेल के लिए बमुश्किल साधन मिल पाते थे, उनमें तजामुल ने अपनी ताकत के दम पर सारे देश और दुनिया में अपना और देश का नाम रोशन किया।
विज्ञापन
3 of 6
isha Andotra
- फोटो : file photo
ईशा अंडोत्रा
कठुआ के अटल सेतु पर एक गाने से देश की आवाज बनने वाली ईशा अभी अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी कर रही हैं। भले ही जम्मू की इस बेटी की उम्र छोटी हो, लेकिन इनकी सुरीली आवाज का जादू सारे देश में एक नई पहचान बना चुका है। स्कूल की एक ट्रिप पर ईशा के गाए एक गाने ने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर धूम मचा दी थी। ईशा की आवाज का जादू इतना चला कि इनके एक वीडियो को ही इंटरनेट पर 1 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद देश में अपनी पहचान बनाने वाली ईशा को कई सिंगिंग ऑफर भी मिल चुके हैं।
4 of 6
shaheera
- फोटो : file photo
शाहिरा
कश्मीर में हिंसा के बेहद मुश्किल हालातों के बीच तालीम की हिम्मत और अपनी प्रबल इच्छा शक्ति के बल पर बोर्ड परीक्षाओं में टॉप करने वाली शाहिरा आज सारे देश की बेटियों के लिए एक मिसाल बन चुकी है। उस गाढ़े वक्त में,जबकि सारे कश्मीर में हिंसा की आग से जीवन बुरी तरह प्रभावित था, शाहिरा ने बोर्ड की परीक्षाएं दीं और अलगाववादियों के उन नापाक मंसूबों को तोड़ दिया, जो कि कश्मीर की बेटियों को तालीम की ताकत से दूर होने की नसीहत देते थे। अपनी हिम्मत के बल पर बोर्ड परीक्षाओं में सबसे ज्यादा 498 अंक हासिल करने वाली शाहिरा की कहानी जिस रोज अखबार में छपी सारे देश ने कश्मीर की इस बेटी की हिम्मत को सलाम किया।
विज्ञापन
5 of 6
Parul
- फोटो : file photo
पारूल जसरोटिया
पारूल जसरोटिया भले ही जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय में पर्यटन से डाक्टरेट कर रही हों, लेकिन पर्यटन और रोमांच सिर्फ उनकी किताब ही नहीं, जिंदगी का भी हिस्सा है। ऊंचे पहाड़ों पर ट्रैकिंग की शौकीन पारूल ने अब तक बीस से अधिक पहाड़ों पर ट्रैकिंग पूरी की है और अब वह देश की कठिन से कठिन चोटियों पर बढ़ने की तैयारियों में जुटी हैं। पर ऐसा नहीं कि पारूल ने अपने शौक के लिए पढ़ाई की जरूरतों को नजरअंदाज किया हो। यह सुनकर खास ही लगता है कि ट्रैकिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स के शौक और शादीशुदा जिंदगी की जिम्मेदारियों को एक साथ निभाने वाली पारूल ने टूरिज्म और मार्केटिंग में एमबीए किया और हाल में भी डाक्टरेट की उपाधि पाने की तैयारी कर रही हैं। पारूल ने जिस शिद्दत से अपने जुनून के लिए काम किया वह देश की हर उस महिला के लिए मिसाल ह,ै जो अपने शौक को पूरा करने की हिम्मत रखती है।
रूवैदा सलाम
आतंक के साए में पहले मेडिकल से लेकर सिविल सर्विसेज तक की परीक्षा पास की। जिस कुपवाड़ा का नाम आमतौर पर किसी मुठभेड़ के दौरान सुर्खियों में आता था, उसका नाम एक बेटी की उस सफलता के बाद अखबारों में दिखाई देने लगा। कश्मीर में तनाव के बेहद मुश्किल हालातों के बीच मेहनत के बल पर पहले एमबीबीएस और उसके बाद संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करने वाली रूवैदा सलाम की कहानी आज की महिलाओं के लिए मिसाल है। 26 साल की उम्र में रूवैदा ने यूपीएससी की परीक्षा पास की और जिसके बाद उन्हें भारतीय पुलिस सेवा में चयनित किया गया। रूवैदा ने इसके बाद आईएएस की परीक्षा भी क्वालिफाई की। रुवैदा सलाम पहली कश्मीरी मुस्लिम महिला हैं, जिन्होंने सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास कर घाटी के मुश्किल हालातों में रह रहे युवाओं के लिए नजीर पेश की है।