भारत-पाक जीरो लाइन से। पिछले लंबे समय से भारत-पाक अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर हो रही गोलाबारी की कड़वाहट अभी भी दोनों देशों के सुरक्षा बलों में भरी पड़ी है। वीरवार की सुबह पाकिस्तानी ब्रिगेडियर वसीम जफर भट्टी जीरो लाइन पर पहुंचे और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के डीआईजी बीएस कसाना से गले मिलने की रस्म भी अदा की, लेकिन उनके हावभाव से ऐसा नहीं लगा कि उनके बीच की कड़वाहट में किसी तरह की कमी आई हो। न ही उनमें कोई गर्मजोशी दिखी। (स्टोरी- भूपेंदर सिंह भाटिया, फोटो - निखिल मेहता)
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PICS: तनाव के साये में पाक से भारत पहुंची ‘अमन की चादर’
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मौका था अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे बाबा चमलियाल मेले का, जिसमें शिरकत करने के लिए पाक रेंजरों के अलावा सीमा से सटे जिला सियालकोट के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी पहुंचे थे।
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लौटने के क्रम में ब्रिगेडियर भट्टी ने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की, लेकिन उन्होंने बीएसएफ डीआईजी से हाथ मिलाते हुए फोटो खिंचवाने की हामी जरूर भर दी। जब उन्हें फोटो सेशन के लिए आपस में गले मिलने को कहा गया तो ब्रिगेडियर भट्टी ने दबी आवाज में कहा, ‘ऐसे तो हम मिलते रहते हैं।’
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इसके बाद वह बिना कोई सवाल सुने अपने क्षेत्र में चले गए। जीरो लाइन पर लगभग एक घंटे तक दोनों अफसर गुफ्तगू करते रहे। डीआईजी बीएसएफ ने कार्यक्रम के बाद बताया कि पाक अफसर के साथ सिर्फ बाबा चमलियाल पर ही बातचीत हुई।
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हालांकि इन सबके बीच तनाव के साये में सीमा पार से ‘अमन की चादर’ पहुंची। काले रंग की चादर पर सुनहरी जरी आकर्षण का केंद्र थी। परंपरा के अनुसार पाक अफसर ने बीएसएफ डीआईजी को चादर प्रदान की।
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दोनों ओर से मिठाइयों और तोहफों का आदान-प्रदान हुआ, लेकिन यह सिर्फ एक परंपरा का निर्वाह नजर आया। सुबह से ही जीरो लाइन पर दोनों ओर के सीमा प्रहरियों ने मोर्चा संभाल लिया था। श्मशान सी खामोशी के बीच दोनों ओर के प्रहरी ऐसे खड़े थे, जैसे उन्हें बातचीत के लिए भी मना किया गया हो।
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दोनों ओर के लोगों को सीमा से काफी दूर रोक दिया गया था। हालांकि हर साल पाकिस्तान की ओर से लोग सीमा से कुछ दूरी तक पहुंच बाबा चमलियाल की मजार के दूर से दर्शन करते थे, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। किसी को जीरो लाइन से काफी दूरी तक भी आने नहीं दिया गया।
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पाक रेंजरों के तेवर से ऐसा महसूस नहीं हुआ कि दोनों ओर के अफसर अमन के लिए मिलने जा रहे हैं। पाकिस्तान की ओर से चंद मीडिया कर्मी भी पहुंचे थे, लेकिन उनके और भारतीय मीडिया के बीच पाक रेंजर दीवार बने रहे।
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हालांकि उन्होंने कंटीली तारों के आरपार चंद बातें कीं, लेकिन पाकिस्तानी रेंजर अपने पत्रकारों को बातचीत से रोकते रहे।