सोशल मीडिया पर भड़काऊ भाषणों का नतीजा क्या हो सकता है यह इन दिनों राजस्थान के दो जिलों में देखने को मिल रहा है। राजसमंद में लाइव मर्डर के आरोपी शंभूलाल रैगर के समर्थन में कुछ हिंदुवादी संगठनों ने बृहस्पतिवार को उदयपुर में जबरन रैली निकालने का प्रयास किया। जब पुलिस ने उन पर बल प्रयोग कर रोकना चाहा तो वे पुलिस से भिड़ गए। पुलिस ने जब बल प्रयोग प्रारंभ किया तो रैली निकाल रहे लोगों ने पथराव कर दिया। दोनों और से हुई पत्थरबाजी में 31 पुलिसकर्मी गंभीर रुप से घायल हो गए। वहीं कुछ प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आई हैं।
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निषेधाज्ञा के बाद भी बवाल, 175 गिरफ्तार
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पुलिस और प्रदर्शनकारी भिड़े
पुलिस ने 175 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता हैं कि विरोध पर उतरे लोग एक एडिशनल एसपी से भी हाथापाई करने से नहीं चूके। राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के शहर में मचे इस बवाल ने कानून व्यवस्था पर एक बार फिर प्रश्न चिन्ह लगा दिया। गौरतलब है कि पुलिस प्रशासन को इस बात की आशंका था कि बवाल हो सकता है, इसलिए उदयपुर में बृहस्पतिवार को धारा 144 लगाई गई थी और इंटरनेट सेवाएं बंद हैं।
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इसलिए मचा है बवाल
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उदयपुर बवाल
पुलिस प्रशासन की सख्ती के बावजूद कथित हिंदुवादी संगठनों ने रैली निकाली और सैंकड़ों की संख्या में लोग एकत्रित हो गए। इससे पुलिस की तैयारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं राजसमंद और उदयपुर में इंटरनेट सेवाएं पर बैन बढ़ा दिया गया है। गौरतलब है कि बीते छह दिसंबर को उदयपुर के नजदीक राजसमंद में शंभूलाल रैगर नाम के शख्स ने एक बंगाली ठेकेदार अफराजुल की लव जिहाद के नाम पर हत्या कर दी थी। जिसके पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।
विरोधियों के निशाने पर गृहमंत्री
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गुलाबचंद कटारिया।
इसके बाद सोशल मीडिया पर शंभूलाल के समर्थन में कुछ लोग लगातार कैम्पेन चला रहे है और भड़काउ बयानबाजी कर रहे है। इसी के परिणामस्वरुप उदयपुर व राजसमंद में हालात तनावपूर्ण हो गए है। लेकिन गृहमंत्री के शहर में बिगड़ी कानून व्यवस्था ने विरोधियों को एक और मौका दे दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब गृहमंत्री के शहर में ही कानून व्यवस्था का यह हाल है तो बाकी राज्य की स्थिति में कानून व्यवस्था का अंदाजा लगाना मुश्किल है।
वहीं विरोधियों का कहना है राज्य सरकार अपनी चार वर्ष की थोथी उपलब्धियों का जश्न मनाने में व्यस्त है। मुख्यमंत्री सहित किसी भी मंत्री या अधिकारियों को उदयपुर व राजसमंद में बिगड़ रहे हालातों के बारे में सोचन का ही वक्त नहीं है। यह दर्शाता है कि सरकार राज्य व लोगों के प्रति बिल्कुल भी चिंतिंत नहीं है। वहीं उदयपुर में बिगड़े हालात के बाद अन्य जिलों से भी पुलिस बल उदयपुर भेजा गया है। बृहस्पतिवार दोपहर बाद उदयपुर में मचा बवाल शाम तक जारी रहा।