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Exclusive: घाटी में दबाव के बाद आतंकियों ने बदली हमले की रणनीति

Thu, 20 Aug 2020 09:32 AM IST
प्रशांत कुमार अमृतपाल सिंह बाली, जम्मू-कश्मीर
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तलाशी अभियान चलाते सुरक्षाबल - फोटो : बासित जरगर
कश्मीर घाटी में सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने के लिए आतंकियों ने एक बार फिर से हिट एंड रन की रणनीति अपनाई है। आतंकियों ने नाके पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाना शुरू किया है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आतंकियों की रणनीति में बदलाव के साथ ही उनसे निपटने की रणनीति में भी बदलाव लाया जाता है। पिछले एक सप्ताह के दौरान आतंकियों द्वारा घाटी में एक के बाद एक सुरक्षाबलों पर हमलों को नजदीक से अंजाम दिया गया है, जिसमें पांच सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर पुलिस के तीन जवान, जबकि सीआरपीएफ के दो जवान शामिल हैं।

 
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तलाशी अभियान चलाते सुरक्षाबल - फोटो : बासित जरगर
इस महीने पहला हमला 14 अगस्त को जम्मू कश्मीर पुलिस और एसएसबी की संयुक्त नाका पार्टी पर श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र नौगाम में हुआ था। जिसमें जम्मू कश्मीर पुलिस के दो जवान शहीद हुए, जबकि दूसरा हमला बारामुला जिले के क्रीरी पट्टन में सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस की संयुक्त नाका पार्टी पर हुआ, जिसमें पुलिस का एक एसपीओ और सीआरपीएफ के दो जवान शहीद हुए।

 
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तलाशी अभियान चलाते सुरक्षाबल - फोटो : बासित जरगर
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आतंकियों द्वारा किए गए दोनों हमले हिट एंड रन की रणनीति के तहत अंजाम दिए गए। दोनों हमलों के पीछे आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ बताया जा रहा है। इससे यह साबित होता है कि काफी समय बाद लश्कर के आतंकियों द्वारा हिट एंड रन की रणनीति के तहत हमला शुरू किया गया है। उनका यह भी मानना है कि इस रणनीति के तहत आतंकी ऐसे समय को चुनते हैं, जिस समय जवान तैनाती में व्यस्त होते हैं।

 

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तलाशी अभियान चलाते सुरक्षाबल - फोटो : बासित जरगर
उन्होंने यह भी बताया कि आतंकियों का इस तरह की रणनीति अपनाने के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला यह कि इस वर्ष 150 से अधिक आतंकी मारे गए हैं। जिनमें कई कमांडर भी शामिल हैं। दूसरा कारण यह है कि मारे गए आतंकियों की कमी को पूरा करने के लिए स्थानीय भर्ती में भी आतंकी संगठन असफल रहे हैं। इन दोनों कारणों की वजह से आतंकी खेमों में हताशा है। कुछ भटके हुए युवा भी हैं, तो उनके पास हथियारों की कमी है। इसके चलते वह ऐसे हमलों को अंजाम देकर राइफल छीनने की कोशिश को अंजाम देने की कोशिश करते हैं। हालांकि आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हर पहलू को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाई जाती है।
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तलाशी अभियान चलाते सुरक्षाबल - फोटो : बासित जरगर
हाल ही में जम्मू कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह ने भी कहा था कि अगर सुरक्षा व्यवस्था के हवाले से बात की जाए, तो घाटी में पहले के मुकाबले मौजूदा हालात काफी बेहतर हैं। दो जिलों में 4-जी इंटरनेट सेवा की बहाली भी उसी सुधार का ही एक नतीजा है। वहीं डीजीपी ने भी यह कहा कि पिछले कुछ दिनों से एक अलग ही ट्रेंड आतंकियों की ओर से देखने को मिला है, जिसमें उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ साथ सुरक्षाबलों को निशाना बनाना शुरू किया गया है।  
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