Year Ender 2025: साल 2025 ने भारतीय सेना की ताकत, रणनीति और तकनीकी क्षमताओं को नए आयाम दिए। इस साल सीमा पार अभियान, आधुनिक हथियारों और नई इकाइयों के तैनाती ने सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया। सेना ने क्या-क्या दस बड़ी उपलब्धियां इस साल हासिल की हैं, आइए जानते हैं-
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2025 भारतीय सेना ने हासिल की कई उपलब्धियां
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
साल 2025 अपने अंतिम दिन की ओर बढ़ रहा है और नया साल आने वाला है। इस साल भारतीय सेना ने कई उपलब्धियां हासिल की है। सेना के अधिकारियों ने इस साल की दस उपलब्धियों पर प्रकाश डाला है। आइए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में तबाही का मंजर
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
ऑपरेशन सिंदूर
इन उपलब्धियों में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया गया है। सेना के अधिकारियों ने बताया कि मई में इस सैन्य अभियान के दौरान सीमा पार आतंकवादियों के नौ शिविरों को तबाह किया गया। इनमें सात भारतीय सेना और दो भारतीय वायुसेना ने नष्ट किए। पाकिस्तान ने ड्रोन से सैन्य और नागरिक लक्ष्यों को निशाना बनाने का प्रयास किया। लेकिन भारतीय वायु सेना की रक्षा इकाइयों ने सभी खतरों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया। एलओसी के साथ दर्जनों आतंकवादी लॉन्च पैड भी जमीन से आधारित हथियारों के जरिये नष्ट किए गए। इसके बाद भारतीय सेना के डॉयरेक्टर जनरल मिलिट्री ऑपरेशन (डीजीएमओ) को पाकिस्तानी समकक्ष की ओर से युद्धविराम का अनुरोध किया और दोनों पक्षों में गोलीबारी रोकने का समझौता हुआ।
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पिनाका हथियार प्रणाली
- फोटो : पीआईबी (फाइल)
लंबी दूरी की मारक क्षमता और सटीक हमला
ब्रहमोस (सेना): एक दिसंबर 2025 को दक्षिण कमान की ब्रहमोस इकाई ने अंडमान-निकोबार कमान के जवानों के साथ मिसाइल का परीक्षण किया। इस परीक्षण से पुष्टि हुई कि मिसाइल तेज गति में भी सही दिशा में चलती है और सटीक निशाने पर पहुंचती है। साल 2025 में ब्रहमोस मिसाइल को और लंबी दूरी और तेज प्रतिक्रिया के लिए तैयार करने के काम पर फोकस किया गया।
पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (एलआरजीआर): 29 दिसंबर 2025 को एलआरजीआर का सफल परीक्षण किया गया, जिसकी अनुमानित मारक क्षमता करीब 120 किलोमीटर बताई गई। यह परीक्षण लंबी दूरी तक बेहद सटीक हमला करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। साल 2025 में स्वदेशी रॉकेट प्रणाली के विकास को गति मिली और भविष्य में गहरे लक्ष्यों पर हमले के लिए लगभग 300 किलोमीटर रेंज वाले पिनाका संस्करणों पर भी काम शुरू होने की खबरें सामने आईं।
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अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर
- फोटो : एक्स/एएनआई (फाइल)
विमानन और उच्च-मूल्य वाले उपकरणों का समावेश
अपाचे एएच-64ई (आर्मी एविएशन कॉर्प्स): 22 जुलाई 2025 को भारतीय सेना को पहले तीन एएच-64ई अपाचे हेलिकॉप्टर प्राप्त हुए, जबकि बाकी तीन दिसंबर 2025 में डिलीवर किए गए, जिससे लंबे समय से लंबित सेना विमानन समावेशन योजना को आगे बढ़ाया गया।
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सेना के ड्रोन।
- फोटो : अमर उजाला (फाइल)
नई इकाइयां और युद्धक्षेत्र की संरचनाएं
भैरव बटालियन और अशनी प्लाटून को वर्ष 2025 में चरणबद्ध तरीके से मैदान में उतारा गया। 24 अक्तूबर 2025 को राजस्थान में एक क्षमता प्रदर्शन हुआ। इस दौरान भैरव बटालियन और अशनी प्लाटून जैसी नई इकाइयों का नई तकनीकी प्रणालियों के साथ तालमेल की क्षमता को दिखाया गया, जिससे यह संकेत मिला कि ये योजनाएं अब अवधारणा से निकलकर जमीनी स्तर पर लागू हो चुकी हैं। अक्तूबर 2025 की रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कम समय-सीमा में 25 भैरव लाइट कमांडो बटालियन को सक्रिय करने और निगरानी व सटीक हमलों के लिए थल सेना में अशनी ड्रोन प्लाटून गठित करने की योजना है। इसके अलावा, भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई संरचनाएं बनाई गई हैं, जिन्हें मानव रहित हवाई वाहनों और लोइटर म्यूनिशन जैसी आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है।
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अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम क्षेत्रों में भारतीय सेना का ड्रोन युद्धाभ्यास
- फोटो : अमर उजाला (फाइल)
सेना में तकनीक का समावेशन
भारतीय सेना ने 2024 और 2025 को तकनीकी समावेशन के साल के रूप में देखा। इन दो वर्षों में नई तकनीकों को सेना में शामिल करने का उद्देश्य था। 2025 में सेना ने कई अहम उपकरण और साधन शामिल किए। इस साल छह अपाचे हेलिकॉप्टर सेना में शामिल किए गए, जिससे सेना की क्षमता बढ़ी। अब भारतीय सेना के उपयोग में आने वाला 91 फीसदी गोला-बारूद देश में ही बनाए जाने लगा है। इसके अलावा, विभिन्न प्रकार की ड्रोन प्रणालियां भी सेना में शामिल की गईं।
5 अगस्त 2025 को सेना के बख्तरबंद वाहनों के लिए थर्मल इमेजर आधारित ड्राइवर नाइट साइट को मंजूरी दी गई। इससे रात में वाहन चलाने और मेकनाइज्ड ऑपरेशन की क्षमता बेहतर हुई। इसके साथ ही मध्यम ऊंचाई और लंबी उड़ान क्षमता वाले दूर से उड़ाए जाने वाले ड्रोन को तीनों सेवाओं में निगरानी और हमले के लिए भी मंजूरी मिली।
29 दिसंबर 2025 को रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने यह निर्णय लिया कि आगे सेना का जोर मानव रहित प्रणाली, ड्रोन रोधी तकनीक और सटीक हथियारों पर रहेगा। यह फैसला आधुनिक युद्धों और हालिया सैन्य अनुभवों से सीख लेने पर आधारित है।
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एज डेटा सेंटर का शुभारंभ करते रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : एक्स/भारतीय सेना
तकनीकी सशक्तिकरण और डिजिटल परिवर्तन
साल 2025 में भारतीय सेना ने तकनीक को अपनाने की प्रक्रिया को तेज किया। इसका मकसद विशेष तकनीक को अपनाना, संगठनात्मक बदलाव करना और नई तकनीक को पूरी तरह लागू करके भविष्य की युद्ध स्थितियों के लिए तैयार रहना था। साल 2025 में भारतीय सेना ने एज डेटा सेंटर बनाए, ताकि फील्ड में रहते हुए जल्दी और सही निर्णय लिए जा सकें। इसके अलावा, इक्विपमेंट हेल्पलाइन और सैनिक यात्री मित्र एप जैसे कई इन-हाउस सॉफ्टवेयर बनाए गए, जो सैनिकों की मदद और सेवाओं को आसान और तेज बनाते हैं। सेना ने तकनीक और डिजिटल प्रणाली को अपनाकर अपनी तैयारी और कामकाज को आधुनिक और तेज बनाया।
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राजस्थान के सिरोही में कमांडर सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला (फाइल)
सेना के कमांडरों का सम्मेलन
अक्तूबर 2025 में राजस्थान के जैसलमेर में सेना के कमांडरों का सम्मेलन हुआ। इसमें वरिष्ठ अधिकारियों ने ग्रे जोन वारफेयर, सैन्य एकजुटता और आत्मनिर्भरता व नवाचार पर चर्चा की। इस चर्चा का मकसद नए खतरे की स्थिति के अनुसार सेना की रणनीति और बल संरचना को सही ढंग से तैयार करना था।
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युद्ध अभ्यास क्षेत्र
- फोटो : अमर उजाला (फाइल)
सैन्य रणनीति और संयुक्त युद्ध अभ्यास
साल 2025 में भारतीय सेना ने कई द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास किए और कई युद्ध अभ्यासों की मेजबानी की, ताकि सहयोग बढ़ाया जा सके, आतंकवाद और शहरी युद्ध की तैयारियों को मजबूत किया जा सके और क्षेत्रीय साझेदारियां मजबूत हों।
शक्ति अभ्यास (भारत-फ्रांस): 18 जून से एक जुलाई 2025, फ्रांस में।
युद्ध अभ्यास (भारत-अमेरिका): एक से 14 सितंबर 2025, अलास्का में।
मैत्री अभ्यास (भारत-थाईलैंड): एक से 14 सितंबर 2025, मेघालय में।
ऑस्ट्राहिंद अभ्यास (भारत-ऑस्ट्रेलिया): 13 से 26 अक्तूबर 2025, पर्थ में।
मित्र शक्ति अभ्यास (भारत-श्रीलंका): 10 से 23 नवंबर 2025, बेलगावी में।
अजेय वॉरियर (भारत-ब्रिटेन): 17 से 30 नवंबर 2025, राजस्थान में।
डेजर्ट साइक्लोन (भारत-संयुक्त अरब अमीरात): 18 से 30 दिसंबर 2025, अबू धाबी में।
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जनरल उपेंद्र द्विवेदी, थल सेना प्रमुख
- फोटो : एएनआई (फाइल)
रक्षा संवाद और रणनीतिक नेतृत्व
साल 2025 में भारतीय सेना ने रक्षा संवाद और रणनीतिक नेतृत्व को भी आगे बढ़ाया। चाणक्य रक्षा संवाद (सीडीडी) 2025 को सेना की प्रमुख रणनीतिक सेमिनार श्रृंखला के रूप में पेश किया गया, जिसमें अहम कार्यक्रम शामिल थे।
यंग लीडर्स फोरम: 31 अक्तूबर 2025
कर्टेन राइजर: 17 नवंबर 2025, जिसमें जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने प्रमुख सैन्य मुद्दों पर पॉडकास्ट किया।
मुख्य संवाद: नवंबर के अंत में आयोजित हुआ, थीम 'सुरक्षित और विकसित भारत के लिए सुधार से रूपांतरण' थी।
नवाचार और स्वदेशीकरण: इननो-योद्धा कार्यक्रम
साल 2025-26 में इननो-योद्धा कार्यक्रम नवंबर-दिसंबर में आयोजित किया गया। इसमें कुल 89 नए नवाचार पेश किए गए, जिनमें से 32 को आगे विकास और मैदान में तैनाती के लिए चुना गया। यह पहल सेना में नीचे से ऊपर तक नवाचार को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर क्षमता निर्माण को मजबूत करने का काम कर रही है।