जैसलमेर के पोकरण में कुछ दिन पूर्व प्रशिक्षण के दौरान हॉवित्जर तोप का अचानक बैरल फट गया। गनीमत यह रही है कि हादसे में कोई सैनिक घायल नहीं हुआ है। वहीं नयी तोप का बैरल फटने से इसकी गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग गया है। हालांकि इन तोपों की अपनी ही खासियतें भी हैं। डील के तहत भारतीय सेना को 145 तोपें मिलेंगी, जिससे सुरक्षा चाक चौबंद होगी। इस गन की सबसे अहम खासियत यह है कि हल्की होने के कारण इसे हैलीकॉप्टर से कहीं भी लाया-ले-जाया जा सकता है।
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बोफोर्स के मुकाबले होती हैं काफी हल्की
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हॉवित्जर
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय सेना में सम्मलित होने जा रही हॉवित्जर तोप बोफोर्स के मुकाबले बहुत हल्की हैं। जहां बोफोर्स तोप का वजन करीब 13 टन है, वही हॉवित्जर का वजन चार टन ही है। हॉवित्जर को हेल्किॉप्टर के माध्यम से आसानी से पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात किया जा सकता है। गौरतलब है कि चीन और पाकिस्तान के भारतीय सीमा पहाड़ी क्षेत्र में काफी दूरी तक है।
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भारत में भी होंगी तैयार
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हॉवित्जर
- फोटो : अमर उजाला
महत्पूर्ण जानकारी के अनुसार भारत को मिलने वाली 145 हॉवित्जर तोप में से 25 तोप भारत को तैयार मिलेंगी, जबकि बाकी का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।
चलाने के लिए चार-पांच सैनिकों की जरूरत
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हॉवित्जर
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हॉवित्जर तोप आधुनिक तकनीक से लैस है इसलिए इस आॅपरेट करने के लिए केवल चार-पांच सैनिकों की आवश्यकता होती ही।
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चालीस किमी तक लगाएगी निशाना
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हॉवित्जर
- फोटो : अमर उजाला
जहां बोफोर्स की मारक क्षमता 20-25 किलोमीटर है, वहीं हॉवित्जर की मारक क्षमता 40 किलोमीटर तक बताई जा रही है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार हॉवित्जर तोप से एक मिनट में पांच गोले दागे जा सकते है जबकि बोफोर्स तोप से इतनी समयावधि में केवल दो गोले ही दागे जा सकते हैं।