अनुच्छेद 370 व 35-ए हटने के एक साल के भीतर ही जम्मू-कश्मीर का चेहरा बदला नजर आ रहा है। अलगाववाद की हवा निकल गई है। अब न बंद, न ही हड़ताल का कैलेंडर जारी हो रहा है और न ही पत्थरबाजी। एक साल में कभी भी अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक समेत किसी का बयान सार्वजनिक नहीं हुआ है। तमाम अलगाववादी नेता अपनी जमीन खिसकती देख चेहरा छिपाए फिर रहे हैं। यही नहीं, अपना कुनबा बढ़ाने के बजाय वे परिवार वालों से ही किनारा करने लगे हैं। कुछ आतंकी घटनाओं को छोड़कर घाटी अमन-शांति के रास्ते पर लौटने को अग्रसर है।