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इस नेता की टी-पार्टी राहुल गांधी के लिए परेशानी का सबब, जानें कैसे...

Thu, 08 Feb 2018 10:36 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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फाइल फोटो।
पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल इन दिनों जयपुर में हैं। वे बीते कई दिनों में राज्यपाल सहित कई राजनेताओं से मुलाकात कर चुकी हैं। इन्हीं कार्यक्रमों के सिलसिले में आज राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और राहुल गांधी के करीबी नेताओं में से एक अशोक गहलोत ने पूर्व राष्ट्रपति के सम्मान में टी-पार्टी का आयोजन किया है। जिसमें राजस्थान कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता सम्मलित हुए है। लेकिन इस पार्टी में एक शख्स पर सभी की निगाहें टिकी हुई थी, लेकिन उम्मीदों के विपरित वह नजर नहीं आए। जिसके बाद पार्टी में पूर्व राष्ट्रपति से ज्यादा चर्चा उस शख्स की अनुपस्थिति को लेकर हो रही है।
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नहीं दिखे सचिन पायलट

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अशोक गहलोत
राजस्थान के दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत की इस टी-पार्टी में राजस्थान कांग्रेस के तमाम चेहरे नजर आए, लेकिन कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट पार्टी में नहीं पहुंचे। पायटल का गहलोत की पार्टी में नहीं पहुंचना, जहां विरोधियों को चुटकी लेने का अवसर दे गया, वहीं कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति की चर्चा भी इस टी-पार्टी के कारण फिर से होने लगी है। इस टी-पार्टी में पूववर्ती अशोक गहलोत सरकार में मंत्री रहे व पूर्व कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सहित लगभग सभी कांग्रेसियों ने शिरकत की।
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दिल्ली में हैं पायलट

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सचिन पायलट
सचिन पायलट के इस टी-पार्टी में नहीं आने का सवाल जब उनके करीबी नेताओं से किया गया, तो उन्होंने बताया कि पायलट दिल्ली में हैं, इसलिए वे नहीं आ सके। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की इस टी-पार्टी के राजनीतिक मायने में खास हैं। क्योंकि हाल ही में उपचुनाव में मिली कांग्रेस को जीत के बाद पहली बार तमाम कांग्रेसी एक साथ नजर आए हैं। लेकिन इनमें ज्यादातर गहलोत खेमे के माने जाने वाले नेता ही हैं।

कांग्रेस है गुटबाजी का शिकार

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फाइल फोटो।
राजस्थान में हुए उपचुनाव से पूर्व अशोक गहलोत के एक बयान ने काफी सुर्खियां बटोरी थी। उन्होंने कहा था कि किसी का पार्टी का प्रदेशाध्यक्ष बनने का मतलब यह नहीं है कि वह मुख्यमंत्री का दावेदार है। गहलोत का निशाना सचिन पायलट की ओर था। गौरतलब है कि राजस्थान में कांग्रेस गुटबाजी का शिकार है। पूर्व अशोक गहलोत और प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट के गुट के अतिरिक्त अन्य कई गुट कांग्रेस में सक्रिय है। 
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राहुल गांधी की मुश्किल बढ़ेगी

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फाइल फोटो।
दरअसल अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों ही नेहरू-गांधी परिवार के खासे करीबी माने जाते हैं। जहां अशोक गहलोत का पंजाब और गुजरात में परफॉर्मेंस बेहतर रहा। वहीं सचिन पायलट ने उपचुनाव में पार्टी को जीत दिलाकर राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद जीत का पहला तोहफा दिया है। राहुल गांधी के लिए परेशानी का सबब है कि इस वर्ष के अंत में राजस्थान में विधानसभा चुनाव है और कांग्रेस राजस्थान में किसकी अगुवाई में चुनाव लड़ेगी यह तय करना उनके मुश्किल होगा।
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