आज भारत माता के उस वीर सपूत का जन्मदिन है जिसने अकेले अपने दो साथियों को बचाते हुए 25 आतंकियों से लोहा लिया था। मेजर मोहित शर्मा का जन्म 13 जनवरी 1978 को मेरठ जनपद के रासना गांव में हुआ था।
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major mohit sharma
- फोटो : फाइल
मां-पिता चाहते थे इंजीनियर बनाना
शहीद मेजर मोहित के परिजन उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे। ऐसे में मेजर मोहित एंट्रेंस देकर पास भी हो गए थे। मगर देशभक्ति का जसबा उनमें बचपन से था। ऐसे में उन्होंने एनडीए का भी एंट्रेंस दिया। जिसमें उनका सिलेक्शन हो गया और वह देश सेवा में जुट गए।
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- फोटो : फाइल
वह 2009 में कैप्टन से मेजर बन चुके थे। मार्च 2009 को अपनी टीम के साथ वह कश्मीर के कुपवाड़ा में थे जहां उन्हें हफरूदा जंगल में आतंकियों के कैंप होने की सूचना मिली। मेजर ने अपनी टीम के साथ जंगल में कैंप लगाया। 21 मार्च 2009 की घटना है जब मेजर और उनकी टुकड़ी की आतंकियों से मुठभेड़ शुरू हुई। इस मुठभेड़ में मेजर मोहित को गोली लग गई।
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- फोटो : फाइल
मेजर मोहित के दो साथी भी गोली लगने से जख्मी हो गए थे। ऐसे में मेजर मोहित ने अपने दोनों साथियों को वहां से निकाला और गोली लगने के बाद भी वीर गति को प्राप्त होते-होते ग्रेनेड फेंककर चार आतंकियों को मार गिराया। इस मुठभेड़ में सेना के मेजर समेत आठ जवान शहीद हुए थे। मेजर मोहित की वीरता को देखते हुए शहादत के बाद अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था।
कामंडेशन मेडल से भी हुए थे सम्मानित
मेजर मोहित शर्मा के असाधारण वीरता तथा प्रेरक नेतृत्व का प्रदर्शन करते हुए आतंकवादियों का हर पल डट कर सामना किया था। जम्मू कश्मीर में एक अन्य मुठभेड़ के दौरान मेजर ने अपने साथियों के साथ आतंकवादियों को धराशायी किया। जिसके लिए उन्हें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के रुप में कामंडेशन मेडल से भी नवाजा गया था।