राजस्थान में अब तक हुए सबसे दर्दनाक हादसों में ब्यावर हादसा भी सम्मलित है। बीती 16 फरवरी को यहां के विवाह स्थल में फटे सिलेंडरों के बाद मौत का सिलसिला अब तक थमा नहीं है। इस हादसे में पुलिस ने जिस हलवाई गजेन्द्र सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया था उसने भी मंगलवार को जयपुर में दम तोड़ दिया। जिसके इस हादसे में मरने वालों की संख्या 20 हो गई है। वहीं अब तक हलवाई बताए जा रहे गजेन्द्र सिंह की मौत के बाद जांच में कठिनाई हो सकती है। क्योंकि गजेन्द्र सिंह ने पुलिस पर कई आरोप लगाए है।
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पिता ने लगाए यह आरोप
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ब्यावर
वहीं गजेन्द्र सिंह के पिता बसंत सिंह ने आरोप लगाया है कि उनका बेटा हलवाई नहीं था। अपितु वह एक निजी कंपनी में सुपरवाइजर था। गौरतलब है कि अजमेर के ब्यावर में बीते शुक्रवार की शाम को हेमंत पटनेचा के विवाह पूर्व की रस्में अदा की जा रही थी। इस दौरान गलत तरीके से दूसरे सिलेंडर में गैस भरने के दौरान विस्फोट हो गया।
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48 घंटे लगे शव निकालने में
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beawar tragedy
- फोटो : अमर उजाला
प्रत्यक्षदर्शियों के दो से अधिक सिलेंडर में विस्फोट हुए थे। जिसके बाद करीब दो दिन तक चले रेस्क्यू आॅपरेशन के बाद मलबे से सभी शव बाहर निकाले गए थे। हादसा इतना भीषण था कि जिला प्रशासन को एसडीआरएफ के बाद एनडीआरएफ और सेना की मदद भी लेनी पड़ी। वहीं हादसा स्थल को पूरा धराशायी करने के बाद ही सभी शव निकाले जा सके थे।
सबसे ज्यादा मृतक पीपाड़ के
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हादसे में दूल्हे की मां सहित 19 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं कई गंभीर घायलों का इलाज अब ब्यावर, अजमेर व जयपुर के अस्पतालों में चल रहा है। इस हादसे में सबसे अधिक मौत पीपाड़ से आए लोगों की हुई थी। जानकारी के अनुसार पीपाड़ के दस, पाली के तीन व ब्यावर के सात लोगों की मौत अब तक इस हादसे में हुई है।
वहीं हादसे की जांच के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने एक जांच कमेटी गठित करने के आदेश दिए थे। इस कमेटी के अध्यक्ष राजस्व मंडल के अध्यक्ष है। वे जल्द ही एक रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेंगे। गौरतलब है कि हादसे के कारण आसपास के एक दर्जन से अधिक मकानों को नुकसान पहुंचा था। वहीं पुलिस व जिला प्रशासन को विवाह स्थल में कई खामियां भी हादसे के बाद नजर आई थीं।