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जरूर देखिए, जयपुर की इस पहचान को

Tue, 04 Apr 2017 09:14 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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हवामहल
जयपुर आने वाले देशी—विदेशी पर्यटकों के लिए यहां खास महल, मंदिर और कलाकृतियां विशेष महत्व रखती हैं। बाजार से लेकर पुरानी हवेलियां तक अपनी कहानी समेटे हुए हैं लेकिन कुछ खास स्थल जयपुर की पहचान विदेशों तक बनाते हैं।

बड़ी चौपड़ के पास स्थित हवामहल यहां से गुजरने वाले लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता है। बताया जाता है कि शाही परिवार की महिलाएं इसमें बनी खिड़कियों से शहर को निहारती थी। लाल और गुलाबी बलुआ पत्थर से निर्मित इस महल को महाराजा सवाई प्रताप सिंह द्वारा 1799 में बनवाया गया था। इसके निर्माण का जिम्मा उन्होंने लाल चंद उस्ताद को दिया,  जिन्होंने कृष्ण के मुकुट के समान इसकी संरचना को डिजाइन किया। पांच मंजिला इस इमारत में कुल 953 खिड़कियां हैं।
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संग्रहालय में खास वस्तुओं का संग्रह

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सिटी पैलेस
सिटी पैलेस परिसर में सबसे प्रमुख संरचनाएं चंद्र महल, मुबारक महल, मुकुट महल, महारानी पैलेस, गोविंद देव मंदिर और सिटी पैलेस संग्रहालय हैं। इसका निर्माण 1729 से 1732 के बीच कराया गया। यहां संग्रहालय में राजा—महाराजाओं के जमाने की वस्तुओं का संग्रह किया गया है। जिसमें उनकी पोशाक, हथियार, बर्तन, कवच और ढाल सहित रजवाड़ा जीवन को प्र​दर्शित करती वस्तुओं को शामिल किया गया है। यहां आज भी जयपुर राजघराने के लोग निवास करते हैं। पूरे शहर में सबसे पहले होली भी यहां मंगलती है उसके बाद अन्य जगहों पर अग्नि को ले जाया जाता है।
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आने वाली बारिश की भविष्यवाणी आज भी यहां से

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जंतर—मंतर
जयपुर में आने वाले पर्यटकों के लिए जंतर—मंतर स्मारक भी खासा महत्व रखता है। यहां पर सवाई जयसिंह द्वितीय की ओर से बनवाए गए उन्नीस वास्तु और खगोलीय उपकरणों का संग्रह है। इस वेधशाला को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया है। प्राचीन हिंदू संस्कृत ग्रंथों में बताए गए खगोल विज्ञान के सिद्धांतों के आधार पर यहां ज्योतिषीय उपकरण की संरचना बनाई गई है। आज भी यहां संस्कृत के विद्वतजनों की ओर से ध्वजा फहराकर प्रदेश में आने वाली बारिश की भविष्यवाणी हवा का रुख जानकर की जाती है।

सबसे पुराना संग्रहालय होने का गौरव

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अल्बर्ट हॉल
अल्बर्ट हॉल संग्रहालय राज्य का सबसे पुराना और प्रसिद्ध संग्रहालय है। रामनिवास गार्डन में स्थित इस इमारत इंडो—सरैसेनिक शैली के आधार पर बनाया गया है। इसकी डिजायन सर सैमुअल स्विन्टन जैकब द्वारा की गई थी। इसमें उनकी सहायता मीर तुजूमुल होसिन ने की। किंग एडवर्ड सप्तम, जिन्हें अल्बर्ट एडवर्ड के नाम से भी जाना जाता था। जब अल्बर्ट जयपुर की यात्रा पर आए तो इसी याद में 1876 में इस इमारत की आधारशिला रखी गई। सन् 1887 में सार्वजनिक संग्रहालय के रूप में इसे खोला गया। संग्रहालय में चित्रकारी, कालीन, हाथीदांत, पत्थर, धातु की मूर्तियां और क्रिस्टल में काम करने वाली कलाकृतियों का एक समृद्ध संग्रह है। अब यहां राजस्थान दिवस सहित कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन भी किया जाता है।
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पूर्णिमा के दिन चमक दोगुनी

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बिड़ला मंदिर
जेएलएन मार्ग पर सफेद मार्बल से निर्मित बिड़ला मंदिर रात के समय अपनी खासी चमक के लिए जाना जाता है। पूर्णिमा के दिन तो इसकी चमक और भी बढ़ जाती है। यहां भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का मंदिर है। मंदिर का निर्माण 1977 में शुरू किया गया था जो 1985 तक जारी रहा। बिड़ला ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज द्वारा निर्मित कराए गए इस मंदिर को लक्ष्मी नारायण मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर भी कई देवी देवताओं के चित्र पत्थर की कलाकृतियों को उकेरकर बनाए गए हैं।
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झील के बीचों—बीच अनुपम सौंदर्य

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जलमहल
मानसागर झील के बीचों—बीच पांच मंजिला जलमहल दिल्ली से राजधानी में प्रवेश करते ही राजस्थानी कला का परिचय देता है। इसकी चार मंजिल पानी के नीचे रहती है। महल की खासियत सुगंधित चमेली बाग है जहां कई फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी है। प्रवासी पक्षियों को निहारने के लिए यहां दूर—दूर से पक्षी विशेषज्ञ भी आते हैं। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए पास ही स्थित नाहरगढ, जयगढ़, कनक वृंदावन घाटी देखने का अवसर भी मिल जाता है।
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