नेशनल कांफ्रेंस नेता आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी और छात्रों ने जम्मू-कश्मीर की आरक्षण नीति के खिलाफ प्रदर्शन किया, और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से छह महीने में समीक्षा रिपोर्ट का आश्वासन प्राप्त किया।
जम्मू और कश्मीर में आरक्षण नीति के खिलाफ छात्रों का विरोध जारी है।
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श्रीनगर विरोध प्रदर्शन
- फोटो : बासित जरगर
नेशनल कांफ्रेंस के नेता और श्रीनगर से लोकसभा सदस्य आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने सोमवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आवास के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आयोजन किया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य जम्मू और कश्मीर में आरक्षण नीति में सुधार की मांग करना था।
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आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने रविवार को घोषणा की थी कि वह अपनी पार्टी सरकार के खिलाफ खड़े होकर आरक्षण नीति के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होंगे।
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केंद्र सरकार द्वारा पहाड़ी भाषी लोगों को आरक्षण देने के बाद जम्मू और कश्मीर में खुले मेरिट कोटे में 70 प्रतिशत आरक्षण और 30 प्रतिशत ओपन मेरिट सीटें रह गई हैं, जिसके चलते छात्रों में असंतोष है।
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सिर्फ छात्रों ने ही नहीं, बल्कि कई राजनीतिक नेता भी इस विरोध का समर्थन कर रहे हैं।
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बारामुला से लोकसभा सदस्य शेख अब्दुल राशिद और पीडीपी नेताओं जैसे वहीद पारा और इल्तिजा मुफ्ती ने भी आरक्षण नीति में सुधार की आवश्यकता की बात की है।
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हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने भी आरक्षण की पुनरावलोकन की मांग की है।
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पीडीपी के पुलवामा से विधायक ने अपने एक पोस्ट में कहा मैं रुहुल्लाह के फैसले का दिल से स्वागत करता हूं कि वह युवाओं के साथ खड़े होकर आरक्षण नीतियों में तार्किकता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं।
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यह एक अहम पल है, जहां हमें नीतियों को समावेशी युवाओं के अनुकूल और न्यायपूर्ण बनाना है।
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सोमवार को, छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की और आरक्षण नीति पर चर्चा की। छात्रों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे इस नीति के खिलाफ हैं, विशेष रूप से चिकित्सा और शल्यचिकित्सा के छात्रों में इसका विरोध अधिक है।
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मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए छात्रों को आश्वासन दिया कि आरक्षण नीति की समीक्षा करने के लिए गठित उपसमिति अपनी रिपोर्ट छह महीने के भीतर प्रस्तुत करेगी।
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लोकसभा सदस्य आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने इस बैठक के बाद कहा कि मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित किया है कि उपसमिति का काम अब समयबद्ध तरीके से पूरा होगा।
मुख्यमंत्री ने हमें आश्वासन दिया है कि वह छह महीने में रिपोर्ट पेश करेंगे। छात्रों की संतुष्टि के लिए यह महत्वपूर्ण कदम है, और इससे उम्मीद है कि यह मुद्दा जल्द सुलझ जाएगा। हालाकि, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यह स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस मामले में न्यायालय के आदेशों का पालन करेगी।