कोरोना काल के एक साल में आम जनमानस का मन-मस्तिष्क भी प्रभावित हुआ है। संक्रमण और पाबंदियों से लोगों की दिनचर्या बुरी तरह से प्रभावित हुई, जिससे तनाव, चिंता और अवसाद की शिकायतें बढ़ गईं। दोबारा इस संक्रमण के बढ़ने से लोग पोस्ट डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। इसमें बच्चे भी पीड़ित हुए हैं। खासतौर पर ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर उनका संतुलन बिगड़ा है। मनोचिकित्सकों के अनुसार कई बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई समझ नहीं आई और उन्हें लग रहा है कि वे दूसरों से पीछे रह गए हैं। इसी तरह सामाजिक स्तर पर निकट रिश्तों के साथ संवाद कम हुआ है। इससे सामाजिक समर्थन खत्म हुआ है। बुुजुर्ग वर्ग को लग रहा है कि वह कोरोना से पीड़ित होने की श्रेणी में सबसे ऊपर हैं। मधुमेह, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग आदि से पीड़ित लोगों में अधिक घबराहट है।