भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण उपचुनावों के लिए आज से नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई। राजस्थान में होने वाले तीन महत्वपूर्ण उपचुनावों के लिए नॉमिनेशन प्रक्रिया 10 जनवरी तक चलेगी। लेकिन सत्तारुढ़ भाजपा ने अभी तक इन उपचुनावों के लिए अपने प्रत्याशियों की घोषणा नहीं की है। जबकि कांग्रेस ने अब तक केवल एक प्रत्याशी के नाम का ऐलान किया है। दरअसल दोनों ही पार्टी सोशल इंजीनियरिंग की सोच के कारण प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं कर सकी हैं।
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यहां होने है उपचुनाव
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फाइल फोटो।
राजस्थान में चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 29 जनवरी को दो लोकसभा व एक विधानसभा सीट के लिए वोटिंग होनी है। यह उपचुनाव अलवर व अजमेर लोकसभा सीट व मांडलगढ विधानसभा सीट के लिए हो रहे हैं। तीनों ही जगह उपचुनाव यहां के सांसदों व विधायक के निधन के कारण हो रहे हैं। गौरतलब है कि तीनों ही सीटें अब तक भाजपा के पास थी। अजमेर से सांवरलाल जाट भाजपा सांसद थे। जबकि अलवर में भाजपा सांसद महंत चांदनाथ थे। इन दोनों का निधन लंबी बीमारी के कारण हुआ था। जबकि मांडलगढ़ से भाजपा विधायक कीर्ति कुमारी का निधन स्वाइन फ्लू के कारण हुआ था।
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नहीं हुई उम्मीदवारों की घोषणा
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फाइल फोटो।
राजस्थान में होने वाले उपचुनाव कितने महत्वपूर्ण है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भाजपा अभी तक उम्मीदवार ही घोषित नहीं कर सकी है। दरअसल बीते तीन माह से राजस्थान भाजपा में उम्मीदवारों के लिए रायशुमारी का दौर जारी है। तमाम चिंतन बैठक और सबंधित चुनाव क्षेत्रों वाले स्थानीय नेताओं के गुप्त मतदान के बाद भी प्रत्याशियों के नाम तय नहीं हो सके है। राजस्थान भाजपा के नेताओं का कहनार है कि संभावित उम्मीदवारों की सूची दिल्ली भिजवाई गई है वहीं से नामों की घोषणा होगी।
यहां यादवों को रिझाने का प्रयास
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फाइल फोटो।
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने अभी तक केवल एक ही प्रत्याशी के नाम का ऐलान किया है। कांग्रेस ने अलवर लोकसभा उपचुनाव के लिए पूर्व सांसद डॉ करण सिंह यादव को फिर से उम्मीदवार बनाया है। जबकि मांडलगढ़ विधानसभा सीट और अजमेर लोकसभा सीट के लिए कांग्रेस ने भी उम्मीदवार घोषित नहीं किए है। माना जा रहा है कि कांग्रेस बाकी दो उम्मीदवारों के नामों का ऐलान आज दोपहर बाद कर सकती है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार दोनों ही पार्टियां जातिवाद की राजनीति में उलझी है। इसलिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान नहीं हो सका है। दरअसल कांग्रेस ने अलवर से यादव उम्मीदवार मैदान में उतारा है। इसलिए भाजपा किसी यादव चेहरे की तलाश में है। इस रेस में भाजपा प्रदेश सरकार में श्रम मंत्री डॉ जसवंत सिंह यादव बाजी मार सकते है। जबकि अजमेर में जाट वोटों को साधने की जुगत में भाजपा पूर्व सांसद सांवरलाल जाट के बेटे रामस्वरुप लांबा को उम्मीदवार बना सकती है। वहीं कांग्रेस किसी ब्राह्मण नेता पर दांव चलने की तैयारी कर रही है।