हजरत मोहम्मद साहब के पोते हजरत इमाम हुसैन और उनके अनुयायियों की याद में शनिवार को शहर में निकाले गए आशूरा ए मुहर्रम पर ताजिए (मातमी) जुलूस में शिया समुदाय के हजारों लोगों ने शिरकत की।
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तस्वीरों में मातमी जुलूस में कैसे उमड़ा हुजूम
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समुदाय के लोग शरीर पर जख्म देकर हजरत इमाम हुसैन और उनके अनुयायियों की शहादत को याद कर रहे थे।
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शहर के विभिन इलाकों से शिया समुदाय के सदस्य इमाम बाड़ा सोफी शाह पीर मिट्ठा में इकट्ठा हुए। यहां से मातमी धुनों के साथ जुलूस आगे बढ़ा। जुलूस में जम्मू, कारगिल, लद्दाख और श्रीनगर के शिया समुदाय से बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए।
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दसवें मुहर्रम पर अंजुमन ए इमामिया जम्मू के बैनर तले शहर के विभिन्न इलाकों से निकाले गए छोटे-बड़े दर्जनों ताजियों में बच्चों से लेकर हर आयु वर्ग के सदस्य शामिल हुए।
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जुलूस में अंजुमन ए हैदरी न्यू प्लाट सहित अन्य संस्थाओं से सदस्य शामिल हुए। अंजुमन-ए-इमामिया के प्रधान सईद अमानत अली शाह ने कहा कि इमाम हुसैन ने इसलाम को न सिर्फ बचाया बल्कि दुनिया में बलिदान और शहादत का संदेश दिया।
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इस बीच विभिन्न बाजारों में व्यापारियों और अन्य एसोसिएशनों की ओर से जुलूस में शामिल सदस्यों के लिए छबीले लगाकर भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया। इस दौरान प्रो. सुजात अली खान आदि मौजूद रहे।
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जुलूस के साथ मौजूद चिकित्सा टीमें मातम के दौरान घायल हुए लोगों को चिकित्सा दे रही थीं।
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जुलूस पीर मिट्ठा से शुरू होकर लखदत्ता बाजार, राजेंद्र बाजार, शहीदी चौक आदि से होता हुआ करबला मैदान, बजारत रोड पर संपन्न हुआ।