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Saffron in J&K: केसर के उत्पादन में 13 सालों में 67% की गिरावट, 2023 में चार फीसदी की बढ़त, क्या है वजह

Wed, 07 Feb 2024 02:25 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

केसर के उत्पादन में 67 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। हालांकि, पिछले वर्ष उत्पादन में 4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। 
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Kashmir Saffron - फोटो : बासित जरगर
केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि बीते 13 सालों में केसर के उत्पादन में 67 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। हालांकि, पिछले वर्ष उत्पादन में 4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद हसनैन मसूदी के एक सवाल के जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा ने यह जानकारी दी।

केंद्रीय मंत्री मुंडा ने कहा कि इस बारे में जम्मू कश्मीर के वित्तीय आयुक्त (राजस्व) कार्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर में केसर का उत्पादन 2010-11 में आठ मीट्रिक टन से घटकर 2023-24 (अनंतिम) में 2.6 मीट्रिक टन हो गया है। इसके परिणामस्वरूप इस अवधि में उत्पादन में लगभग 67.5% की कुल गिरावट आई है। हालांकि पिछले एक साल 2022-23 से 2023-24 के दौरान केसर उत्पादन में 4 प्रतिशित की वृद्धि हुई है।
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Kashmir Saffron - फोटो : बासित जरगर
123  बोरवेल का हुआ निर्माण

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के योजना एवं कृषि उत्पादन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 128 गहरे बोरवेलों में से 123 का निर्माण बागवानी विभाग द्वारा किया गया है। इनके दोहन और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों के साथ जोड़ने के लिए इन बोरवेलों को मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग कश्मीर को सौंप दिया गया है।
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Saffron Jammu Kashmir - फोटो : बासित जरगर
73 स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों संग जुड़े, पर अभी हो न सके शुरू

मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग कश्मीर ने 2187.08 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई करने वाले 73 गहरे बोरवेलों को स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों के साथ सफलतापूर्वक जोड़ दिया है। हालांकि, सिंचाई सुविधाओं का पूरी तरह से उपयोग नहीं किया जा रहा है। इसका कारण मिशन दिशानिर्देशों के अनुसार बोरवेलों के प्रबंधन और रखरखाव के लिए उपयोगकर्ता समूह का नहीं होना माना जा रहा है। इन्हें अभी किसान उपयोगकर्ता समूहों को नहीं सौंपा गया है।

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Saffron in Kashmir - फोटो : बासित जरगर
उत्पादन में गिरावट के लिए क्या प्रदूषण है एक वजह

मंत्री ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के कृषि उत्पादन विभाग के योजना से प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसी भी औद्योगिक प्रतिष्ठान से सीमेंट की धूल जैसे कारकों के कारण केसर के फूलों पर प्रतिकूल प्रभाव की कोई रिपोर्ट नहीं प्राप्त हुई है।

कृषि उत्पादन विभाग, राजस्व अधिकारियों, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के साथ मिलकर केसर अधिनियम, केसर नियम और अन्य राजस्व कानूनों को लागू किया जा रहा है, ताकि केसर उत्पादित भूमि को किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग न लाया जाए।
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फूलों से केसर अलग करने में जुटे किसान परिवार (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने विस्तृत समीक्षा का किया अनुरोध

केसर उत्पादन की गिरती स्थिति की पड़ताल के लिए केंद्र सरकार द्वारा कोई उच्च स्तरीय समिति का गठन नहीं किया गया है। हालांकि, केंद्र के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने यूटी प्रशासन से जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय केसर मिशन के तहत की गई सभी गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा करने का अनुरोध किया है। ताकि, जम्मू-कश्मीर में केसर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए राष्ट्रीय केसर मिशन के तहत बनाए गए सभी बुनियादी ढांचे और सुविधाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
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