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तस्वीरें: घाटी में कश्मीरी पंडितों ने 14,500 फीट की ऊंचाई पर किया पूर्वजों का तर्पण

Mon, 09 Sep 2019 10:34 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गंगबल (गांदरबल)
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नारनाग मंदिर - फोटो : फाइल, अमर उजाला
  • गांदरबल जिले के नारनाग मंदिर से शुरू हुई 
  • यात्रा हरमुख-गंगबल झील पहुंचकर संपन्न हुई

सारी अनिश्चितताओं और दुश्वारियों को धता बताते हुए कश्मीरी पंडितों ने मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित हरमुख-गंगबल झील में अपने पूर्वजों को तर्पण किया। इसके साथ ही तीन दिन की यह धार्मिक यात्रा पूरी हो गई। 
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गंगाबल झील - फोटो : अमर उजाला
अधिकारियों के अनुसार, तीन दिवसीय गंगबल यात्रा कड़ी सुरक्षा के बीच 5 सितंबर को शुरू हुई और 7 सितंबर को संपन्न हो गई। पूरे भारत से 4 सितंबर को श्रीनगर आने वाले कश्मीरी पंडित तीर्थ यात्री 5 सितंबर को स्थानीय कंगन तहसील के नारनाग मंदिर में एकत्र हुए थे। जहां से वह छड़ी पूजा के बाद यात्रा पर रवाना हो गए थे। 

 
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गंगाबल झील - फोटो : अमर उजाला
भगवान शिव के इस मंदिर का निर्माण कायस्थ राजवंश के राजा ललितादित्य मुक्तापीड़ा ने आठवीं शताब्दी में करवाया था।इस यात्रा का आयोजन हरमुख गंगा (गंगबल) ट्रस्ट (एचजीजीटी) और आल पार्टीज माइग्रेंट्स कोआर्डिनेशन कमेटी (एपीमसीसी) के बैनर तले किया गया था। 

 

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गंगाबल झील - फोटो : अमर उजाला
यात्रियों के दल में शामिल एपीएमसीसी के चेयरमैन विनोद पंडित ने बताया कि छड़ी पूजा के बाद रात्रि विश्राम कर यात्री त्रिखाल बेस की ओर पैदल रवाना हुए। सभी यात्री कड़ी सुरक्षा के बीच 36 किलोमीटर पैदल चलकर पवित्र गंगाबल झील पहुंचे वहां गंगा अष्टमी के शुभ दिन (6 सितंबर) को अपने पूर्वजों का तर्पण किया और जम्मू कश्मीर में शांति की जल्दी वापसी के लिए विशेष प्रार्थना की। ऐसा माना जाता है कि इस झील में भगवान शिव का निवास है। 

 
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गंगाबल झील - फोटो : अमर उजाला
3.5 किमी लंबी है झील 
राजसी हरमुख पर्वत की तलहटी में स्थित गंगाबल झील लगभग 3.5 किमी लंबी,आधा किमी चौड़ी और 80 मीटर गहरी है। मान्यता है कि इस झील में कश्मीरी हिंदू अपने दिवंगत रिश्तेदारों के अवशेषों को विसर्जित करते थे।
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