भारतीय जनता पार्टी के लिए एक फरवरी को आए उपचुनावों के नतीजे निराश करने वाले रहे। राजस्थान और पश्चिम बंगाल से आए नतीजों के बाद भाजपा आलाकमान अब बड़े फेरबदल सबंधित राज्यों में कर सकता है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार राजस्थान में पार्टी को बड़ा झटका लगा है। प्रदेश में भाजपा सरकार होने के बाद भी बीते कुछ समय में भाजपा को यहां लगातार उपचुनावों में हार मिली है।
विज्ञापन
आठ में से छह उपचुनाव हारे
2 of 5
फाइल फोटो।
राजस्थान में वर्ष 2013 में वसुंधरा राजे की सरकार ने सत्ता संभाली थी। इसके बाद अब तक प्रदेश में आठ उपचुनाव हुए है। जिसमें भाजपा को छह उपचुनावों हार का मुंह देखना पड़ा है। चार वर्षो के दौरान छह विधानसभा व दो लोकसभा सीटों के लिए उपचुनाव हुए। जिसमें भाजपा को केवल दो विधानसभा उपचुनाव में जीत मिली है। जबकि कांग्रेस ने चार विधानसभा व दो लोकसभा सीटें जीती है।
विज्ञापन
दोनों जगह सरकार फिर भी हार
3 of 5
फाइल फोटो।
चौंकाने वाले तथ्य यह है कि भाजपा के राजस्थान में अब तक हुए उपचुनाव में लगातार हार मिली है। जबकि राजस्थान और केन्द्र में भाजपा सत्ता पर काबिज है। इतना ही नहीं बीते कुछ उपचुनावों में पार्टी की ओर से राजस्थान में लिए गए फैसले भी अजीबो-गरीब रहे। गौरतलब है कि उपचुनावों में भाजपा जिन छह स्थानों से हारी वे पहले भाजपा के सांसदों और विधायकों के पास ही थी।
केबिनेट मंत्री ही दो लाख वोट से हारे
4 of 5
फाइल फोटो।
एक फरवरी को आए उपचुनाव के नतीजों ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की नींद उड़ा दी है। अलवर, अजमेर लोकसभा व मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनावों में भाजपा के प्रत्याशियों को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी है। पार्टी और सरकार को सबसे अधिक शर्मिंदगी अलवर लोकसभा से मिली है। यहां से पार्टी ने वर्तमान राज्य सरकार में केबिनेट मंत्री डॉ जसवंत यादव को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन वे करीब दो लाख वोटों से हार गए।
राजस्थान उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद भाजपा शीर्ष नेतृत्व यहां संगठन व सरकार में बदलाव कर सकता है। जानकारी के अनुसार पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने कई पार्टी अधिकारियों से हार के बाद फीडबैक लिया है। भाजपा के सूत्र बताते है अमित शाह राजस्थान भाजपा के नेताओं से नाराज है। इसका असर पार्टी में जल्द ही बदलाव के रुप में देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी पर गाज गिर सकती है।