'पद्मावत' की स्पेशल स्क्रीनिंग देखने के बाद हाईकोर्ट जस्टिस ने अपनी राय दे दी है। हालांकि यह राय करणी सेना से मेल नहीं खाती। 'पद्मावत' को लेकर चल रहे विवाद के दौरान कोर्ट ने अब संजय लीला भंसाली समेत अन्य को राहत दे दी है। कोर्ट की राय भंसाली एंड टीम के लिए राहत की सांस देने वाली जरूर है।
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सरकार रिलीज करवाए फिल्म
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दरअसल, जज संदीप मेहता ने संजय लीला भंसाली, रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण पर नागौर के डीडवाना थाने में धार्मिक भावनाएं आहत करने को लेकर दर्ज एफआईआर निरस्ती के मामले में आज सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पालना की जाए। राजस्थान में सरकार फिल्म देखनेवालों के लिए सुरक्षा मुहैया करवाए और फिल्म रिलीज करवाए। इससे पूर्व जज संदीप मेहता ने सोमवार को जोधपुर के आईनॉक्स मॉल में पद्मावत फिल्म देखी। इस दौरान थिएटर में उनके साथ उनका केवल स्टॉफ ही मौजूद था।
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धार्मिक किरदार नहीं बल्कि ऐतिहासिक किरदार
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कोर्ट ने इनके खिलाफ दर्ज एफआईआर तो रद्द की ही है, साथ ही कहा है कि पद्मावत धार्मिक किरदार नहीं बल्कि ऐतिहासिक किरदार है। कोर्ट ने कहा है कि इस फिल्म से देश का गौरव ऊंचा हुआ है। कल रात फिल्म देखने वाले राजस्थान हाईकोर्ट जस्टिस संदीप मेहता ने आज सुनवाई के दौरान कहा है कि फिल्म में आपत्ति जैसा कुछ नहीं बल्कि इसमें राजपूताने को ग्लोरीफाई किया गया है। कोर्ट ने कहा इसमें धार्मिक भावनाएं भड़काने जैसी बात नजर नहीं आती।
छावनी में बदल गया था मल्टीप्लैक्स
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जब जस्टिस के लिए स्पेशल स्क्रीनिंग आयोजित करवाई गई थी तो उस दौरान पुलिस की पुख्ता व्यवस्था की गई थी। मल्टीप्लेक्स के चारों तरफ कड़ी सुरक्षा थी, दो सौ से ज्यादा पुलिसकर्मी लगाए गए थे।
संजय लीला भंसाली की ओर से एफआईआर रद्द करने की याचिका लगाई गई थी। इस पर कोर्ट ने कहा था कि कोर्ट फिल्म देखने के बाद एफआईआर रद्द करने को लेकर फैसला करेगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के बाद 25 जनवरी को पूरे देश में फिल्म रिलीज हो चुकी है।