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घाटी में आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देने के साथ महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रही है सेना

Wed, 24 Mar 2021 02:06 PM IST
करिश्मा चिब अमृतपाल सिंह बाली, जम्मू-कश्मीर
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आर्मी द्वारा घाटी में महिलाओं को दी जा रही ट्रैनिंग - फोटो : अमर उजाला
कश्मीर घाटी में आतंकवाद के खिलाफ लड़ रही सेना महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए भी अग्रसर है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं भी चला रही हैं। इनमें मिसाल बनकर सामने आया है सेना की चिनार कोर के तहत काम करने वाली किलो फोर्स द्वारा शरीफाबाद इलाके में स्थापित किया गया ‘वुमेन एम्पावरमेंट सेंटर’ (डब्ल्यूईसी)। इसमें महिलाओं को कश्मीरी पारंपरिक सिलाई-कढ़ाई (आरी वर्क) का प्रशिक्षण दिया जाता है। 2013 में स्थापित किए इस सेंटर से करीब 1300 महिलाएं प्रशिक्षण लेकर अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं और दूसरों को भी प्रशिक्षण दे रही हैं। 
 
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आर्मी द्वारा घाटी में महिलाओं को दी जा रही ट्रैनिंग - फोटो : अमर उजाला
सेंटर की इंचार्ज के अनुसार इस सेंटर में करीब 4-6 महीने की ट्रेनिंग दी जाती है और उसका खर्च सेना उठाती है। यहां महिलाओं को शॉल, सूट, फिरन आदि बनाना सिखाया जाता है। उनके बनाए सामान को बेचने में मदद भी सेना करती है। आगे भी ऐसे सेंटर स्थापित करने की कोशिश है, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को लाभ मिले।
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आर्मी द्वारा घाटी में महिलाओं को दी जा रही ट्रैनिंग - फोटो : अमर उजाला
हांजिक गांव की तस्लीमा ने बताया कि सेंटर में उन्होंने बहुत कुछ सीखा है। इसमें कैश्मिलॉन शाल, स्टोल, सेमी-पश्मीना, नीडल वर्क आदि शामिल हैं। महीने का करीब 10 से 12 हजार तक कमा लेते हैं। हसीना ने कहा कि वह पिछले 8 वर्षों से यहां काम कर रही हैं। उन्होंने शुरू में यहां से आरी वर्क सीखा और अब यहां पर ही काम कर रही हैं।

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पश्मीना का बाजार - फोटो : Demo Pic.
शफीका ने बताया कि वह भी पिछले 7 वर्षों से अधिक समय से यहां पर है। अब वह जो भी बनाती हैं, वह आगे बाजार में बिकता है। इसी से घर का गुजारा होता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
महिलाओं ने कहा कि सेना उन्हें कच्चा माल उपलब्ध कराने से लेकर हर एक सुविधा दे रही है। यहां तक कि उनके द्वारा बनाए गए माल को भी बेचने में मदद करती है। इसके बदले जो पैसा आता है, वह इन महिलाओं को दिया जाता है।   

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