मुफ्ती मोहम्मद सईद का जन्म बिजबिहाड़ा के बाबा मोहल्ले में 12 जनवरी 1936 को हुआ था। उन्होंने ग्रेजुएशन तथा विधि की डिग्री एसपी कालेज श्रीनगर से हासिल की। अरब इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल करने के लिए वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय गए।
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पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती उनकी बेटी हैं। उनकी तीसरी पुत्री रुबिया सईद का 1989 में मुफ्ती के केंद्रीय गृह मंत्री पद पर शपथ लेने के पांच दिन के भीतर ही आतंकवादियों ने अपहरण कर लिया।
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पांच आतंकियों की रिहाई के बाद उन्हें आतंकियों ने छोड़ा था। मुफ्ती की दूसरी पुत्री का नाम महमूदा है। पुत्र मुफ्ती तसादक हालीवुड में सिनेमेटोग्राफर हैं। मुफ्ती के साले सरताज मदनी हैं जो विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रह चुके हैं।
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मुफ्ती के पिता गुलाम मोहम्मद दक्षिणी कश्मीर के बिजबिहाड़ा गांव में धार्मिक शिक्षक थे। उनके पास खेती की जमीन नहीं थी। उनकी आमदनी केवल बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने से मिलने वाली राशि और दान से अर्जित राशि थी।
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मुफ्ती के दो भाई और एक बहन हैं। बड़े भाई धार्मिक शिक्षक थे और छोटा वन विभाग में फारेस्टर पद से सेवानिवृत्त हुआ था। बहन हाउस वाइफ रहीं।
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मुफ्ती ने अपना राजनीतिक सफर 1950 के दशक में डेमोक्रेटिक नेशनल कांफ्रेंस (डीएनसी) के साथ जुड़कर शुरू किया। डीएनसी में उन्हें जिला समन्वयक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।
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1962 में वे पहली बार बिजबिहाड़ा से राज्य विधानसभा के लिए चुने गए। पांच साल बाद वह दोबारा इस सीट के लिए चुने गए। इसके बाद डीएनसी प्रमुख गुलाम मोहम्मद सादिक ने उन्हें पार्टी का उप प्रधान नियुक्त किया।
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कुछ वर्षों बाद वे कुछ साथियों के साथ डीएनसी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। वे राज्य में कांग्रेस को मजबूती के साथ स्थापित करने वाले नेताओं में रहे।
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मुफ्ती कांग्रेस शासनकाल में 1971 में राज्यमंत्री और 1972 में कैबिनेट मंत्री बने। राज्य के कांग्रेस प्रधान तथा 1975 में पार्टी विधानमंडल दल के नेता भी रहे। उनके राजनीतिक सफर को उस वक्त धक्का लगा जब वे लगातार दो चुनाव हार गए।
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इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। नेशनल कांफ्रेंस सरकार को 1984 में पदच्युत करने में सफल रहे। 1986 में राजीव गांधी मंत्रिमंडल में उन्हें केंद्रीय पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया गया।
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मुफ्ती का कांग्रेस के साथ जुड़ाव 1987 तक रहा। इसके बाद वे वीपी सिंह के जनमोर्चा में शामिल हो गए। मुजफ्फरनगर से सांसद रहते हुए वीपी सिंह सरकार में 1989 में उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री बनाया गया। 1999 में दोबारा वे कांग्रेस में शामिल हुए।
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1999 में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी जम्मू कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी बना ली। नई पार्टी गठन के साथ ही उनका राजनीतिक सफर बुलंदियों पर पहुंच गया। 2002 में वे राज्य के मुख्यमंत्री बने।