गौरक्षा के नाम पर देशभर से उग्र होती भीड़ की तस्वीरें समय-समय पर दिखाई देती रहती हैं। लेकिन जब आपदा के दौरान यह गौवंश गौशालाओं में भूख और चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ता है, तब कथित गौरक्षक सामने नहीं आते हैं। पिछली तीन दिनों में जालौर जिले की पथमेड़ा में स्थित गौशाला में 536 गायों ने बाढ़ के हालातों में दम तोड़ दिया है।
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सरकारी प्रयास भी सिर्फ खानापूर्ति आते हैं नजर
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बड़ी संख्या में गायों की मौत
इतना ही नहीं अब सरकारें गौरक्षा और गौपालन को बढ़ावा देने के लिए अपनी केबिनेट में मंत्री भी नियुक्त करने लगी हैं, लेकिन सरकारों के यह प्रयास तब खानापूर्ति नजर आते हैं, जब कीचड़ में फंसा गौवंश स्वयं को निकाले जाने के इंतजार में कई-कई दिन इंतजार करता है।
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मेडिकल सुविधा के अभाव में तड़पती रही गायें
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दयनीय स्थिति में गौवंश
देश की प्रमुख गौशालाओं में दो गौशाला राजस्थान में भी है। इनमें एक है जयपुर के नजदीक स्थित हिंगोनिया गौशाला जहां दो वर्ष पूर्व सैंकड़ों की संख्या में हुई गौवंश की मौत ने सरकार को हिला कर रख दिया था। लेकिन अब राजस्थान के जालौर स्थित पथमेड़ा गौशाला चर्चाओं में है।
जानकारी देने के बाद भी नहीं पहुंची सरकारी टीमें
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मृतक गायें
जालौर ओर सिरोही क्षेत्र में हो रही भारी बारिश के कारण पथमेड़ा गौशाला की क्षेत्रीय शाखाओं में 536 गौवंश पिछले कुछ दिनों में दम तोड़ चुका हैं। बरसात में उपजे बाढ़ के हालातों के बीच गौशाला प्रशासन ने कई बार जिला प्रशासन को गायों की स्थितियों के बारे में बताया, लेकिन मदद नहीं पहुंची। अब मदद तीन दिन बाद पहुंची है, लेकिन उनके पास भी साधनों का अभाव है।
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पथमेड़ा की गौशाला में है हजारों गौवंश
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मेडिकल सुविधाओं में देरी
गौरतलब है कि पथमेड़ा गौशाला की विभिन्न शाखाओं में वर्तमान में 45 हजार से ज्यादा गौवंश है। राजस्थान के अतिरिक्त गुजरात में भी पथमेड़ा गौशाला की शाखाएं है। जालौर में पथमेड़ा की गौशाला में करीब 11 हजार गौवंश है।