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ये क्या! राजस्थान में 'बर्फ' की चादर, देखकर चौंक जाएंगे आप

Mon, 18 Sep 2017 03:08 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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खंडहर बन चुका पुराने रेल के पुल का नजारा - फोटो : Internet
राजस्थान को दुनियाभर में यहां की गर्मी और ऊंचे-ऊंचे रेत के टीलों के लिए जाना जाता है, मगर ये दृश्य देखने के बाद हर कोई चौंक जाता है, अरे! ये क्या, राजस्थान में बर्फ सी चादर। आमतौर पर आपने ऐसे दृश्य केवल हिमाचल प्रदेश या जम्मू कश्मीर में देखे होंगे, मगर राजस्थान में ऐसी सफेद चादर कहां बिछती है, ये बहुत कम लोग ही जानते हैं।
 
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ऐसा नजारा देखने के बाद धोखा भी खा जाते हैं लोग

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नमक के इन टीलों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि ये किसी ग्लेशियर हो - फोटो : Internet
राजस्थान की राजधानी जयपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर एक कस्बा है सांभर। यह कस्बा अपने ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ नमक उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है जहां दूर दूर तक देखने पर नमक के अलावा और कुछ नजर नहीं आता है। जगह-जगह नमक के पहाड़ हैं। अब सांभर पर्यटन स्थल के रूप में भी उभर रहा है। यहां झील में लोग बाइकिंग, सफारी करने के लिए दूर दूर से आते हैं लेकिन, ये खतरनाक भी साबित हो सकता है। इसलिए अगर आप भी यहां घूमने के लिए जाएं तो संभल कर रहें। 
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छुक-छुक से होती है नमक की सप्लाई

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नमक ढोकर ले जाती है एक ट्रेन - फोटो : Internet
नमक उत्पादन के साथ यहां की खासियत है इंटरनल रेलवे ट्रेक। यहां झील में आज भी नेरो गेज ट्रेन चलती है। जिसे नमक की ट्रेन कहते है। नमक की ट्रेन जहां नमक के साथ यहां मजदूरों को भी एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है। सुरक्षा के लिए इस कस्बे में कई रेलवे फाटक बने हुए है। इसी तरह पुल भी बने हुए है। 
 

परफेक्ट लोकेशंस में से एक है सांभर झील

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पीके फिल्म के शुरुआती दृश्य भी यहीं फिल्माए गए थे - फोटो : Internet
फिल्म इंडस्ट्री की नजरों में सांभर झील एक परफे​क्ट शूटिंग लोकेशन बनती जा रही है। झील के बीचों बीच कई एजेंसियों द्वारा फैशन फोटो शूट्स यहां आम बात है। वहीं बॉलीवुड की कई फेमस फिल्मों के सीन इस लोकेशन पर फिल्माए जा चुके हैं।
 
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मीलों दूर से आने वाले फ्लैमिंगो का यहां होता है स्वागत

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झील में विचरण करते फ्लेमिंगो - फोटो : Internet
सर्दी के मौसम में पानी की तलाश में मीलों दूर से आने वाले फ्लैमिंगो पक्षी यहां अपना डेरा जमा लेते हैं। झील में नमक के अलावा मछलियां होने के कारण इन पक्षियों को दाना और पानी दोनों आराम से उपलब्ध हो जाता है। 
 
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बाइकिंग के शौक के लिए जन्नत से कम नहीं है ये जगह

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झील के साइड में जमें कीचड़ में फंसी एक बाइकर की बाइक - फोटो : Internet
बाइकिंग का शौक रखने वालों के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। हालांकि झील में बाइक चलाना किसी जोखिम उठाने से कम नहीं है मगर बाइकर्स झील के बीचों बीच अपनी बाइकें ले जाकर करतब दिखाते हैं। 
 
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इस म्यूजियम में है नमक का इतिहास

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(सांभर का ऐतिहासिक म्यूजियम) - फोटो : Internet
यहां नमक का म्यूजियम भी है। इस म्यूजियम में नमक का इतिहास, नमक बनाने के तरीके एवं उपकरण आदि रखे हुए है। अफसोस की बात यह है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के कारण ये म्यूजियम आम लोगों से दूर है। इसे बंद कर रखा है। 
 

यहीं पर है, तीर्थों की नानी भी

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शाकंभरी माता मंदिर - फोटो : Internet
सांभर का धार्मिक महत्व भी है। यहां चौहान वंश की कुलदेवी शाकंभरी माता का प्रसिद्ध मंदिर है। कहा जाता है कि माता के श्राप के कारण यहां की वन और धन सम्पदा नमक में बदल गई। यहां पर प्रसिद्ध देवयानी और समिष्ठा है। देवयानी को तीर्थों की नानी कहा जाता है।

 

खुदाई में मिले प्राचीन सिक्के

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फाइल फोटो - फोटो : Internet
सांभर से थोड़ी दूरी पर स्थिति है नलियासर। नलियासर के एक टीले पर की गई खुदाई में ईसा पूर्व की तीसरी शताब्दी से लेकर 10वीं शताब्दी ई. के अवशेष प्राप्त हुए हैं। यहां खुदाई में मुद्राएँ, उत्तर इण्डोसासेनियन सिक्के, हुविष्क के सिक्के, इण्डोग्रीक सिक्के,यौधेयों के सिक्के प्रमुख रुप से मिले है। 
 
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नमक के साथ मिठाई के लिए भी है फेमस

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सांभर की प्रसिद्ध फीणी - फोटो : Internet
नमक के साथ मिठाई, सुनने में अटपटा लगता है। सांभर नमक के साथ एक मिठाई के लिए भी फेमस है। दरअसल यहां की फीणी काफी फेमस है। फीणी एक तरह की मिठाई जो मैदा से बनती है और इसे मीठा करने के लिए चाशनी चढ़ाई जाती है। 
 
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