अनुच्छेद 370 हटने के बाद तीन महीने से अधिक समय से सेंटूर होटल में बंद 34 राजनीतिक बंदियों को रविवार को एलएलए हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया गया। कड़ाके की ठंड पड़ने की वजह से डल झील किनारे स्थित इस होटल से इन्हें शिफ्ट करने का फैसला किया गया। होटल में ठंड से निपटने के पर्याप्त बंदोबस्त न होने के कारण राजनीतिक बंदियों को शिफ्ट किया गया।
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श्रीनगर में राजनीतिक बंदियों को शिफ्ट करते सुरक्षाबल
- फोटो : बासित जरगर
इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को शुक्रवार को जबरवान रेंज की पहाड़ियों पर स्थित चश्मा शाही से शहर में एक सरकारी आवास में भेजा गया था। उनकी बेटी इल्तिजा ने ठंड को देखते हुए शिफ्ट करने की मांग की थी। अधिकारियों ने बताया कि शिफ्टिंग से पहले एमएलए हॉस्टल में आवश्यक मरम्मत कार्य तथा जरूरी इंतजामात कराए गए। इसके साथ ही गृह विभाग की ओर से इसे अस्थायी जेल घोषित करने का आदेश जारी किया गया। सर्दी की वजह से नेशनल कांफ्रेस, पीडीपी, पीपुल्स कांफ्रेंस के नेताओं, प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा उनकी सुरक्षा में लगे जवानों की सेहत पर असर पड़ रहा है।
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श्रीनगर में राजनीतिक बंदियों को शिफ्ट करते सुरक्षाबल
- फोटो : बासित जरगर
श्रीनगर समेत कश्मीर घाटी में सर्द हवाएं चल रही हैं। इस महीने की शुरूआत में मौसम की पहली बर्फ बारी हुई। नवनिर्मित केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन शीतकाल के लिए श्रीनगर से जम्मू स्थानांतरित हो गया है। इन राजनीतिक बंदियों में पीपुल्स कांफ्रें स के सज्जाद गनी लोन, नेशनल कांफ्रें स के अली मोहम्मद सागर व मुबारक गुल, पीडीपी के नईम अख्तर व निजामुद्दीन भट और पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल शामिल हैं।
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श्रीनगर में राजनीतिक बंदियों को शिफ्ट करते सुरक्षाबल
- फोटो : बासित जरगर
तीन करोड़ का होटल ने बिल सौंपा
इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) के स्वामित्व वाले सेंटूर होटल ने इन लोगों के 100 दिन के आवास और अन्य खर्च का करीब तीन करोड़ रुपये का बिल गृह विभाग को भेजा है। हालांकि प्रशासन ने सेंटूर होटल के बिल को खारिज करते हुए दलील दी है कि होटल को पांच अगस्त को एक अस्थायी जेल बनाया गया था। इसलिए सरकारी दरों पर भुगतान किया जाएगा। सरकारी दर के अनुसार 800 रुपये प्रति दिन के हिसाब से भुगतान किया जाना है, जबकि होटल ने पांच हजार रुपये रोजाना की दर से बिल दिया है।
श्रीनगर में राजनीतिक बंदियों को शिफ्ट करते सुरक्षाबल
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
तलाशी के बाद हॉस्टल में हुए दाखिल, हंगामा
राजनीतिक बंदियों को तीन शिफ्ट में कड़ी सुरक्षा के बीच एमएलए हॉस्टल भेजा गया। हॉस्टल में कड़ी तलाशी ली गई। यह चेक किया गया कि कहीं उनके पास मोबाइल फोन या अन्य सामान तो नहीं हैं। इसको लेकर बंदियों ने हंगामा भी किया। इनका कहना था कि राजनीतिक लोगों की तलाशी लेना उचित नहीं है।