भगवान शंकर जब पार्वती को अमर कथा सुनाने ले जा रहे थे, तो उन्होंने सर्वप्रथम बैल को छोड़ा वह स्थान बैलगाम था, जो बाद में 'पहलगाम' बन गया, छोटे–छोटे अनंत नागों को 'अनंतनाग' में छोड़ा, माथे के चंदन को चंदनबाड़ी में उतारा, गंगाजी को पंचतरणी का नाम मिला, अन्य पिस्सुओं को 'पिस्सू टॉप' पर और गले के शेषनाग को शेषनाग नामक स्थल पर छोड़ा था। ये तमाम स्थल अब भी अमरनाथ यात्रा में आते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि अमरनाथ गुफा एक नहीं है। अमरावती नदी के पथ पर आगे बढ़ते समय और भी कई छोटी-बड़ी गुफाएं दिखती हैं। वे सभी बर्फ़ से ढकी हैं।
सभी फोटो - सोशल मीडिया
विज्ञापन
इन 5 जगहों पर जाए बिना अधूरी रहेगी आपकी अमरनाथ यात्रा
2 of 8
पहलगाम
अमरनाथ की गुफा तक पहुंचने के लिए यात्री जम्मू से पहलगाम/पहलगांव जाते हैं। यह दूरी सडक मार्ग से पहलगाम-जम्मू से 365 किलोमीटर की दूरी पर है। यह विख्यात पर्यटन स्थल भी है और यह पर्वतों से घिरा क्षेत्र है और सुंदर प्राकृतिक दृश्यों के लिए विश्वप्रसिद्ध है। यह लिद्दर नदी के किनारे बसा है। पहलगाम तक जाने के लिए जम्मू–कश्मीर पर्यटन केंद्र से सरकारी बस उपलब्ध रहती है। यदि आप श्रीनगर के हवाई अड्डे पर उतरते हैं, तो लगभग 96 कि.मी. की सडक-यात्रा कर पहलगाम पहुंच सकते हैं। पहलगाम में ठहरने के लिए सामाजिक-धार्मिक संगठनों की ओर से आवासीय व्यवस्था है। पहलगाम और गैर सरकारी संस्थाओं की ओर से लंगर की व्यवस्था की जाती है। पहलगाम से एक कि.मी. नीचे ही ‘नुनवन’ में यात्री बेस कैम्प पर पहला पड़ाव होता है। तीर्थयात्रियों की पैदल यात्रा यहीं से आरंभ होती है।
विज्ञापन
इन 5 जगहों पर जाए बिना अधूरी रहेगी आपकी अमरनाथ यात्रा
3 of 8
चंदनबाड़ी
पहलगाम के बाद पहला पड़ाव चंदनबाड़ी है, जो पहलगाम से 16 किलोमीटर की दूरी पर है। यह स्थान समुद्रतल से 9500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पहली रात तीर्थयात्री यहीं बिताते हैं। यहां रात्रि निवास के लिए कैंप लगाए जाते हैं। इसके ठीक दूसरे दिन पिस्सु घाटी की चढ़ाई शुरू होती है। लिद्दर नदी के किनारे से इस पड़ाव की यात्रा आसान होती है। यह रास्ता वाहनों द्वारा भी पूरा किया जा सकता है। यहां से आगे जाने के लिए घोड़ों, पालकियों अथवा पिट्ठुओं की सुविधा मिल जाती है। चंदनबाड़ी से पिस्सुटॉप जाते हुए रास्ते में बर्फ़ का पुल आता है। यह घाटी सर्पाकार है।
इन 5 जगहों पर जाए बिना अधूरी रहेगी आपकी अमरनाथ यात्रा
4 of 8
पिस्सू टाप
चंदनवाड़ी से 3 किमी चढाई करने के बाद आपको रास्ते में पिस्सू टाप पहाडी मिलेगी। जनश्रुतियां हैं कि पिस्सु घाटी पर देवताओं और राक्षसों के बीच घमासान लड़ाई हुई, जिसमें देवताओं ने कई दानवों को मार गिराया था। दानवों के कंकाल एक ही स्थान पर एकत्रित होने के कारण यह पहाडी बन गई। अमरनाथ यात्रा में पिस्सु घाटी काफ़ी जोखिम भरा स्थल है। पिस्सु घाटी समुद्रतल से 11,120 फुट की ऊंचाई पर है। लिद्दर नदी के किनारे-किनारे पहले चरण की यह यात्रा ज़्यादा कठिन नहीं है। पिस्सू घाटी की सीधी चढ़ाई चढते हैं जो शेषनाग नदी के किनारे चलती है। 12 कि. मी. का लम्बा नदी का किनारा शेषनाग झील पर जाकर समाप्त होता है। यही तो नदी का उदगम स्थल है।
विज्ञापन
इन 5 जगहों पर जाए बिना अधूरी रहेगी आपकी अमरनाथ यात्रा
5 of 8
शेषनाग
पिस्सू टाप से 12 कि.मी. दूर 11,730 फीट की ऊंचाई पर शेषनाग पर्वत है, जिसके सातों शिखर शेषनाग के समान लगते हैं। यह मार्ग खड़ी चढ़ाई वाला और खतरनाक है। यहां तक की यात्रा तय करने में 4-5 घंटे लगते हैं। यहीं पर पिस्सु घाटी के दर्शन होते हैं। यात्री शेषनाग पहुंच कर तंबू/कैंप लगाकर अपना दूसरा पडाव डालते हैं। यहां पर्वतमालाओं के बीच नीले पानी की ख़ूबसूरत झील है। जिसे शेषनाग झील कहते हैं। इस झील में झांक कर यह भ्रम हो उठता है कि कहीं आसमान तो इस झील में नहीं उतर आया। यह झील क़रीब डेढ़ किलोमीटर लंबाई में फैली है। किंवदंतियों के मुताबिक शेषनाग झील में शेषनाग का वास है और चौबीस घंटों के अंदर शेषनाग एक बार झील के बाहर दर्शन देते हैं, लेकिन यह दर्शन खुशनसीबों को ही नसीब होते हैं। तीर्थयात्री यहां रात्रि विश्राम करते है और यहीं से तीसरे दिन की यात्रा शुरू करते हैं। शेषनाग और इससे आगे की यात्रा बहुत कठिन है। यहां बर्फीली हवाएं चलती रहती हैं। शेषनाग से पोषपत्री तथा फिर पंचतरणी की दूरी छह किलोमीटर है। पोषपत्री नामक यह स्थान 12500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पोषपत्री में विशाल भंडारे का आयोजन होता है। यहां भोजन, आवास, चिकित्सा सुविधा, ऑक्सीजन सलैंडर आदि की सुविधा उपलब्ध रहती है।
विज्ञापन
इन 5 जगहों पर जाए बिना अधूरी रहेगी आपकी अमरनाथ यात्रा
6 of 8
पंचतरणी
शेषनाग से पंचतरणी आठ मील के फासले पर है। मार्ग में बैववैल टॉप और महागुणास दर्रे को पार करना पड़ता है, जिनकी समुद्र तल से ऊंचाई क्रमश: 13,500 फुट व 14,500 फुट है। इस स्थान पर अनेक झरनें, जल प्रपात और चश्में और मनोरम प्राकृतिक दृश्य दिखाई देते हैं। महागुणास चोटी से नीचे उतरते हुए 9.4 कि.मी. की दूरी तय करके पंचतरिणी पहुंचा जा सकता है। यहां पांच छोटी–छोटी सरिताएं बहने के कारण ही इस स्थल का नाम पंचतरणी पड़ा है। पंचतरणी 12,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यह भैरव पर्वत की तलहटी में बसा है। यह स्थान चारों तरफ से पहाड़ों की ऊंची–ऊंची चोटियों से ढका है। ऊंचाई की वजह से ठंड भी ज़्यादा होती है।आक्सीजन की कमी की वजह से तीर्थयात्रियों को यहां सुरक्षा के इंतज़ाम करने पड़ते हैं। आगे की यात्रा में भैरव पर्वत मिलता है। इसकी तलहटी में पंचतरिणी नदी है, जहां से पांच धाराएं निकलती हैं। मान्यता है कि पांचों धाराओं की उत्पत्ति शिवजी की जटाओं से हुई है। श्री अमरनाथ के दर्शन से पूर्व का यह तीसरा और अंतिम पडाव है।
विज्ञापन
इन 5 जगहों पर जाए बिना अधूरी रहेगी आपकी अमरनाथ यात्रा
7 of 8
संगम
पंचतरिणी से 3 कि.मी. चलने पर 'अमरगंगा' और 'पंचतरिणी' का संगम स्थल मिलता है। यहां से श्री अमरनाथ की पवित्र गुफा लगभग 3 कि.मी. दूर है और रास्ते में बर्फ़ ही बर्फ़ जमी रहती है। अमरगंगा एक बर्फ़ की पतली सी धारा है, इसी में स्नान करके भक्त जन हाथ में नारियल आदि का चढावा ले श्री अमरनाथ जी के दर्शन करते हैं । इसमें पहले 3 कि.मी. के रास्ते को ‘संत सिंग की पौड़ी’ कहते हैं। यह ऐसी पगडंडी नुमा रास्ता है, जिसके एक ओर पहाड़ व दूसरी ओर गहरी खाई है। यह रास्ता भी काफ़ी जोखिम भरा है। हिम नदी को पार करते ही मुख्य गुफा के दर्शन होते हैं। इसी दिन गुफा के नजदीक पहुंच कर पड़ाव डाल रात बिता सकते हैं और दूसरे दिन सुबह पूजा अर्चना कर पंचतरणी लौटा जा सकता है। कुछ यात्री शाम तक शेषनाग तक वापस पहुंच जाते हैं। यह रास्ता काफ़ी कठिन है, लेकिन अमरनाथ की पवित्र गुफा में पहुंचते की सफर की सारी थकान पल भर में छू-मंतर हो जाती है और अद्भुत आत्मिक आनंद की अनुभूति होती है।
इन 5 जगहों पर जाए बिना अधूरी रहेगी आपकी अमरनाथ यात्रा
8 of 8
पवित्र गुफा
समुद्र तल से लगभग 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस गुफा में प्रवेश करने पर हम हिम/बर्फ़ से बने शिवलिंग का दर्शन करते हैं। इसके अलावा, हमें बर्फ़ की बनी दो और आकृति दिखाई देती है, जिन्हें पार्वती और गणपति का स्वरूप माना जाता है। गुफा में बूंद-बूंद करके जल टपकता रहता है। ऐसी मान्यता है कि गुफा के ऊपर पर्वत पर श्री राम कुंड है। इसी का जल गुफा में टपकता रहता है। कुछ विद्वान गुफा में पार्वती की मूर्ति को साक्षात जगदम्बा का स्वरूप मानते हैं और इस स्थान को शक्तिपीठ के रूप में मान्यता देते हैं। पवित्र गुफा में वन्य कबूतर भी दिखाई देते हैं, जिनकी संख्या समय-समय पर बदलती रहती है। सफ़ेद कबूतर के जोडे को देखकर तीर्थयात्री अमरनाथ की कथा को याद कर रोमांचित हो उठते हैं।