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अयोध्या आंदोलन में जम्मू-कश्मीर की भी रही थी धमक, बड़ी संख्या में महिला कारसेवक थीं शामिल

Sun, 10 Nov 2019 12:52 AM IST
Pranjal Dixit बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
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- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
जम्मू-कश्मीर में भी अयोध्या आंदोलन को लेकर जबर्दस्त उत्साह था। जनजागरण अभियान से लेकर कारसेवा तक में यहां से बढ़ चढ़कर भागीदारी हुई थी। यहां से लगभग डेढ़ हजार कारसेवकों का जत्था अयोध्या के लिए गया था। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। 

 
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प्रो. चमन लाल गुप्ता के नेतृत्व में गए जत्थे में 25-30 लोगों के कई सब ग्रुप बनाए गए थे, जिसके एक-एक इंचार्ज नियुक्त किए गए थे। इस जत्थे के ज्यादातर सदस्यों को बरेली पहुंचते ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। बाद में पांच ग्रुप बचते-बचाते आगे बढ़ पाए थे। 

 
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इनमें से भी चार को अयोध्या पहुंचने से पहले गिरफ्तार कर लिया गया था। उस समय के आंदोलन को याद कर उसमें शामिल लोग अब भी रोमांचित हो उठते हैं। उनका कहना है कि सभी के मन रामलला की सेवा को लेकर काफी उत्साहित थे। यही वजह है कि बिना किसी भय के वे कार सेवा में शामिल होने के लिए पहुंच गए।

 

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पैदल चलकर 13 दिन में पहुंचे थे अयोध्या
राजोरी के नरेश शर्मा कार सेवकों के जत्थे में शामिल थे। उनका कहना है कि उनके ग्रुप में 12 लोग थे। किसी तरह से वे छिपते छिपाते मुगलसराय पहुंच गए। गाड़ियों में जबर्दस्त चेकिंग चल रही थी। सो मुगलसराय से पैदल ही अयोध्या के लिए चल दिए। 13 दिन तक पैदल चलकर अयोध्या पहुंचे और कार सेवा का हिस्सा बने। फैसले का स्वागत करते हुए कहते हैं कि उस समय की कार सेवकों की निष्ठा रंग लाई है। 

 
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फैजाबाद में हो गए थे गिरफ्तार
आरएसएस के नगर कार्यवाह रहे राजोरी के विनोद गुप्ता जम्मू-कश्मीर से गए कारसेवकों के जत्थे में शामिल थे। उनका कहना है कि बरेली में अन्य कारसेवकों को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन पुलिस की मदद से ही वे और उनके ग्रुप के 24 लोग काशी पहुंचे। यहां से पैदल अयोध्या के लिए कूच किया, लेकिन फैजाबाद पहुंचते ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। 

 
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महिला कारसेवकों को अयोध्या सीमा से बाहर छोड़ा
महिला कारसेवकों के जत्थे में राजोरी की राजरानी, रीता बाली समेत आठ महिलाएं थीं। राजरानी तब 31 साल की थीं। वह कहती हैं कि उस दौरान पूरा वातावरण राममय था। वह अन्य महिलाओं के साथ किसी प्रकार अयोध्या तक पहुंच गईं, लेकिन वहां पहुंचते ही पुलिस ने रोक लिया। उन्हें अन्य महिलाओं के साथ गाड़ी में बिठाकर अयोध्या की सीमा से बाहर छोड़ दिया गया। फैसला आने के वक्त वह वृंदावन में दर्शन पूजन के सिलसिले में गई थीं। फोन पर बताया कि यहां खूब जश्न मन रहा है। लोग नाच गा रहे हैं।
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