किश्तवाड़ में बादल फटने से भारी तबाही
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20 साल में बदल गई बसावट
लंबे समय से किश्तवाड़ क्षेत्र में शोध कर रहे जम्मू विश्वविद्यालय के डॉ. युद्धबीर भी यही मानते हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2004 से लेकर अब तक करीब 20 साल के अरसे में किश्तवाड़ का पूरी बसावट बदल गई है। पर्यटकों के बढ़ने से होटल, रेस्टरूम वगैरह बन गए हैं। इनमें बहुत से अनियोजित हैं। विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति की जरूरत को नजरअंदाज कर दिया गया है। हर तरफ बेतरतीब निर्माण हो रहा है, जो जलवायु में बदलाव का सबसे बड़ा कारण है। बेशक यात्रा जरूरी है, लेकिन प्रकृति को नष्ट करके ऐसा किया जाना ठीक नहीं।