बारामुला के उड़ी में 12 घंटे तक भारी गोलाबारी हुई। करीब 15 गांवों को पाकिस्तानी सेना ने निशाना बनाया। कई घरों को नुकसान पहुंचा है। ग्रामीण अब भी डटे हैं। हर घर में एक पुरुष ने मोर्चा संभाला है।
सीमावर्ती जिले बारामुला के उड़ी सेक्टर में वीरवार की रात पाकिस्तान ने फिर नापाक हरकत करते हुए करीब 15 गांवों में भारी गोलाबारी की। 12 घंटे चली इस गोलाबारी में भले ही कोई जान का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन कई घरों को भारी क्षति पहुंची। पाकिस्तान की इस दुस्साहसिक हरकत ने एक बार फिर उसकी बौखलाहट और कायरता को उजागर किया है। मोहरा, सलामबाद और गिंगल समेत कई गांवों में रातभर दहशत का माहौल रहा।
मोहरा निवासी गुलाम मोहम्मद भट ने बताया कि पहली बार इतने अंदर तक गोलाबारी हुई है। उनका घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं, चरणजीत सिंह ने बताया कि रात 10:10 बजे से सुबह 8 बजे तक गांव में लगातार गोलों की बारिश होती रही। गांव के 4-5 मकान पूरी तरह टूट चुके हैं। गांव में करीब 800-900 परिवार हैं, जिसमें से करीब 80 प्रतिशत सुरक्षित स्थानों पर चले गए, लेकिन हर घर में एक पुरुष सदस्य डटा हुआ है।
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उड़ी में लोग छोड़ रहे हैं घर
- फोटो : बसित जरगर
सेना हर स्थिति के लिए तैयार
पाकिस्तान का यह दुस्साहस एलओसी के करीब गिंगल, चुरुवा, सलामबाद, दछना, सिलिकूट, लगामा, लच्छीपोरा गरकोट, धऊल, मुथल, तोरना, रुस्तम, कमलकोट, उरूसा और सालाकोट जैसे गांवों में भी दिख, जहां भारतीय नागरिकों ने संयम और साहस से मुकाबला किया। गिंगल के अब्दुल अजीज भट्टी ने कहा कि पाकिस्तान ने जानबूझकर रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया, जिससे आम नागरिकों में डर पैदा हो, लेकिन भारतीयों का हौसला अडिग है। कई लोगों ने बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया, जबकि घर के पुरुष सुरक्षा में डटे रहे। पूरे इलाके में भारतीय सेना सतर्क है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
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गोलीबारी के बाद सुरक्षित स्थान की ओर जाते लोग
- फोटो : संवाद
तंगधार : आधे से ज्यादा सुरक्षित ठिकानों पर, बाकी की रातें बंकरों में कट रहीं
अजीम यूसुफ, कुपवाड़ा के तंगधार से
एलओसी पार के आतंकी शिविरों पर हमले से पाकिस्तानी सेना बौखलाई हुई है। सामरिक क्षेत्रों में हमले विफल हो रहे हैं तो पाकिस्तानी सेना नागरिक इलाकों को निशाना बना रही है। लगातार तीसरे दिन वीरवार रात भी तंगधार के त्रिबुनि, शमसपोरा, बागबेला, दिलदार, भटपोरा, नवगावरा आदि गांवों में पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलाबारी की। इससे मकानों, दुकानों संपत्तियों और वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा है। हमले के कारण आधे से अधिक लोग पहले ही घर खाली कर चले गए हैं। बाकी बचे लोगों की रात बंकरों में कट रही है। यहां के आदिल भट ने बताया कि पहलगाम हमले के बाद से ही छिटपुट गोलीबारी चल रही थी। मंगलवार रात से भारी गोलाबारी हर रात की जा रही है। बंकर में रह रहीं स्थानीय निवासी शबनम ने बताया कि कई वर्षों से यहां रह रहे थे। बड़ी मेहनत से अपने सपनों का घर बनाया था।
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गोलीबारी के बाद सुरक्षित स्थान की ओर जाते लोग
- फोटो : संवाद
ज्यौड़ियां : सीमावर्ती लोगों में डर नहीं... पर सतर्क
कुलवीर सिंह, छंब ज्यौड़ियां से
भारत-पाकिस्तान में तनातनी के बीच सीमावर्ती गांवों के लोग सतर्क हैं। लोग वीरवार शाम को घरों को ताला लगा सुरक्षित ठौर पर पहुंच गए। सुबह घर लौटे पलांवाला के नवीन सिंह और निधि चौधरी ने बताया कि वे रिश्तेदार के घर चले गए थे। घर में मवेशी भी हैं, उनको भी चारा-पानी डालना है। शाम ढलने से पहले फिर सुरक्षित स्थान पर निकल जाएंगे। सीमावर्ती सभी गांवों के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए खौड़ प्रशासन की तरफ से 18 केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर शाम को लोग पहुंच जाते हैं। बीती रात पाकिस्तानी हमले के बाद भी खौड़ और ज्यौड़ियां के बाजार खुले देखे गए। यह बात अलग है कि रौनक नहीं थी। खौड़ बाजार के दुकानदार बिल्लू साह और दीपक सिंह बताते हैं कि सुराक्षा जरूरी है। इसलिए सभी अपने परिवारों को सुरक्षित ठिकानों पर भेज रहे हैं।
सुरक्षाबल चौकस... गश्त बढ़ी
सुरक्षाबलों को उच्च सतर्कता पर रखा गया है। सीमावर्ती इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के प्रयासों की सराहना करते हुए मांग की है कि जब तक सीमा क्षेत्र में पूर्ण शांति स्थापित नहीं हो जाती तब तक इन सुरक्षा उपायों को जारी रखा जाए।
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गोलाबारी में क्षतिग्रस्त मकान
- फोटो : संवाद
शांत रहा रामगढ़...
राजन चौधरी, रामगढ़ से
पिछले दो दिनों से प्रशासन सीमावर्ती गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज रहा है। रामबढ़ के लोगों का कहना है कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि जम्मू में फायरिंग हुई, लेकिन रामगढ़ क्षेत्र अभी शांत है। जब भी ऐसा माहौल बनता था, तो हमारे क्षेत्र में सबसे पहले गोलाबारी शुरू होती थी। प्रेमपाल चौधरी ने कहा कि गांव में फायरिंग बिल्कुल नहीं हुई है, हालांकि पूरी रात सीमा से गोलाबारी की आवाज सुनाई देती रही। परिवार को रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है। गोलीबारी शुरू होने पर डर है, लेकिन मजबूरी मवेशियों की है। सीमा पर बसे हर गांव में एक-एक आदमी मवेशियों की देखभाल के लिए घरों में रुका है। सभी गांवों को प्रशासन शाम होते ही खाली करवा रहा है। ग्रामीणों को बसों से शिविरों में भेजा जा रहा है।
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गोलाबारी में क्षतिग्रस्त मकान
- फोटो : संवाद
पाकिस्तान से नहीं सुनी जुमे का अजान
सीमा से सटे पाकिस्तान के गांवों में शुक्रवार को पहले मस्जिदों में अजान सुनाई देती थी, लेकिन इस बार जुमे पर सुबह से ही कोई आवाज सुनाई नहीं दी और न ही खेतों में कोई पाकिरतानी किसान दिखा। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जाकर उस पार कैमरे से गांव की हरकत देखी तो गांव के गांव सुनसान थे। सड़कों पर कोई गाड़ी नहीं थी। ऐसा लग रहा था कि पाकिसतान के लोग दिन में भी घरों में वापस नहीं आ रहे हैं।
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गोलाबारी में क्षतिग्रस्त मकान
- फोटो : पीटीआई
युवाओं में जज्बा, नहीं छोड़ेंगे गांव, फौजियों का देंगे साथ
जितेंद्र सिंह, परगवाल से
परगवाल सेक्टर के साथ लगने वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा हालांकि खामोश है, लेकिन लोगों के दिलों में दहशत बरकरार है। वैसे तो प्रशासन ने ज्यादातर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया है, उसके बावजूद बहुत सारे ग्रामीण, खासकर युवा अब भी गांवों में ही डटे हुए हैं और ये हरगिज अपना घर छोड़कर नहीं जाना चाहते। सरहद का आखिरी गांव हमीरपुर कोना, जिसके दो तरफ पाकिस्तान की सीमा और एक तरफ दरिया चिनाब है, वहां खड़े कुछ युवाओं ने बताया कि वे अपना गांव छोड़कर नहीं जाएंगे, बल्कि सीमा सुरक्षा बल के जवानों के साथ डटकर पाकिस्तान को मजा चखाना चाहते हैं। एक पूर्व सैनिक, काली मन्हास ने बताया कि प्रशासन के अधिकारियों ने उनकी कई बार गांव छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा है, लेकिन वे ऐसा करके अपने जवानों का मनोबल नहीं गिराना चाहते। वे भी एक फौजी हैं और इस बार मौका है पाकिस्तान को सबक सिखा देना चाहिए। पूर्व सैनिक बलवीर सिंह का कहना था कि पाकिस्तान की तरफ से बार-बार फायरिंग की अब आदत सी हो गई है। उन्होंने कहा कि जंग के हालात होने के बावजूद वे अपने घर पर डटे हुए हैं और वे अपना घर छोड़कर कहीं भी नहीं जाना चाहते। उनका कहना था कि हमें अपनी सेना पर पूरा भरोसा है, वे पाकिस्तान को मजा चखाकर ही रहेंगे।
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बंकरों में लोग
- फोटो : पीटीआई
महीनों बंकरों में रह लेंगे, पर पाकिस्तान को सबक सिखा दो
राजीव सिंह लंगेह, अरनिया से
जम्मू के अरनिया सेक्टर में पाकिस्तान की ओर से हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच भारतीय सेना की मुस्तैदी से हमले नाकाम कर दिए गए है। इन हालातों के बावजूद सीमावर्ती ग्रामीणों के हौसले बुलंद हैं। हर गांव से एक ही आवज उठ रही है, इस बार पाकिस्तान की सबक सिखा दो, हम महीनों बंकरों में रह लेंगे। गांव पिंडी कुदवाल के राजवंत सिंह ने कहा कि पाकिस्तान की नापाक हरकतों को अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। काकू दे कोठों के विक्की चौधरी ने बताया कि अधिकांश ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच चुके हैं, लेकिन हर घर में एक सदस्य मौजूद है। जो सटे हुए हैं। डीसी जम्मू सचिन कुमार वैश्य और एसएसपी जोगिंदर सिंह ने तरेषा गांव का दौरा कर बंकरों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों को सतर्क किए जाने के निर्देश दिए। पूर्व सरपंच बालगेर कौर के साथ बैठक कर सुरक्षा प्रबंधों की समीक्षा की गई। चंगिया गांव के रघुवीर सिंह ने बताया कि रात को आसमान में तेज रोशनी दिखाई दी, जो बाद में ड्रोन और मिसाइल हमले निकले। भारतीय सुरक्षा बलों ने पूरे सेक्टर को सुरक्षित बनाए रखा है, जिससे लोगों का आत्मविश्वास और जज्बा बना हुआ है।
बच्चों के लिए लगाया ट्यूशन
बच्चों को शिक्ष के लिए अभिभावक मोहल्लों में ट्यूशन की व्यवस्था कर रहे हैं। 10 से 15 बच्चों का समूह बनाकर शिक्षक को घर बुलाया जा रहा है। गृहिणी अनीता देवी ने कहा, हम हर तकलीफ सहने को तैयार हैं, लेकिन अब पाकिस्तान को जवाब जरूरी है।
अखनूर: अनिश्चितता को लेकर माथे पर शिकन, राशन जुटाते दिखे लोग
अतुल सूदन, अखनूर से
अखनूर में शुक्रवार को जनजीवन सामान्य जरूर दिखा, लेकिन अनिश्चितता को लेकर माथे पर शिकन जरूर नजर आई। बाजार खुले रहे। लोग महीने भर का राशन जमा करते नजर आए। माहौल को लेकर सवाल पर राकेश कुमार कहते हैं कि हालात बिगड़ सकते हैं, इसलिए तैयारी जरूरी है। शिव शर्मा कहते हैं, पहले गोलाबारी के समय खोड़ से अपने रिश्तेदारों को अखनूर बुला लिया करता था, पर अब ऐसा नहीं कर पा रहा हूं। कहते हैं, पहले अखनूर सुरक्षित था, अब यहां भी खतरा है। हथियार अब बेहद आधुनिक हो गए हैं, दूर तक उनकी रेंज है। बहरहाल, मां वैष्णो देवी सहारा है। गढ़वाल में इक्का-दुक्का बुजुर्ग या युवा नजर आए। कई ने बताया कि जरूरी काम निपटाकर, शाम को सुरक्षित स्थानों को और लौट जाएंगे। प्रशासन सतर्क है और सुरक्षाबलों की गश्त बढ़ा दी गई है।