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Ghulam Nabi Azad: पढ़िए ब्लॉक स्तर की राजनीति से लेकर आजाद का अब तक का सियासी सफर, ऐसे बने कांग्रेस के सिरमौर

Tue, 09 Feb 2021 11:49 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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गुलाम नबी आजाद - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस के दिग्गज नेता व राज्यसभा सदस्य गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल 15 फरवरी को पूरा हो रहा है। आजाद जम्मू-कश्मीर से राज्यसभा सदस्य हैं। वह गांधी परिवार के बेहद करीबी नेताओं में से एक हैं। राजनीति में उनके अनुभव और कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के लगभग सभी राज्यों में उनकी सक्रियता रही है। 
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गुलाम नबी आजाद
आजाद ने 1973 में भलस्वा में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के सचिव के रूप में राजनीति की शुरुआत की थी। इसके बाद उनकी सक्रियता और शैली को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें युवा कांग्रेस का अध्यक्ष चुना।आजाद ने महाराष्ट्र में वाशिम निर्वाचन क्षेत्र से 1980 में पहला संसदीय चुना लड़ा और जीत दर्ज की। 1982 में उन्हें केंद्रीय मंत्री के रूप में कैबिनेट में शामिल किया गया। आजाद के राजनीतिक जीवन में 2005 में वो स्वर्णिम समय भी आया जब उन्होंने बतौर मुखिया जम्मू-कश्मीर की सेवा की।

 
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गुलाम नबी आजाद - फोटो : PTI
गुलाम नबी आजाद ने कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। आजाद के जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष रहते हुए कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों में 21 सीटों पर जीत का परचम लहराया था। इसके परिणाम स्वरूप कांग्रेस प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी।

 

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गुलाम नबी आजाद
2015: वह पांचवीं बार राज्यसभा के लिए फिर से चुने गए।
2014: विपक्ष के नेता, राज्यसभा।
2009: चौथे कार्यकाल के लिए राज्यसभा के लिए चुना गया और बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया।
2008 भद्रवाह से जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए फिर से निर्वाचित, दया कृष्ण को 29936 मतों के अंतर से हराया।
 
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गुलाम नबी आजाद - फोटो : amar ujala
मन्हास, लावे और फयाज का कार्यकाल भी हो रहा पूरा
जम्मू-कश्मीर से भाजपा के राज्यसभा सदस्य शमशेर सिंह मन्हास और पीडीपी के सांसद नजीर अहमद लावे का कार्यकाल 10 फरवरी को पूरा हो रहा है। ऐसे में इनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का दौर भी तेज हो गया है। पीडीपी के एक और राज्यसभा सदस्य जिन्हें पीडीपी पार्टी से निष्कासित कर चुकी है। फयाज अहमद का कार्यकाल भी 15 फरवरी को पूरा हो जाएगा। ऐसे में जम्मू कश्मीर का राज्यसभा में 15 फरवरी के बाद कोई प्रतिनिधि नहीं रह जाएगा।

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