जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदान के दौरान विदेशी राजनयिकों का एक प्रतिनिधिमंडल बुदगाम में मतदान केंद्र पर पहुंचा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का जायजा लिया।
जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण के दौरान, केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए विभिन्न देशों के राजनयिकों को मतदान प्रक्रिया का अवलोकन करने के लिए आमंत्रित किया है। यह पहली बार है जब विदेशी राजनयिकों को इस क्षेत्र में चुनाव देखने के लिए आमंत्रित किया गया है।
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विदेशी राजनयिकों
- फोटो : बासित जरगर
इस आयोजन में 15 देशों के 16 राजनयिक शामिल हैं, जिनमें अमेरिका, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे प्रमुख पश्चिमी लोकतंत्रों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इन राजनयिकों का एक दल बुधवार को श्रीनगर पहुंचा और उन्होंने बडगाम जिले में मतदान केंद्रों का दौरा किया। दक्षिण अफ्रीकी राजनयिक लारा स्वार्ट ने कहा, 'यह मेरे लिए एक विशेष अवसर है कि मैं जम्मू और कश्मीर में मतदान प्रक्रिया का अवलोकन करने आई हूं।'
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विदेशी राजनयिकों का यह दौरा जम्मू और कश्मीर के छह जिलों में 26 निर्वाचन क्षेत्रों के मतदान के दिन आयोजित किया जा रहा है। इस दल में 20 सदस्य शामिल हैं, जिनमें से चार विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि हैं।
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इस दौरे से पहले, अगस्त में अमेरिकी राजनयिकों का एक दल भी कश्मीर घाटी का दौरा कर चुका है, जिसमें राजनीतिक मामलों के मंत्री-काउंसलर ग्राहम मेयर और पहले सचिव गैरी एप्पलगार्थ शामिल थे। उन्होंने स्थानीय राजनीतिक नेताओं, जैसे पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और जेके पीपुल्स कांफ्रेंस के प्रमुख सजाद लोन से भी मुलाकात की थी।
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कुछ लोगों ने इसे जम्मू और कश्मीर के लिए एक सकारात्मक कदम माना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियों से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश जाएगा कि जम्मू और कश्मीर में चुनावी प्रक्रिया सफलतापूर्वक चल रही है।
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गौर करने वाली बात यह है कि पिछले वर्ष जी20 पर्यटन गोल मेज सम्मेलन में भी कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था, जो इस क्षेत्र में पर्यटन और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में, यह दौरा न केवल चुनावी प्रक्रिया को उजागर करता है, बल्कि जम्मू और कश्मीर के विकास के लिए एक नया अध्याय भी खोल सकता है।
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केंद्र सरकार का यह कदम जम्मू और कश्मीर की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में विश्वास स्थापित करने के लिए है। चुनावों की यह प्रक्रिया और इसमें विदेशी प्रतिनिधियों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए गंभीर है।
अगले कुछ वर्षों में जम्मू और कश्मीर की राजनीतिक स्थिति कैसे विकसित होती है, यह देखने योग्य होगा। क्या यह क्षेत्र फिर से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ेगा, या यह राजनीतिक अस्थिरता का सामना करता रहेगा? इस पर सभी की नजरें हैं।