भिंडरावाले के पोस्टर पर बुधवार से शुरू हुआ बवाल वीरवार को जानलेवा हिंसा में तब्दील हो गया। पोस्टर हटाने के विरोध में सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों और पुलिस में जमकर टकराव हुआ। पुलिस की गोली से एक युवक की मौत हो गई। दोनों पक्षों के कई दर्जन लोग जख्मी हैं। देर शाम थाना क्षेत्र के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया। घटना की दांडिक जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। रात होते होते रियासत के कई इलाकों में प्रदर्शन शुरू हो गए थे जो की अभी भी जारी हैं। सेना ने देर शाम एयरपोर्ट रोड सहित कई अन्य इलाकों में फ्लैग मार्च किया।
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पोस्टर पर भड़की हिंसा में दोनों ओर से जमकर पथराव हुआ। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पहले आंसू गैस के गोले छोड़े। फिर हवाई फायरिंग की। दर्जनों वाहनों में तोड़फोड़ हुई। कई वाहन बुरी तरह चकनाचूर हो गए। पानी की बौछार करने वाले पुलिस वाहन के शीशे तोड़ दिए गए। आसपास के घर भी अछूते नहीं रहे। कई घरों के दरवाजे-खिड़कियों को नुकसान पहुंचा।
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सतवारी एयरपोर्ट से आरएस पुरा की ओर जाने वाली सड़क को बंद कर दिया गया। पुलिस की गोली से जान गंवाने वाले जगजीत सिंह चोहाला इलाके के रहने वाले थे। उनकी आंख के पास गोली लगी। दो पुलिस कर्मियों सहित पांच घायलों को जीएमसी में भर्ती कराया गया।
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बीती शाम पुलिस द्वारा जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर वाला पोस्टर हटाने से उठा विवाद थम गया सा लगा था। वीरवार की सुबह पोस्टर फिर उतार लिए जाने से फिर विवाद खड़ा हो गया। एहतियात के तौर पर सुबह से ही भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पानी की बौछार और आंसू गैस छोड़ने वाले वाहन भी बुला लिए गए। दोपहर होते-होते माहौल तनावपूर्ण हो गया।
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सिख प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाकर रास्ता बंद कर दिया। इस दौरान स्टेट गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चेयरमैन त्रिलोचन सिंह वजीर भी मौके पर पहुंच गए। पूर्व मंत्री रमण भल्ला भी पहुंचे, लेकिन डीसी ने उन्हें वहां ठहरने नहीं दिया।
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करीब पौने तीन बजे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े पर प्रदर्शनकारियों की एक न चली। देर तक हिंसक झड़प होती रही। पुलिस ने रिहायशी इलाकों में भी उस ओर आंसू गैस के गोले छोड़े, जिधर से पथराव किया जा रहा था।
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प्रदर्शनकारी पीछे हटने की बजाय पुलिस से भिड़ते रहे। स्थिति अनियंत्रित देख पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को गोली लगी। देर शाम तक हालात काबू में आते न देख प्रशासन की ओर से उस इलाके में कर्फ्यू का ऐलान कर दिया गया। हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण हैं।
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पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई: निर्मल सिंह झड़पों में युवक की मौत दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार कानून, व्यवस्था को बिगड़ने नहीं देगी। पुलिस की सूचना के अनुसार हिंसक प्रदर्शन में आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। हालात को सुधारने के लिए प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू और धारा 144 लागू की गई है। पुलिस के भी लोग घायल हुए हैं और सिख प्रदर्शनकारी भी। हिंसा दुर्भाग्यपूर्ण है। सभी पक्षों से अपील की कि वह हालात को सुधारने में मदद करें। - उप मुख्यमंत्री, डॉ निर्मल सिंह
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मौत की खबर पर जीएमसी में अफरा-तफरी गाडीगढ़ में जरनैल सिंह भिंडरावाला का पोस्टर उतारने को लेकर हुए विवाद में चौआला निवासी जगजीत सिंह की मौत हो गई। यह खबर फैलते ही लोगों का हुजूम जीएमसी में इकट्ठा होने लगा। गोली लगने से पांच युवक जख्मी हो गए। इनमें दो पुलिस कर्मी और दुकान में काम करने वाला कर्मचारी भी शामिल है।
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जख्मी युवकों के पहुंचने पर जीएमसी में अफरा-तफरी मच गई। पूर्व एमएलसी त्रिलोचन सिंह वजीर, सिख समुदाय के अलग-अलग संगठनों के प्रमुख भी पहुंच गए। सभी घायलों का हाल-चाल जाना और डाक्टरों को बेहतर तरीके इलाज करने को कहा है।
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जगजीत सिंह के सिर पर गोली लगी थी, साथ लाने वाले अन्य युवकों के मुताबिक वह बहुत तेजी के साथ कार को चलाकर लाए थे, लेकिन रास्ते में ही जगजीत सिंह ने दम तोड़ दिया। जगजीत सिंह की उम्र 35 के आसपास है। मौत की खबर मिलते ही लोगों की भीड़ जीएमसी में जुट गई।
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दशमेश नगर, डिग्यिाना निवासी इंद्रजीत सिंह (24) की दाईं टांग पर गोली लगी है। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जीएमसी की इमरजेंसी में रखा गया है। धीरे-धीरे इंद्रजीत की टांग पर दर्द बढ़ता जा रहा था। इंद्रजीत ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। कुछ ही मिनटों के बाद चट्ठा पिंड, भौर कैंप निवासी हवनीत सिंह (24) को जीएमसी लाया गया। उसकी कमर के पिछले हिस्से और टांग में गोली लगी है।
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साथ आए युवक डाक्टरों से गोली जल्द निकालने की मांग करते रहे, लेकिन डाक्टर उन्हें यह समझाते रहे हैं कि एक्सरे या अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का इलाज किया जाएगा। करीब आधे घंटे के बाद सिंबल कैंप निवासी गुरदेव सिंह (24) को जीएमसी लाया गया। इसके पैर और चूले पर गोली लगीं थी।
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पुलिसकर्मी बोलने में असमर्थ पत्थरबाजी में दो पुलिस कर्मी भी जख्मी हुए हैं। इनमें एसपीओ सिंबल कैंप निवासी मनमीत सिंह (30) और कांस्टेबल मूलरूप से सरसाई, डोडा निवासी राकेश कुमार (28) शामिल है। पत्थर लगने से दोनों के चेहरों पर गंभीर घाव हुए हैं। मनमीत सिंह के चेहरे पर कई जगह पर सूजन हुई है। वह बोलने में असमर्थ है। इसी तरह से राकेश के मुंह पर गंभीर जख्म हुआ है। मुंह खुल नहीं पा रहा है।
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दुकानकर्मी की हालत गंभीर गोली लगने से दुकानदार मनोज कुमार (20) निवासी बयाना घर जम्मू की बाईं टांग जख्मी है। फिलहाल अस्पताल में उसकी दुकान का मालिक ही उसके साथ है।
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एसपी नार्थ ने जाना हाल गोली और पथराव में जख्मी हुए सभी लोगों का एसपी नार्थ एसकेएस चौहान ने हाल जाना। मृतक के परिवार के लोग कई घंटों तक जीएमसी नहीं पहुंचे थे। एसपी चौहान ने खुद साथ जाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए जीएमसी के शवगृह में पहुंचाया। इसके बाद जख्मियों की हालत देखी और डाक्टरों देखभाल करने को कहा है।
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पुलिस गोलीबारी की न्यायिक जांच हो: भाजपा पुलिस गोलीबारी में सिख युवा की मौत को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए भाजपा ने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। वीरवार रात को भाजपा की आपात बैठक प्रदेशाध्यक्ष एवं सांसद जुगल किशोर शर्मा की अध्यक्षता में हुई। इसमें भाजपा ने सभी समुदायों से आग्रह किया कि वह शांति और सांप्रदायिक सद्भाव और आपसी भाईचारा बनाए रखें। प्रदेशाध्यक्ष जुगल किशोर शर्मा ने इस अवसर पर कहा कि कुछ तत्व स्थिति का सियासी लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से आग्रह किया वह जन विरोधी साजिशों को नाकाम बनाए।
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भाजपा ने मृतक के परिवारवालों को पर्याप्त मुआवजे के अलावा घायलों को भी मुआवजा मुहैया करवाने की मांग भी करते हुए सरकार से कहा कि वह भाजपा कानून और व्यवस्था की स्थिति को कड़ाई से बहाल करवाएं। पार्टी ने कहा कि कानून व्यवस्था रियासत में जनता के हित में जरूरी है। बैठक में महासचिव संगठन अशोक कौल, महासचिव मुनीष शर्मा, विधायक राजेश गुप्ता, वरिष्ठ नेता एसएस बिजराल, मुख्य प्रवक्ता सुनील सेठी, भाजपा नेता विरेंद्रजीत सिंह भी मौजूद रहे।
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दिनभर अलर्ट पर रहे शहर के अस्पताल रानीबाग में पुलिस फायरिंग और पथराव की घटना से वीरवार दिनभर जीएमसी सहित शहर के अन्य अस्पताल अलर्ट पर रहे। जीएमसी में इमरजेंसी को मजबूत बनाने के साथ अधिक घायलों के आने की सूरत में अन्य वैकल्पिक व्यवस्थाएं की गई थीं। इमरजेंसी आपरेशन थियेटरों में भी उपयुक्त प्रबंध किए गए थे। अस्पताल में घायलों का हाल जानने के लिए पहुंचने वाली भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के भी तगड़े इंतजाम किए गए थे।
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जीएमसी में दोपहर को फायरिंग से घायलों के आने की सूचना पर इमरजेंसी को सामान्य मरीजों से खाली करवा दिया गया था। इसके अलावा आपदा प्रबंधन के तहत सभी तैयारी की गई थी। दिनभर अस्पताल के अधिकारी भी पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए थे। इसमें विभिन्न एजेंसियों से हालात के बारे में ताजा जानकारी ली गई। जीएमसी में आए फायरिंग के एक घायल को गांधीनगर अस्पताल से रेफर किया गया था।
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बैनर विवाद में वीरवार को एकबार फिर सिखों के भड़कने के बाद पुलिस और प्रशासन लगातार समझौते के प्रयास करता रहा, लेकिन बात नहीं बन पाई। कभी प्रदर्शनकारी नहीं माने तो कभी प्रशासन अड़ा रहा। एक समय प्रदर्शनकारियों का एक ग्रुप समझौते के लिए तैयार हो गया था, लेकिन कुछ लोगों के इंकार करने पर फिर अड़ंगा लग गया।
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घटनास्थल पर तनाव का आलम यह था कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच लगभग 100-150 गज की दूरी हमेशा बनी रही। एक दिन पहले दोनों पक्षोें में हुई झड़प के कारण पुलिसकर्मी भी उनसे दूरी बनाए हुए थे। सबसे पहले नेशनल कांफ्रेंस के पूर्व एमएलसी व जेएंडके गुरुद्वारा प्रबंधक बोर्ड के चेयरमैन वजीर सिंह तिल्लो कभी पुलिस तो कभी सिखों के साथ बातचीत करते रहे, लेकिन वह विवाद के हल के लिए किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच पाए।
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इसी दौरान भाजपा की महिला नेता अदिति शर्मा भी पहुंची। उन्हें भी कोई तवज्जो नहीं दी गई। कांग्रेस के पूर्व मंत्री रमन भल्ला घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन उसी समय आंसू गैस के गोले चलने शुरू हो गए और उन्हें अपनी गाड़ी बैक करनी पड़ी। बाद में उन्होंने फिर मौके तक जाने का प्रयास किया, लेकिन प्रशासन ने उन्हें रोक दिया।
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झड़प के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान घटनास्थल के आसपास के घरों को हुआ, जहां पथराव और आंसू गैस के गोले लगातार गिरते रहे। लगभग डेढ़ घंटे तक चली झड़प में जब पुलिसकर्मियों की संख्या घटने लगी तो एसएसपी ने अतिरिक्त पुलिस बल मंगवाया। कुछ युवकों को गोली लगने के बाद मामला ठंडा पड़ा। प्रदर्शनकारियों के पीछे हटने के बाद पुलिस आगे बढ़ी।
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इस दौरान हेलीकाप्टर से भी लगातार निगरानी की जाती रही। क्योंकि मुख्य सड़क के अलावा आसपास के क्षेत्रों से पत्थरबाजी होती रही। मामला ठंडा होने के बाद डीसी सिमरनदीप सिंह घटना स्थल पर पहुंचे और जायजा लिया। घटनास्थल के पास डीसी के पहुंचने पर कुछ घरों से बुजुर्ग बाहर निकल आए और उन्होंने डीसी को भी खरी-खोटी सुनाई। उनका आरोप था कि पुलिस ने उनके घरों में पथराव किया, जबकि उनका कोई कसूर नहीं था।
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घटनास्थल के करीब स्थित एक मकान के तमाम शीशे टूट गए और घर के अंदर खड़ी गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हो गई। इलाके में तनाव को देखते हुए प्रशासन ने देर शाम कर्फ्यू तो लगा दिया, लेकिन साथ ही सेना से मदद मांगी। इसके बाद सेना ने रात के समय इलाके में फ्लैग मार्च किया। रात को भी इलाके में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात रखा गया। कर्फ्यू के बावजूद रानीबाग में लोग घरों से निकल प्रशासन के प्रति रोष जताते रहे।
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शहर के बिगड़ते माहौल को देखते हुए जिला प्रशासन ने सिख समाज के बुद्धिजीवियों की बैठक बुलाई, लेकिन उसमें प्रशासन की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल पाया। पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में आयोजित बैठक में डिवीजनल कमिश्नर पवनदेव सिंह कोतवाल, डीसी सिमरनदीप सिंह, आईजीपी दानेश राणा, स्टेट गुरुद्वारा प्रबंधक बोर्ड के चेयरमैन त्रिलोचन सिंह वजीर व अन्य सिख नेता उपस्थित थे।
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इस दौरान सिख नेताओं ने प्रशासन से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने पर उच्चाधिकारियों से बातचीत करने को कहा। बताया जाता है कि सिख नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती तो शुक्रवार को मृत युवक का संस्कार होने पर भी संशय लग जाएगा।
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बैनर विवाद को नियंत्रित करने के लिए शहर के विभिन्न थानों की पुलिस और अफसरों को लगाया गया। इसके अलावा सीआरपीएफ को विशेष तौर पर नियुक्त किया गया। पुलिस का नेतृत्व एसएसपी उत्तम चंद खुद कर रहे थे। जबकि एसपी साउथ, एसपी नार्थ, एसपी आपरेशन, डीएसपी साउथ, नार्थ और सिटी के अलावा नवाबाद, बस स्टैंड, गांधी नगर, सतवारी थाने के एसएचओ भी पहुंचे। यही नहीं, कई सब इंस्पेक्टर, थाना प्रभारियों ने सिपाहियों की यूनिफार्म पहन ली और अपनी नेम प्लेट व स्टार भी हटा लिए।
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विवाद के दौरान नेताओं को घटनास्थल से दूर रखने का प्रयास किया गया। पूर्व मंत्री रमन भल्ला को भी उल्टे पांव वापस जाना पड़ा। जिला उपायुक्त सिमरनदीप सिंह ने उन्हें कहा कि वह यहां से लौट जाएं, क्योंकि किसी नेता को यहां आने की अनुमति नहीं है। यही नहीं, पुलिस के एक इंस्पेक्टर को भी भल्ला के पहुंचने पर डीसी ने खरी खोटी सुनाई। कहा कि किसी भी नेता को आने की अनुमति नहीं है। डीसी पुलिस के व्यवहार से भी खासे नाराज नजर आए। ज्योंही कर्फ्यू की घोषणा की गई तो पुलिसकर्मी चिल्लाते हुए लोगों को घरोें में जाने को कहने लगे। इस पर डीसी ने कहा कि वह तमीज से पेश आएं और लोगों से अच्छा व्यवहार करें।