जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में शनिवार रात हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी। मारे गए दोनों आतंकियों की पुलिस ने अधिकृत रूप से शिनाख्त कर दी है। इनमें आतंक का पर्याय रहे अल-बदर के टाप कमांडर जीनत उल इस्लाम और शकील डार मारे गए थे। जीनत के जनाजे के दौरान रविवार को भारी हिंसा भड़क उठी। सुरक्षा बलों पर पथराव के बाद स्थिति को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे गए। इसके बाद भी स्थिति नहीं संभली तो पैलेट गन चलाए गए। हिंसक झड़पों में दर्जनभर से अधिक लोग घायल हुए हैं। इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 5
पुलिस ने रविवार को इनकी शिनाख्त के बारे में अधिकृत जानकारी दी। बताया कि जिले के कटपोरा में मुठभेड़ में अल-बदर के मारे गए दोनों की आतंकी गतिविधियों की लंबी फेहरिस्त है। जीनत ए डबल प्लस कैटगरी का आतंकी था। मुठभेड़ स्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं। सभी सामग्री को जांच के लिए केस रिकार्ड में ले लिया गया है।
विज्ञापन
3 of 5
सीआरपीएफ
समर्पण के लिए आतंकियों को कहा गया था
आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना पर दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के यारीपोरा के कटपोरा इलाके में शनिवार की शाम सुरक्षा बलों ने घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया था। इस दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाईं। इस पर आतंकवादियों को समर्पण के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने गोलीबारी जारी रखी। जवाबी कार्रवाई में दो आतंकी मारे गए।
4 of 5
Zeenat-ul-Islam
एक दशक से अधिक समय तक सक्रिय रहा जीनत
पुलिस के अनुसार दोनों आतंकवादी सुरक्षा संस्थानों पर हमले और नागरिकों पर अत्याचार के कई मामलों में शामिल थे। रिकार्ड के मुताबिक जीनत का 2006 से आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। उसे गिरफ्तार किया गया था। जेल से छूटने के बाद 2016 में वह हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया। कुछ समय पहले ही उसने शोपियां में अल-बदर का दामन थामा और संगठन का सरगना बन गया। वह टुर्कू शोपियां में हथियार छीनने के मामले में भी शामिल था। शकील अहमद डार भी कई आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था।
रियाज के साथ मतभेद पर छोड़ा था हिजबुल
सूत्रों का कहना है कि रियाज नायकू से मतभेद के बाद उसने हिजबुल छोड़ा था। वह पिछले साल नवंबर महीने में अल-बदर को मजबूत करने के लिए हुए समझौते के तहत वह इस संगठन में शामिल हुआ था।