अभिनेता, लेखक, निर्देशक सौरभ शुक्ला मंगलवार को पहली बार जम्मू पहुंचे। वजह थी थिएटर ओलंपिक्स में उनकेनाटक ‘बर्फ’ का मंचन। ‘थिएटर डे’ पर जम्मू के दर्शकों से रूबरू होने को उन्होंने खूबसूरत अहसास करार दिया। 20 अप्रैल को रिलीज होने वाली अपनी फिल्म ‘दास देव’ को लेकर वह बहुत उत्साहित दिखे। बताया कि इसके बाद अनुभव सिन्हा की फिल्म में भी अदायगी का एक नया पहलू देखने को मिलेगा। ‘जाली एलएलबी-2’ के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवार्ड जीतने वाले 55 साल के इस मूल रूप से गोरखपुरी कलाकार ने एक निजी एक होटल में ‘अमर उजाला’ से कई बातें साझा कीं।
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जम्मू पहली बार आएं हैं?
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सौरभ शुक्ला
जी, हालांकि कश्मीर पहले भी एक फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में आया था। मैंने वहां रहने के दौरान कश्मीर के अकेलेपन को बहुत शिद्दत से महसूस किया है। जिन भी वजहों से यहां विवादों की स्थिति बनी हैं, उनमें शांति की कहानियां कहे जाने की बहुत जरूरत है। ‘बर्फ’ नाटक भी इंसानी रिश्तों की ऐसी ही कहानी कहता है।
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आप एक्टर हैं, डायरेक्टर हैं, राइटर हैं, किस रोल में अपने को सबसे फिट पाते हैं?
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सौरभ शुक्ला
सभी में। मैं जिस वक्त जो चीज करता हूं, उसमें पूरी तरह डूब जाता हूं। हर विधा की अपनी अलग मांग है। उस मांग के मुताबिक खुद को उस सांचे में ढाल लेता हूं और शायद हर विधा के साथ मैंने न्याय ही किया है।
‘सत्या’ से ‘रेड’ तक एक्टिंग, डायरेक्शन, लेखन सब किया। प्रोड्यूसर बनने की चाह नहीं?
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सौरभ शुक्ला
ऐसा हो तो आपके मुंह में घी शक्कर। लेकिन यह होगा नहीं। क्योंकि फिल्म बनाना एक महंगा काम है। इतना पैसा मेरे पास नहीं। फिर पैसे की फितरत है कि वह कहीं ठहरता नहीं। मैं एक्टर ही ठीक हूं। इसी काम को ईमानदारी से करना चाहता हूं।
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आपके खुद के पसंदीदा अभिनेता कौन हैं?
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सौरभ शुक्ला
बहुत से ऐसे अभिनेता हैं, जिनकी अदायगी का मैं कायल हूं। वर्तमान की बात करें तो अजय देवगन, अक्षय कुमार, रणबीर कपूर मेरे पसंदीदा हैं। अजय के साथ हाल ही में ‘रेड’ रिलीज हुई है। अक्षय के साथ जाली एलएलबी-2, जबकि रणबीर कपूर के साथ बर्फी में काम किया। इन लोगों में काम के प्रति गजब का समर्पण है।
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जम्मू-कश्मीर में शूटिंग की कोई योजना?
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सौरभ शुक्ला
मौका मिलेगा तो जरूर। मैं जम्मू-कश्मीर में शूटिंग करना चाहूंगा। मैं कोई रोजगार एजेंसी तो नहीं चला रहा, लेकिन कोशिश करूंगा कि स्थानीय युवा को लूं। बहुत कुछ फिल्म की डिमांड पर भी निर्भर करेगा। मसलन कहानी का पुट बनारस का हो तो बनारसी युवा को ही प्राथमिकता दूंगा।
1984 से रंगमंच कर रहे हैं, रंगमंच की वर्तमान स्थिति पर क्या कहेंगे?
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सौरभ शुक्ला
रंगमंच में बेहतरीन काम हो रहा है। जो यह कहते हैं कि रंगमंच नहीं रहेगा, वह जान लें कि यह हमेशा रहेगा। सभी लोगों को इसकेलिए काम करना होगा। मैं रंगमंच के लिए ही यहां हूं। अगर 10 लोगों तक भी अपनी बात पहुंचा सका तो बहुत है।