कश्मीर घाटी में आतंकवाद को फैला रहे पाकिस्तान का नापाक चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है। बन टोल प्लाजा के पास मारे गए जैश-ए-मोहम्मद के चार दहशतगर्दों से बरामद दवाइयां व अन्य सामान पाकिस्तान निर्मित है। उनसे बरामद हथियारों के जखीरे अन्य सामान से उनके फिदायीन होने की पुष्टि हो रही है।
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encounter in nagrota
- फोटो : अमर उजाला
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार जिला विकास परिषद के चुनाव में खलल डालने की मंशा से कश्मीर में उन स्थानों पर फिदायीन हमला करने की साजिश थी जहां पर नामांकन करने वाले प्रत्याशियों को सुरक्षित ठहराया गया है। मारे गए आतंकियों के पास से 11 एके 47 राइफल, तीन पिस्टल, 28 ग्रेनेड, अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर (यूबीजीएल) तथा भारी संख्या में मैगजीन एवं गोलियां बरामद होने से यह पता चलता है कि घाटी में आतंकियों के पास हथियार की कमी है।
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- फोटो : अमर उजाला
यह हथियार कुछ अन्य आतंकियों तक भी पहुंचाए जाने थे। सूत्रों ने बताया कि बरामदगी से यह भी साफ है कि मारे गए आतंकी पाकिस्तानी थे। पाकिस्तान की ओर से हथियारों के जखीरे के साथ आतंकियों को भेजना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी।
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- फोटो : अमर उजाला
डीडीसी चुनाव में किसी प्रकार की अनहोनी टालने के लिए प्रशासन की ओर से नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवारों को घाटी में कुछ होटलों तथा पुलवामा में सरकारी भवन में ठहराया गया है। इस भवन में पहले भी आतंकी हमला कर चुके हैं। जम्मू-श्रीनगर हाईवे से सटे इस भवन पर फिदायीन हमले की साजिश भी हो सकती है ताकि चुनाव में खलल पड़ सके।
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आतंकियों से बरामद किए गए हथियार
- फोटो : एएनआई
चार-पांच दिन से घुसपैठ के लगातार मिल रहे थे इनपुट
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि पिछले चार-पांच दिनों से नए ग्रुप के घुसपैठ करने के टेक्निकल इनपुट मिल रहे थे। इस आधार पर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क थीं। लगातार जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर गुजरने वाले ट्रकों पर विशेष निगाह रखी जा रही थी। इसी आधार पर वीरवार की सुबह घाटी जा रहे आतंकियों को ट्रैक कर लिया गया।
चुनाव के प्रति लोगों के रुझान से बौखलाया पाकिस्तान
डीडीसी चुनाव के लिए नामांकन में भारी संख्या में हिस्सेदारी, बहिष्कार की कॉल न देना, सभी पार्टियों के चुनाव मैदान में उतरने से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। यही वजह है कि वह घाटी में फिर से अशांति का माहौल पैदा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करना चाहता है। अशांति के जरिये लोगों में डर पैदा कर लोगों को चुनाव प्रक्रिया से दूर रखने की भी साजिश है।