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श्रमिकों की करुण कथा: फिर घर की ओर चल पड़े मजदूर, रोजगार पर बने असमंजस से पलायन को मजबूर

Sat, 01 May 2021 05:58 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : संजय गुप्ता
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के कारण बने हालात का असर श्रमिकों पर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। रोजगार को लेकर असमंजस और लॉकडाउन के डर ने न सिर्फ प्रदेश में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों, बल्कि विभिन्न राज्यों में काम करने वाले प्रदेश के श्रमिक को घर वापस लौटने पर मजबूर कर दिया है। पिछले लॉकडाउन की कड़वी यादें दोबारा न आएं, इसके लिए श्रमिक समय रहते पलायन कर रहे हैं। 
 
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : संजय गुप्ता
सरकार ने पिछले वर्ष लॉकडाउन के दौरान वापस लौटे प्रदेश के श्रमिकों को  रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उनका स्किल सर्वे और पंजीकरण शुरू किया था। इसका उद्देश्य था कि श्रमिकों को उनकी क्षमता के अनुरूप काम मिल सके, लेकिन एक साल बाद भी इन श्रमिकों को प्रदेश में रोजगार नहीं मिल पाया।
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
विभाग की इन श्रमिकों को उनके संबंधित जिलों में उनके स्किल के आधार पर रोजगार देने की कवायद थी, लेकिन विभाग के पास ये आंकडा ही नहीं है कि कितने श्रमिकों को रोजगार मिला है।

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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार योजना (मनरेगा) सहित अन्य निर्माण कार्यों में इन श्रमिकों का रोजगार देने की कवायद सिर्फ सरकारी कागजों तक रह गई। श्रमिकों को अपने गांव और जिले में काम नहीं मिला और मजबूर उन्हें बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ा।
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जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
रोजगार मुहैया कराने के सरकारी दावों के उलट प्रवासी मजदूर योजनाओं के हकीकत में तब्दील होने को लेकर असमंजस में हैं।
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