भारत-पाकिस्तान के बीच डीजीएमओ स्तर पर संघर्षविराम समझौते से सीमावर्ती इलाके में रहने वाले लोगों में खुशी का माहौल है। लोग कहते हैं कि अगर पाकिस्तान समझौते पर कायम रहता है तो लंबे अर्से बाद वह खुले आसमान में बेफ्रिक होकर सांस ले सकेंगे। अभी तक वह 24 घंटे अनहोनी की आशंका में जी रहे थे। उन्हें डर रहता है कि पता नहीं कब सीमा पार से चली गोली उनकी जिंदगी छीन ले।
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संघर्षविराम का उल्लंघन
- फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
म्युनिसिपल कमेटी खौड़ के चेयरमैन डिप्टी राम और बुजुर्ग महिला धनी देवी ने बताया कि हम लोग 1971 से पहले छंब में रहते थे। 1971 में हुए युद्ध की वजह से हम लोग अपनी उपजाऊ जमीनें छोड़कर खौड़ कैंप में रह रहे हैं। पहले भी कई बार समझौता हुआ है अगर इस पर पाकिस्तान ईमानदारी दिखाता तो हमारा इतना नुकसान नहीं होता। आज हम लोग अपनी जमीनों के मालिक होते और खेतीबाड़ी कर रहे होते।
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खुलेंगे स्कूल, बच्चे पढ़ सकेंगे
राजोरी के सीमावर्ती इलाके के लोगों का कहना था कि पिछले करीब दो दशक से पाकिस्तानी सेना बार-बार संघर्ष विराम का उल्लंघन करके रिहायशी इलाकों और सैन्य चौकियों को निशाना बनाती आ रही है। इसमें जानमाल का भारी नुकसान होता है। लोगों को घरों से निकलकर बंकरों मे पनाह लेनी पड़ती है। मकानों को भी नुकसान पहुंचता है। खेती के काम रुक जाते हैं। गोलाबारी के चलते कई-कई दिन स्कूल-कॉलेज बंद रहते हैं। अगर पाकिस्तान अपनी बात पर कायम रहता है तो माहौल बदलेगा। स्कूल खुलेंगे और बच्चे पढ़ाई कर सकेंगे।
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खेत आबाद हो जाएंगे
पुंछ में सीमावर्ती इलाके के लोगों का कहना है कि इससे पहले भी कई बार पाकिस्तान की तरफ से इस प्रकार के वादे किए गए हैं लेकिन हर बार पाकिस्तानी सेना ने ही संघर्षविराम का उल्लंघन किया है। गोलाबारी बंद होने से पिछले कई वर्षों से वीरान पड़े हमारे खेत आबाद हो जाएंगे।
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हीरानगर में पूरी-पूरी रात हुई गोलाबारी
पिछले एक वर्ष के दौरान हीरानगर में आईबी पर पाकिस्तानी रेंजर्स ने भारतीय सीमा पर लगातार गोलाबारी की है। कई बार तो पूरी रात गोलियों के धमाकों के बीच ही गुजरी। हमेशा लोग अनहोनी की आशंका में जीते हैं। लोगों को उम्मीद है कि अब वह बिना भय के जी सकेंगे।
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वहीं पाकिस्तान ने डायरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन (डीजीएमओ) स्तर की बातचीत में भले ही भारत को भरोसा दिलाया हो कि वह संघर्ष विराम समझौते का पालन करेगा परंतु उसका इतिहास इसकी पुष्टि नहीं करता। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर से लगती नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन करता रहा है।
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इस वर्ष बीते 56 दिनों में उसने 591 बार समझौते का उल्लंघन करते हुए गोलाबारी की है। सीमापार से होने वाली इस गोलाबारी के कारण इस इलाके में रहने वाले लोग हमेशा डर के साए में जीते हैं। घाटी में तैनात सेना के एक आला अधिकारी ने बताया कि यहां पाक प्रायोजित आतंकवाद की करीब तीन दशक पहले हुई शुरुआत के साथ ही पाकिस्तान ने एलओसी के उस पार से आतंकवादियों को घाटी में धकेलना शुरू कर दिया था।
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पिछले कुछ वर्षों में एलओसी पर भारतीय सेना के काउंटर इंफिल्ट्रेशन ग्रिड के मजबूत होने के बाद से घुसपैठ में कमी के चलते पाकिस्तान ने रणनीति में बदलाव किया और आतंकियों की घुसपैठ को कामयाब बनाने के लिए पाकिस्तानी सेना द्वारा कवर फायरिंग का सहारा लिया गया।
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इसके चलते जब भी कभी आतंकियों को घुसपैठ करानी होती है तो पाकिस्तानी सेना गोलाबारी का सहारा लेती है। जनवरी में 336 और इस महीने 25 फरवरी तक 255 बार गोलाबारी की गई।