मुश्किल में है अन्नदाता लेकिन सरकारों ने शायद उनकी परेशानियों से मुंह फेर लिया है। इसलिए विरोध प्रदर्शनों के बाद भी उनकी समस्याओं समाधान नहीं हो रहा है। जयपुर के नजदीक नींदड़ गांव में गांधी जयंती के मौके पर प्रारंभ हुआ जमीन समाधि सत्याग्रह आठ दिन बाद भी जारी है।
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सत्याग्रह के साथ पति धर्म भी निभाया
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फाइल फोटो।
गड्ढों में आधे दबे किसानों की सुध लेने के लिए सरकारी अधिकारियों के पास शायद समय नहीं है। वहीं रविवार को पीड़ित किसानों की पत्नियों ने गड्ढों में आधे दबे अपने पतियों की करवा चौथ के मौके पर आरती भी उसी अवस्था में उतारी है। यह नजारा देखकर वहां मौजूद अन्य लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा और किसानों के प्रति करुणा का भाव था।
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महिला किसान भी हैं सम्मलित
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फाइल फोटो।
गौरतलब है कि जयपुर विकास प्राधिकरण की जमीन आवाप्ति का विरोध कर रहे 21 किसान जमीन समाधि सत्याग्रह कर रहे हैं। उनके साथ कई महिला किसान भी इस सत्याग्रह में सम्मलित हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण ने इस करीब 1350 बीघा जमीन आवाप्त की है।
नहीं बन पा रही सहमति
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फाइल फोटो।
इसमें से करीब 550 बीघा जमीन पर जेडीए कब्जा भी ले चुका है। लेकिन बाकी बची जमीन से किसान हटने को तैयार नहीं है। हालांकि किसानों और जेडीए अधिकारियों के बीच वार्ता हुई थी, लेकिन अभी तक इस विषय पर सहमति नहीं बन सकी है। वहीं इस मामले में राजनीति भी तेज हो गई है।
राजस्थान सरकार के मंत्री किसानों की समस्या पर तो बात करते है लेकिन कानून का हवाला भी देते नजर आते है। जबकि इस मामले के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है जमीन का पुन: सर्वे कराया जाएगा। लेकिन अभी तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।