फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तस्वीरें: घाटी में अलगाववाद से मोहभंग, आतंकियों का खौफ हवा-हवाई, आतंकवाद ग्रस्तव पाकिस्तान से सटे इलाकों में बंपर वोटिंग

Sun, 29 Nov 2020 08:28 AM IST
शाहरुख खान बृजेश कुमार सिंह, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
1 of 8
मतदान के लिए लाइन में लगे मतदाता - फोटो : बासित जरगर
नए जम्मू-कश्मीर में हो रहे पहले डीडीसी चुनाव के पहले चरण में अवाम ने जम्हूरियत के प्रति विश्वास जताते हुए बंपर मतदान किया। कश्मीर घाटी में न तो आतंकियों का खौफ दिखा और न ही अलगाववादियों के बहिष्कार का अह्वान काम आया। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लोगों की भारी भीड़ दिखी। कश्मीर की जनता  ने घाटी में हिंसा फैलाने में जुटे पाकिस्तान को बैलेट से करारा जवाब दिया। 
 
विज्ञापन

2 of 8
मतदान के लिए लाइन में लगे मतदाता - फोटो : बासित जरगर
ज्ञात हो कि पहले चरण के चुनाव से एक दिन पहले सोशल मीडिया पर गिलानी के नाम का पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें चुनाव के पूर्ण बहिष्कार की अपील की गई थी। पहले चरण में आतंक ग्रस्त  दक्षिणी कश्मीर के चारों जिलों में केवल पुलवामा में लगभग सात प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि अन्य तीन जिलों अनंतनाग, शोपियां व कुलगाम में बेफिक्र होकर लोगों ने लोकतंत्र के पर्व में हिस्सा लिया। 
 
विज्ञापन

3 of 8
मतदान के लिए लाइन में लगे मतदाता - फोटो : बासित जरगर
कुलगाम में 35 प्रतिशत तो अनंतनाग व शोपियां में 43 फीसदी मत पड़े। इसी प्रकार अलगाववादियों के गढ़ श्रीनगर में भी उनके फरमान को ठेंगा दिखाते हुए 34 फीसदी लोग बूथों तक पहुंचे। अलगाववादियों के गढ़ माने जाने वाले अन्य जिले गांदरबल में तो 57 और बडगाम में 48 प्रतिशत मतदान यह दर्शाता है कि अब लोगों का अलगाववाद से मोहभंग हो गया है। 
 

4 of 8
मतदान के लिए लाइन में लगे मतदाता - फोटो : बासित जरगर
वहीं, पाकिस्तान से लगते कुपवाड़ा, बांदीपोरा और बारामुला जिले के लोगों ने भी पड़ोसी मुल्क को बैलेट से करारा जवाब देते हुए यह संदेश दिया है कि यहां के लोगों का देश की जम्हूरियत पर पूरा विश्वास है। इन तीन जिलों में भी 32 से लेकर 50 फीसदी तक वोट पड़े। जम्मू संभाग में पाकिस्तान से लगते राजोरी, पुंछ, सांबा, कठुआ व जम्मू में 61 से 70 प्रतिशत तक लोगों ने मतदान किया। 
 
विज्ञापन

5 of 8
मतदान के लिए लाइन में लगे मतदाता - फोटो : बासित जरगर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बड़ा ही अच्छा संदेश है कि सभी जगह लोगों ने मतदान किया। न तो कहीं हिंसा हुई और न ही बहिष्कार। यह बदलाव अलगाववादियों व आतंकी तंजीमों के लिए साफ संदेश है कि अब उनकी नहीं चलने वाली। साथ ही घाटी में अलगाववाद तथा आतंक  का बीज बोने में जुटे पाकिस्तान के मुंह पर करारा तमाचा है।
विज्ञापन

6 of 8
मतदान करते हुए मतदाता - फोटो : अमर उजाला
लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत
जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. बच्चा बाबू का मानना है कि स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह शुभ संकेत है। पहले चरण के चुनाव में पूरे जम्मू-कश्मीर में 51 फीसदी से अधिक मतदान होना इस बात की ओर इशारा करता है कि लोगों का जम्हूरियत पर अब भी यकीन है। उनका आतंकवाद तथा अलगाववाद से कोई लेना देना नहीं है क्योंकि कहीं भी लोगों ने अलगाववादियों के बहिष्कार की अपील को स्वीकार नहीं किया।
विज्ञापन

7 of 8
मतदान के बाद मतदाता - फोटो : बासित जरगर
युवा मतदाताओं में खासा उत्साह, बोले-अब बहकावे में नहीं आएंगे
त्रिस्तरीय पंचायत के तहत पहले डीडीसी चुनाव को लेकर युवा मतदाताओं में खासा उत्साह दिखा। उनका कहना था कि वे विकास के लिए मतदान करने आए हैं। इससे जमीनी स्तर पर लोकतंत्र मजबूत होगा। निर्णय की प्रक्रिया में ब्लॉक स्तर की भागीदारी सुनिश्चित होगी।
विज्ञापन

8 of 8
मतदान के लिए लाइन में लगे मतदाता - फोटो : बासित जरगर
जिला स्तर पर विकास की योजनाएं बनेंगी। इससे किसी भी जिले को यह शिकायत नहीं रहेगी कि उनके जिले की उपेक्षा की जा रही है। केंद्र सरकार से विकास के लिए मिलने वाला पैसा सीधे जमीनी स्तर तक पहुंचेगा। अब वे किसी बहकावे में नहीं आने वाले हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें