अयोध्या मामले से जुड़े दोनों पक्षों को उम्मीद है कि इस वर्ष के अंत तक करीब तीन दशक से जारी विवाद में फैसला आ सकता है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। हालांकि राम जन्मभूमि न्यास अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण की तैयारी वर्ष 1990 से कर रहा है।
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लगातार पहुंच रहा है पत्थर
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फाइल फोटो।
मंदिर का जो प्रस्तावित डिजाइन है उसके अनुरूप यहां 1.75 लाख क्यूबिक फीट पत्थर का उपयोग होना है। इसे देखते हुए राजस्थान के भरतपुर से 18 ब्लॉक सैंडस्टोन अयोध्या पहुंचाया गया है। मंदिर निर्माण के लिए अभी तक रामसेवकपुरम में एक लाख क्यूबिक फीट पत्थर पहुंच चुका है।
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नक्काशी का काम जोरों पर
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फाइल फोटो।
इन पत्थरों को अयोध्या के रामसेवकपुरम में रखवाया गया है। जहां वर्ष 1990 से पत्थरों पर नक्काशी का काम चल रहा है। इन सभी का उपयोग राम मंदिर निर्माण में किया जाना है।
गौरतलब है कि वर्ष 2015 में राम जन्मभूमि न्यास ने राम भक्तों से अपील की गई थी कि राम मंदिर के लिए पैसा दान करने के बजाय पत्थर दान करें। इसी को देखते हुए पत्थर दान किए जा रहे हैं।
लगा दी थी रोक
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फाइल फोटो।
जानकारी के अनुसार पूर्ववर्ती समाजवादी सरकार में वाणिज्यक कर विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को हवाला देते हुए राजस्थान से आने वाले सैंडस्टोन पर रोक लगा दी थी। लेकिन इस वर्ष जून से फिर से सैंडस्टोन मंदिर निर्माण के लिए भेजे जाने का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। इससे पूर्व वर्ष 2015 में सैंडस्टोन राजस्थान से भेजा गया था।
गौरतलब है कि अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण प्रस्तावित है। जानकारी के अनुसार मंदिर 268 फीट लंबा, 140 फीट चौड़ा और 128 फीट उंचा होगा। मंदिर दो मंजिला बनाया जाना प्रस्तावित है। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह दुनिया का सबसे भव्य मंदिर होगा।