सर्वदलीय समिति के कश्मीर दौरे से ठीक एक दिन पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कश्मीर में पावा शेल यानि की मिर्ची बम के प्रयोग को मंजूरी दे दी है। आइए आपको बताते हैं कि पावा शेल और पेलेट गन में क्या अंतर होता है।
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पावा शेल को सिंथेटिक चिली के जरिए तैयार किया जाता है। इसमें मिर्ची की क्षमता को स्कोविले स्केल पर नापा जाता है मगर पावा इसमें बहुत ऊपर आता है।
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ये वही मिर्ची है जिसका प्रयोग हम रोजाना घरों में करते हैं। इसमें कुछ मात्रा में केमिकल भी मिलाया जाता है।
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पावा शेल के लिए दुनिया की सबसे तीखी माने जाने वाली मिर्ची, भोट-झोलकिया का इस्तेमाल किया जाता है।
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कुछ पावा शेल को स्मोक के साथ छोड़ा जाता है तो कुछ हवा में तेज धमाके के साथ छोड़े जाते हैं।
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जानकारों का मामना है कि धमका भीड़ को डराने के लिए किया जाता है ताकि भीड़ तितर-बितर हो जाए।
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वहीं पेलेट गन पंप करने वाली बंदूक है जिसमें कई तरह के कारतूस इस्तेमाल होते हैं। कारतूस 5 से 12 के रेंज में होते हैं, पांच को सबसे तेज और खतरनाक माना जाता है।
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पेलेट गन से तेज गति से छोटे लोहे के बॉल फायर किए जाते हैं और एक कारतूस में 500 तक ऐसे लोहे के बॉल हो सकते हैं। फायर करने के बाद कारतूस हवा में फूटते हैं और छर्रे एक जगह से चारों दिशाओं में जाते हैं।
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पावा शेल पेलेट गन के मुकाबले कम घातक है। पेलेत गन से शरीर में छर्रे घुस जाते हैं जो कई दफा जानलेवा साबित होते हैं। आंखों में छर्रे लगने पर आंखों की रोशनी जा सकती है।
वहीं पावा शेल से शरीर में जबरदस्त खुजली होने लगती है, आंखों से पानी आने लगता है। इसके साथ इसके शिकार को जोर से खांसी आने लगती है। जहां ये शेल गिरता है लोग वहां से दूर भागने लगते हैं।