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शहीद होने से पहले इस गाने पर जमकर नाचा था जवान, वीडियो देखकर आपकी आंख भी हो जाएगी नम

Mon, 03 Sep 2018 08:15 AM IST
राजेश चन्द्र, अमर उजाला, जम्मू
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शिव कुमार ठाकुर
बांदीपोरा में 31 अगस्त को आतंकियों से लोहा लेते वक्त शहीद हुए कमांडो शिव कुमार पूरे राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन हो गए। लेकिन उनके शहीद होने के तीन दिन बाद उनका वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो को देखकर आपकी आंखें नम हो जाएंगी।

ऊपर वाला साथ तो डरने की क्या बात
एक वीडियो में वह जिस गाने पर डांस कर रहे हैं उसके बोल हैं ऊपर वाला जब अपने साथ तो डरने की क्या बात....। यह उनके हौसले को बयां कर रहा है।

मोबाइल पर वायरल वीडियो में डांस करते दिखे शिवकुमार
दो वीडियो हाल ही में मोबाइल पर वायरल हुए हैं। इन वीडियो में शिवकुमार सिविल ड्रेस में मस्त होकर नाचते दिख रहे हैं। शहादत की खबर के बाद यह 
वीडियो काफी ट्रेंड कर रहे हैं।
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शिव कुमार ठाकुर
सोशल मीडिया पर शहादत के साथ पर्सनालिटी भी छाई 
उनके शहीद होने की खबर से पूरे किश्तवाड़ में शोक की लहर है। उनके शहादत की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सोशल प्लेटफार्म पर उनकी शहादत और पर्सनालिटी की चर्चा छाई हुई है। उनका शारीरिक सौष्ठव किसी फिल्मी हीरो जैसा ही था। उनके साथी बताते हैं कि वह स्कूल के समय से ही काफी जिंदादिल इंसान था। हमेशा खुश मिजाज रहने वाला उनका दोस्त अब सबको छोड़ कर चला गया।  
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शिव कुमार ठाकुर
सिक्स पैक वाली यह तस्वीर किसी बॉलीवुड स्टार की नहीं बल्कि भारतीय सेना के कमांडो शहीद शिवकुमार ठाकुर की है जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी। वह शनिवार को उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में आतंकवादियों के खिलाफ एक ऑपरेशन में शहीद हुए थे। रविवार को उनका पार्थिव शरीर जब पैतृक गांव करूड़ इखाला पलमाड़ पहुंचा तो हर ग्रामीण की आंख नम थी सीना गर्व से तना हुआ। चारों ओर उनकी शहादत के साथ चर्चा थी तो उनकी जिंदादिली और पर्सनालिटी की। उनका अंतिम संस्कार सैनिक सम्मान के साथ गांव में ही किया गया। 


 

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शहीद शिव कुमार ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
पत्नी हुई बेहोश, मां के क्रंदन से आंखे भर आईं
शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके घर पहुंचा। पत्नी पपी देवी बेहोश हो गई। मां अपने लाल को एक झलक देखना चाहती थी और देखते ही उसके सब्र का बांध टूट गया। उनका क्रंदन सुनकर सबकी आंख भर आई।  पिता सोमनाथ तो मानो पत्थर हो गए थे। अन्य परिवार वालों का रो-रो कर बुरा हाल था।
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शाहेद्द शिव कुमार ठाकुर का शव पहुंचा घर
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
रविवार को पार्थिव शरीर रविवार को कश्मीर से हेलीकाप्टर से भंडारकूट पहुंचाया गया। जहां पर 9 सेक्टर के कमांडर रोहन आनंद व सेना के अन्य अधिकारियों ने उनके पार्थिव शरीर को हेलीकाप्टर से उतारा और अपने वाहन से गांव पहुंचाया। जहां पर हजारों लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए मौजूद इंतजार कर रहे थे। पार्थिव शरीर के पहुंचते ही लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। चारों ओर भारत माता की जय व शिव कुमार अमर रहे के नारे गू्ंज रहे थे। सेना के जवानों के साथ हर ग्रामीण उनके ताबूत को कंधा देना चाह रहा था। 
 
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शहीद शिव कुमार ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
कांपते हाथों से पिता ने दी मुखाग्नि
कमांडो शिव कुमार के पतृक गांव में उनकी अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ा था। हर किसी की आंख नम थी। पहाड़ पर स्थित गांव में भारत माता की जय व शिव कुमार अमर रहे के नारे लग रहे थे। उनके पिता सोमनाथ ने कांपते हाथों से उस जवान बेटे को मुखाग्नि दी जो बुढ़ापे में उनके लिए सहारा था। इससे पहले बड़ी संख्या में सेना के अधिकारी व जिले के लोगों ने उसे अश्रुपूर्ण विदाई दी।
 
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शहीद शिव कुमार ठाकुर का बेटा और बेटियां उनके शव के पास जाकर उन्हें उठाने कि कोशिश करते हुए - फोटो : अमर उजाला
दो बेटियां व एक बेटा 
शहीद शिवकुमार के परिवार में माता-पिता, एक छोटा भाई, बड़ी बहन (विवाहित),  पत्नी व दो बेटियों व एक बेटा हैं। शहीद की दो बेटियां राधिका (9), प्रिया व एक पुत्र गोलू किश्तवाड़ के एक निजी स्कूल में पढ़ रहे हैं। 

बच्चों को लगा गहरी नींद में सोए हैं पापा 
बच्चों के साथ रह रही पपी देवी को शनिवार को सूचना दी गई कि कमांडो शिवकुमार घायल हैं। इन सभी को गांव करूड़ पहुंचाया गया। बाद में उन्हें पता चल गया कि शिवकुमार शहीद हो चुके हैं। बच्चों को विश्वास ही नहीं हो पा रहा था कि उनके पिता शहीद हुआ है। उन्हें लगा जैसे पापा गहरी नींद में सोए हुए हैं। बच्चे पापा के पार्थिव शरीर को देखकर समझ नहीं पा रहे थे कि वास्तव में हुआ क्या है? उनके पापा बोल क्यों नहीं रहे हैं? बच्चे उनकी ओर टकटकी लगाए थे इस उम्मीद में कि पापा कभी भी उठेंगे और उन्हें गले लगा लेंगे।

 

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शहीद शिव कुमार ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
किसान हैं शहीद के पिता
शहीद शिवकुमार के पिता सोमनाथ पेशे से किसान हैं। शिव कुमार उनके बुढ़ापे का सहारा था। उनका दूसरा बेटा एक निजी कंपनी में काम करता है। 

ब्रिगेड में भी चर्चा
32 वर्षीय शहीद शिव कुमार 15 जैकलाई में थे। जो 31 राष्ट्रीय रायफल (सीडीओ) कश्मीर में तैनात था। उनके काम काज की पूरी ब्रिगेड में काफी सराहना होती थी। विशेष रूप से कद काठी के कारण । 
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शहीद शिव कुमार ठाकुर - फोटो : अमर उजाला
शहीद को दूल्हे की तरह तैयार किया गया था
शहीद शिव कुमार को अंतिम यात्रा पर ले जाने से पहले स्थानीय परंपरा के अनुसार रिश्तेदारों ने दूल्हे की तरह तैयार किया था। उनके सिर पर पड़ी सजाई गई थी। उनकी पार्थिव शरीर पर चुन्नी डाली गई थी। 
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