गुजरात विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद भाजपा और कांग्रेस की रणनीति में बदलाव देखने को मिला है। इस का असर राजस्थान में हो रहे तीन उपचुनाव में भी नजर आ रहा है। जहां भाजपा ने इन चुनावों में जीत के लिए वंशवाद और जातिवाद का सहारा लिया है। वहीं दूसरी और कांग्रेस अपने दिग्गजों को फिर से एकजुट करने का प्रयास करती हुई नजर आई है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार इन उपचुनावों के एक फरवरी को आने वाले परिणाम राजस्थान में राजनीति को काफी हद तक बदलने वाले सबित होंंगे।
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स्टार प्रचारकों की लिस्ट में शामिल थे मोदी
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फाइल फोटो।
भारतीय जनता पार्टी ने जब अलवर, अजमेर लोकसभा व मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की तब विपक्षियों ने खासी चुटकी ली थी। दरअसल पार्टी ने नरेन्द्र मोदी और अमित शाह को इस लिस्ट में टॉप पर रखा था। हालांकि वे इन उपचुनावों में प्रचार के लिए आए नहीं। लेकिन यह चर्चा का विषय अवश्य रहा कि उपचुनाव के लिए पार्टी प्रधानमंत्री और अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से चुनाव प्रचार कराएगी।
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राजे के लिए चुनौती
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फाइल फोटो।
राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के लिए यह चुनाव काफी अहम माने जा रहे है। दरअसल राजे अपनी ही पार्टी में काफी विरोध का सामना करती रही है। फिर वह चाहे पार्टी के दिग्गज और विधायक घनश्याम तिवाड़ी के आरोप हो या फिर पर्दे के पीछे से भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर और अमित शाह के करीबी भूपेन्द्र यादव से की चुनौती है। क्योंकि ये दोनों ही नेता पार्टी आलाकमान के करीबी और राजस्थान से आते है।
इसलिए भी भाजपा के लिए चुनौती
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फाइल फोटो।
राजस्थान में हो रहे उपचुनाव के भाजपा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिन सीटों के लिए चुनाव हो रहा है वे अब तक भाजपा के पास ही थी। लेकिन अब इन सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को खासी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी की परेशानियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी ने इन तीनों उपचुनाव के लिए प्रत्याशियों की घोषणा नामांकन से मात्र दो तीन दिन पूर्व की थी।
जहां वसुंधरा राजे की साख इन उपचुनावों में दांव पर है। वहीं कांग्रेस भी इन उपचुनावों के नतीजों पर नजर गड़ाए बैठी है। क्योंकि राजस्थान में कांग्रेस कई गुटों में बंटी रही है। जहां एक ओर प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट है वहीं दूसरी और पूर्व मुख्यमंत्री और गुजरात चुनाव में अपनी काबलियत के भरोसे कांग्रेस को टक्कर में लाने वाले अशोक गहलोत है। जानकारों के अनुसार यदि इन उपचुनाव के नतीजे कांग्रेस के अनुकूल नहीं आते तो राहुल गांधी यहां पार्टी में बदलाव कर सकते है।