अपनी ही पार्टी में उपेक्षा सहने वाले कई नेता अक्सर चुनावों का इंतजार करते है और पार्टी प्रत्याशी के विरुद्ध ही ताल ठोक देते है। ऐसा ही कुछ राजस्थान में होने जा रहे तीन महत्वपूर्ण चुनावों में देखने को मिल रहा है। दरअसल आज उपचुनावों की प्रक्रिया में नाम वापसी का आखिरी दिन है।
इसलिए भाजपा-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के नेता बागियों और निर्दलीय उम्मीदवारों की मान-मनौव्व्ल में जुटे है। इन तीन उपचुनाव में नामांकन के अखिरी दिन तक 50 से ज्यादा उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया था। वहीं आज शाम तक स्थिति स्पष्ट होगी कि कुल कितने उम्मीदवार चुनावी मैदान में होंगे।
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ये है परेशानी का सबब
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रामपाल जाट
राजस्थान में होने जा रहे तीनों उपचुनावों में कांग्रेस और भाजपा दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इसलिए दोनों पार्टी जीत के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। जहां कांग्रेस मांडलगढ विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी और कांग्रेस नेता गोपाल मालवीय से उम्मीदवारी वापस लेने की समझाइश कर रही है। वहीं भाजपा अलवर लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर दावेदारी जता रहे अपने पूर्व महामंत्री रामपाल जाट से मान—मनौव्व्ल में जुटी है।
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29 जनवरी को होना है मतदान
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फाइल फोटो।
राजस्थान में दो लोकसभा व एक विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव 29 जनवरी को होना। इनमें अलवर व अजमेर की लोकसभा व मांडलगढ की विधानसभा सीट सम्मलित है। इन उपचुनाव के लिए दस जनवरी तक नामांकन दाखिल किए गए थे। जिसमें सबसे ज्यादा नामांकन अजमेर लोकसभा सीट के लिए आए थे। जानकारी के अनुसार अजमेर से 26, अलवर से 15 व मांडलगढ़ से 14 उम्मीदवारों ने पर्चा भरा था।
इन पर लगाया है दोनों ने दांव
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फाइल फोटो।
उपचुनावों में दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने काफी सोच-विचारकर उम्मीदवारों पर दांव लगाया है। जहां कांग्रेस ने अजमेर लोकसभा से डॉ रघु शर्मा को तो अलवर लोकसभा से पूर्व सांसद डॉ करण सिंह यादव को उम्मीदवार बनाया है। वहीं मांडलगढ़ विधानसभा सीट से विवेक धाकड़ कांग्रेस के प्रत्याशी है। जबकि भाजपा ने अलवर से डॉ जसवंत सिंह यादव, अजमेर से रामस्वरुप लांबा व मांडलगढ़ विधानसभा से शक्ति सिंह हाड़ा को उम्मीदवार बनाया है।
यह उपचुनाव कितने खास है इसका अंदाजा भाजपा की स्टार प्रचारकों की लिस्ट देखकर लगाया जा सकता है। भाजपा ने उपचुनावों के लिए पीएम नरेन्द्र मोदी को स्टार प्रचारक की लिस्ट में टॉप पर रखा है। इसके अतिरिक्त भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ सात केन्द्रीय मंत्री भी इस लिस्ट में सम्मलित है। जबकि कांग्रेस ने प्रदेश के नेताओं को ही लिस्ट में तरजीह दी है।