कोरोना से संक्रमित लोगों की देखभाल में दिन रात एक कर काम कर रहे कोरोना वॉरियर्स में फिजियोथेरेपिस्ट तजामुल हुसैन गिरि भी शामिल हैं। पिछले साल 18 जून को वह अपनी बहन की शादी में भी शामिल नहीं हो पाए थे। इसका कारण था कि वह जिला अस्पताल रामबन में कोरोना संक्रमितों की जांच कर अपना कर्तव्य निभा रहे थे। उन्होंने कहा कि वह अपनी बहन की शादी में अपने पैतृक गांव क्रावा नहीं पहुंच पाए। फिर भी उन्हें कोई गंभीर चिंता नहीं थी, क्योंकि वह खिदमत-ए-खल्क (मानव जाति की सेवा) में दृढ़ता से विश्वास करते हैं।
तजामुल ने कहा कि उनके लिए समाज के प्रति कर्तव्य सर्वोपरि है, और राष्ट्रीय संकट में पूरे मन से काम करना उनका नैतिक कर्तव्य है। हालांकि, पिछले साल रोस्टर के अनुसार, वह केवल वैकल्पिक सप्ताहों में काम करता थे। लेकिन, इस साल उन्हें रविवार और छुट्टियों में भी रोजाना सुबह नौ से देर शाम छह या सात बजे तक काम करना पड़ता है। सरकार ने मौजूदा महामारी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के सभी कर्मचारियों के अवकाश भी रद्द कर दिए हैं।