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एक साल में बदल गया कश्मीर का चेहरा, अलगाववाद की निकली हवा, गायब हो गए पत्थरबाज

Tue, 04 Aug 2020 09:36 AM IST
प्रशांत कुमार बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : अमर उजाला
अनुच्छेद 370 व 35-ए हटने के एक साल के भीतर ही जम्मू-कश्मीर का चेहरा बदला नजर आ रहा है। अलगाववाद की हवा निकल गई है। अब न बंद, न ही हड़ताल का कैलेंडर जारी हो रहा है और न ही पत्थरबाजी। एक साल में कभी भी अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी और मीरवाइज उमर फारूक समेत किसी का बयान सार्वजनिक नहीं हुआ है। तमाम अलगाववादी नेता अपनी जमीन खिसकती देख चेहरा छिपाए फिर रहे हैं। यही नहीं, अपना कुनबा बढ़ाने के बजाय वे परिवार वालों से ही किनारा करने लगे हैं। कुछ आतंकी घटनाओं को छोड़कर घाटी अमन-शांति के रास्ते पर लौटने को अग्रसर है।
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : अमर उजाला
यूं तो अलगाववादियों पर शिकंजा 2018 से ही कसना शुरू हो गया था, जब टेरर फंडिंग मामले में प्रमुख अलगाववादियों को एनआईए ने तिहाड़ जेल पहुंचा दिया। मीरवाइज उमर फारूक से भी पूछताछ हुई। इसके बाद इनकी गतिविधियां थोड़ी सिमटीं लेकिन हड़ताल या बंद की कॉल चलती रही। 370 हटने के बाद मीरवाइज समेत कई अलगाववादियों को हिरासत में ले लिया गया। कुछ महीने तक कड़ा पहरा रहा।
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सैयद अली शाह गिलानी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
इस बीच, श्रीनगर के डाउनटाउन में कुछ स्थानों पर पोस्टर चस्पा कर अनुच्छेद 370 का विरोध करने की अवाम से अपील की गई लेकिन कोई आगे नहीं आया। इससे अलगाववादियों को अपनी जमीन खिसकने का अहसास हो गया। जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठन पर पहले ही पाबंदी लगा दी गई थी। उसके सभी कार्यालय सील कर प्रमुख कार्यकर्ताओं को उठा लिया गया था। शिक्षण संस्थान की आड़ में इस संगठन के जरिए कट्टरपंथ और अलगाववाद का पाठ पढ़ाया जाता था। अलगाववाद को दफन होते देख पाक परस्त कट्टर अलगाववादी सैयद अली शाह गिलानी ने आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस से 29 जून को नाता तोड़ लिया। पिछले ही महीने तहरीक-ए-हुर्रियत प्रमुख अशरफ सेहरई को पीएसए में गिरफ्तार कर लिया गया।

 

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लाल चौक - फोटो : अमर उजाला
370 हटने का एक बड़ा बदलाव घाटी में पत्थरबाजी की घटनाओं में आया। पहले हर जुमे को श्रीनगर समेत लगभग पूरी घाटी में पत्थरबाजी की घटनाएं होती थीं। इसमें सुरक्षाबलों को भीड़ को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने के साथ पैलेट गन तक का इस्तेमाल करना पड़ता था। जुमे की नमाज के दिन तो दोपहर बाद श्रीनगर के जामिया मस्जिद और लाल चौक वाले इलाके से लोग पहले से ही रास्ता बदल देते थे। कारोबारी दुकानें बंद कर देते, लेकिन पिछले एक साल में किसी भी जुमे के दिन छिटपुट घटनाओं को छोड़कर पत्थरबाजी की एक भी घटना नहीं हुई।
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पत्थरबाजी - फोटो : अमर उजाला, फाइल
घाटी में कानून-व्यवस्था की बागडोर संभाल रहे सीआरपीएफ के एक अधिकारी ने बताया कि 370 हटने के बाद सुरक्षाबलों को काफी राहत मिली है। पत्थरबाजों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले पर होने वाले खर्च में भी कमी आई है। पत्थरबाजी से अब छात्र-छात्राओं ने भी किनारा कर लिया है। घाटी में कई महीने तो स्कूल-कॉलेज 370 हटने के बाद नहीं खुले लेकिन अक्तूबर के बाद कई स्कूल-कॉलेज खुल गए। कहीं से पत्थरबाजी की कोई घटना सामने नहीं आई। प्रताप कॉलेज में पढ़ने वाले फिरोज खान और महिला कॉलेज की रजिया ने बताया कि करियर महत्वपूर्ण है। अब इसी पर फोकस करना है। दोनों पत्थरबाजी की सच्चाई जान चुके हैं।
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