साल 2024 में रक्षा के मोर्चे पर कई ऐसी घटनाएं हुईं जो 'इतिहास में पहली बार' श्रेणी में दर्ज हो गईं। पूरा साल देश को मिली महत्वपूर्ण उपलब्धियों और सफलताओं के नाम रहा। भारत को मजबूत, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने पूरी ताकत झोंक दी। एक नजर 2024 की ऐतिहासिक घटनाओं पर
विज्ञापन
1 of 19
2024 में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भता की तरफ मजबूती से बढ़े भारत के कदम
- फोटो : अमर उजाला
साल 2024 अपने अंतिम पड़ाव पर है। चंद दिनों बाद पूरा देश नव वर्ष 2025 में नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ने में जुट जाएगा। दिसंबर बीते लगभग 52 हफ्तों में हासिल उपलब्धियों को याद करने का महीना होता है। हमें बीते वक्त में 'क्या खोया-क्या पाया' जैसे सवाल के सहारे पूरे साल का पुनरावलोकन करने का मौका मिलता है। इस आलेख में हम बात रक्षा मंत्रालय या डिफेंस के क्षेत्र में कायम हुए मील के पत्थरों की बात करेंगे। कामयाबी के गौरवबोध के साथ बात उस आत्मविश्वास की भी करेंगे, जो आत्मनिर्भता के कारण आती है। दरअसल, 21वीं सदी का भारत हाइपरसॉनिक मिसाइलों से लेकर 'अभ्यास' ड्रोन तक खुद विकसित कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत के तहत देश की तीनों सेनाएं शक्तिशाली बन रही हैं। महिला सैन्य अधिकारियों को पहली बार कुछ शीर्ष पदों पर नियुक्त किया जाना, नारी शक्ति वंदन का उदाहरण है। जानिए बीते एक साल यानी 360 से अधिक दिनों में देश रक्षा क्षेत्र में कितना आत्मनिर्भर बना, कौन सी ऐसी उपलब्धियां हैं जो उल्लेखनीय हैं। अपार संभावनाओं से भरे देश भारत में कौन सी ऐसी घटनाएं हुईं जो ऐतिहासिक रहीं।
विज्ञापन
2 of 19
रक्षा मंत्रालय ने कितना बजट कैसे खर्च किया, 2024 की कुछ झलकियां
- फोटो : अमर उजाला
अब भारत में किन ताकतवर जहाजों का विकास
नौसेना स्वदेशी तौर पर अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म लॉन्च कर रही है। इनमें शक्तिशाली विमानवाहक पोत विक्रांत, विशाखापत्तनम क्लास के घातक विध्वंसक, बहुमुखी नीलगिरि क्लास फ्रिगेट्स, गुप्त कलवरी क्लास पनडुब्बियां, फुर्तीला शैलो वॉटर एएसडब्ल्यू क्राफ्ट या विशेष डाइविंग सपोर्ट वेसल्स भी शामिल हैं।
54 मंत्रालयों में सबसे अधिक पैसा रक्षा मंत्रालय को
अब क्योंकि वर्तमान दौर में आर्थिक पहलू किसी भी फैसले को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं, हम पुनरावलोकन की शुरुआत सबसे पहले देश के रक्षा बजट से करते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 का रक्षा बजट लगभग 6,21,941 करोड़ रुपए का रहा। खास बात यह है कि भारत सरकार के 54 मंत्रालयों और 93 विभागों में रक्षा मंत्रालय को सबसे अधिक फंड आवंटित किया गया। केंद्र सरकार के कुल खर्च का लगभग 13 फीसदी हिस्सा रक्षा मंत्रालय को दिया गया।
स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने का निर्णय
डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम (DAP) में बदलाव भी साल 2024 का प्रमुख फैसला रहा। डीएपी में संशोधन का निर्णय नवंबर, 2023 में हुआ था, लेकिन इस साल इस फैसले का कार्यान्वयन और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ा। इस फैसले के तहत किसी भी रक्षा अधिग्रहण में कम से कम 50 फीसदी सामग्री / मशीनरी स्वदेशी होगी, इसे सुनिश्चित करना है।
विज्ञापन
3 of 19
2024 इन दोनों महिला सैन्य अधिकारियों की शीर्ष पदों पर नियुक्ति के कारण भी खास वर्ष रहा
- फोटो : अमर उजाला
साल की शुरुआत होते ही जनवरी में रक्षा मंत्रालय ने एक और मील का पत्थर छुआ जब केवल बालिकाओं के लिए देश का पहला सैनिक स्कूल खुला। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 01 जनवरी, 2024 को उत्तर प्रदेश में देश के ऐसे पहले पूर्ण सैनिक स्कूल- संविद गुरुकुलम सैनिक स्कूल का उद्घाटन किया। मथुरा के वृन्दावन में बालिकाओं के लिए इस विद्यालय में 870 सीटें हैं जहां शिक्षा के साथ-साथ प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।
ले.जन. साधना सक्सेना को पहली महिला सैन्य अधिकारी होने का गौरव
इसी साल अगस्त महीने में सेना में महिलाओं की अग्रणी भूमिका भी सामने आई। लेफ्टिनेंट जनरल साधना सक्सेना नायर देश की सेना में चिकित्सा सेवा विंग की पहली महिला महानिदेशक बनीं। ले. जन. साधना ने 1 अगस्त, 2024 को पदभार ग्रहण किया। उन्हें इस प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त होने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी होने का गौरव भी हासिल हुआ। इससे पहले उन्होंने अस्पताल सेवा (सशस्त्र बल) महानिदेशक के रूप में भी सेवाएं दीं। ले. जन. साधना को एयर मार्शल पद पर पदोन्नति के बाद महानिदेशक नियुक्त किया गया था। लेफ्टिनेंट जनरल नायर ने पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज से स्नातक की उपाधि हासिल की। इसके बाद वे दिसंबर, 1985 में आर्मी मेडिकल कोर में नियुक्त हुईं। सराहनीय सेवा के लिए उन्हें राष्ट्रपति ने एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, पश्चिमी वायु कमान और चीफ ऑफ एयर स्टाफ कमेंडेशन के साथ-साथ विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया है।
वाइस एडमिरल आरती सरीन बनीं पहली DGAFMSमहानिदेशक
अक्तूबर के महीने में एक बार फिर रक्षा क्षेत्र में आधी आबादी ने दस्तक दी। सेना के चिकित्सा क्षेत्र की यह घटना इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि आजाद भारत में सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा के महानिदेशक का पद पहली बार एक महिला ने संभाला। शल्य चिकित्सक वाइस एडमिरल आरती सरीन महानिदेशक बनने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी बनीं। उन्होंने सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (डीजीएएफएमएस) की महानिदेशक का पदभार 01 अक्तूबर को संभाला। रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली इकाई- DGAFMS, सशस्त्र बलों से संबंधित समग्र चिकित्सा नीति के मामले देखती है। 46वें डीजीएएफएमएस के रूप में पदभार संभालने से पहले डॉ सरीन ने दिसंबर 1985 में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं में पहला कार्यभार संभाला था। लगभग 38 साल के सेवाकाल में वे कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक और प्रशासनिक पदों पर कार्य कर चुकी हैं। वाइस एडमिरल आरती सरीन को भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं में सेवा करने का दुर्लभ गौरव भी हासिल है।
4 of 19
आईएनएस संध्याक के भारतीय नौसेना में शामिल होने के अवसर पर नौसेना प्रमुख और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- फोटो : एएनआई
80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी आईएनएस संध्याक की सौगात
इसी साल फरवरी में देश को पहला सर्वेक्षण विशाल मालवाहक जहाज (एसवीएल)- आईएनएस संध्याक भी मिला। 'संध्याक' का अर्थ है विशेष खोज करने वाला। इसमें लागत के हिसाब से 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। आईएनएस संध्याक की मदद से देश के निजी समुद्री हितों के साथ-साथ मित्र देशों के हितों की भी रक्षा भी हो सकेगी। आईएनएस संध्याक समुद्री डकैती और तस्करी जैसी चुनौतियों से निपटने में भी मदद करेगा। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आईएनएस संध्याक (यार्ड 3025) नौसेना को सौंपने के मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था, यह जहाज हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में एक महाशक्ति के रूप में भारत की भूमिका को और अधिक मजबूत करेगा। इस मौके पर आत्मनिर्भर भारत का जिक्र करते हुए नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने बताया कि 66 जहाजों और पनडुब्बियों के आर्डर में से 64 का निर्माण कार्य भारतीय शिपयार्ड में किया जा रहा है। इसका मतलब नौसेना इस क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है।
विज्ञापन
5 of 19
रक्षा मंत्रालय कैसे आत्मनिर्भता के संकल्प को कर रहा साकार, कुछ मिसालों पर एक नजर
- फोटो : अमर उजाला
आत्मनिर्भरता की नजर से नए युग की शुरुआत
इसी साल मार्च में भारत के पहले स्वदेश निर्मित 1500 हार्सपावर इंजन का परीक्षण भी हुआ। मुख्य युद्धक टैंकों के लिए विकसित इस इंजन का पहला परीक्षण कर्नाटक के बीईएमएल मैसूरू में किया गया। भारत की सैन्य क्षमता बढ़ाने वाले इस मौके पर तत्कालीन रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने इसे नए युग की शुरुआत बताया। उन्होंने इसे तकनीकी कौशल के साथ ही रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की प्रतिबद्धता करार दिया। 20 मार्च, 2024 को 1500 एचपी का यह इंजन सेना की प्रोपल्शन सिस्टम का हिस्सा बना। इसकी मदद से उंचाई वाले स्थानों, शून्य से नीचे तापमान और रेगिस्तानों सहित कठिन परिस्थितियों में भी युद्धक टैंकों का संचालन किया जा सकेगा। भारत के पहले स्वदेश- निर्मित 1500 हार्सपावर (एचपी) इंजन की पहली टेस्ट फायरिंग भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) के मैसुरू परिसर स्थित इंजन विभाग में की गई।
पहली बार सरकारी अस्पताल में हियरिंग इम्प्लांट
इस साल अप्रैल महीने में रणक्षेत्र में पराक्रम दिखाने के अलावा चिकित्सा के क्षेत्र में भी रक्षा मंत्रालय को उल्लेखनीय कामयाबी मिली। 10 अप्रैल को पुणे का कमांड अस्पताल सफल पीजोइलेक्ट्रिक बोन कंडक्शन हियरिंग इम्प्लांट करने वाला देश का पहला सरकारी अस्पताल बना। इस अस्पताल के कान, नाक और गला (ईएनटी) विभाग में कान के बाहरी एवं मध्य हिस्सों में जन्मजात गंभीर विसंगतियों की वजह से होने वाली श्रवण हानि से पीड़ित 7 वर्षीय बच्चे और कान के बहरेपन (एसएसडी) के शिकार वयस्क में दो पीजोइलेक्ट्रिक बोन कंडक्शन हियरिंग इम्प्लांट (बीसीआई) किए गए।
एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफल परीक्षण
14 अप्रैल को एक और स्वदेशी तकनीक भी सामने आई। इस दिन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित की गई मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) हथियार प्रणाली का सफल परीक्षण किया। इसमें एमपीएटीजीएम, लॉन्चर, लक्ष्य अधिग्रहण प्रणाली और अग्नि नियंत्रण इकाई शामिल हैं। 13 अप्रैल, 2024 को राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में इसका परीक्षण किया गया।
स्वदेशी तकनीक से निर्मित क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण
18 अप्रैल को ओडिशा के तट पर स्वदेशी तकनीक से निर्मित क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया। यह प्रक्षेपास्त्र उन्नत एवियोनिक्स और सॉफ्टवेयर से लैस है। इसी साल 19 अप्रैल को डीआरडीओ की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) ने स्वदेशी लीडिंग एज एक्टयूएटर्स और एयरब्रेक कंट्रोल मॉड्यूल तैयार किया। एलसीए तेजस एमके1ए के लिए विकसित इस तकनीक का पहला बैच हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को सौंपा जा चुका है। सरकार ने इसे वैमानिकी प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया। सबसे पहले 83 हल्के लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए में इनका इस्तेमाल किया जाएगा।
विज्ञापन
6 of 19
ईआरएमएस का उद्घाटन
- फोटो : पीआईबी
EMRS की शुरुआत, आपात चिकित्सा जरूरतें पूरी होंगी
इसी साल मई महीने में भारतीय वायुसेना को पहली बार आपातकालीन चिकित्सा प्रतिक्रिया प्रणाली (EMRS) मिली। 21 मई को वायुसेना प्रमुख ने कमांड हॉस्पिटल एयर फ़ोर्स बंगलूरु में भारतीय वायुसेना की पहली ऐसी प्रणाली का उद्घाटन किया। इसका मकसद देश भर में भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के सेवारत कर्मियों और उनके परिवारजनों की आपात चिकित्सा जरूरतों को पूरा करना है। तत्कालीन वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने EMRS की शुरुआत को उल्लेखनीय बताया। अपनी तरह की पहली 24x7 टेलीफोनिक चिकित्सा हेल्पलाइन की मदद से फोन करने वाले को चिकित्सा और पैरामेडिकल पेशेवरों की एक टीम तत्काल मदद मुहैया कराएगी।
भारतीय सेना को 37 यात्रियों की क्षमता वाली पहली हाइड्रोजन बस मिली
इसी महीने में भारतीय सेना को पहली हाइड्रोजन बस की सौगात भी मिली। हरित एवं टिकाऊ परिवहन समाधान खोजने की दिशा में अपना दृढ़ संकल्प दिखाते हुए भारतीय सेना ने हाइड्रोजन ईंधन सेल बस प्रौद्योगिकी के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के साथ समझौता किया। 27 मई को तत्कालीन थल सेनाध्यक्ष (सीओएएस) जनरल मनोज पांडे और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष श्रीकांत माधव वैद्य की उपस्थिति में भारतीय सेना और IOCL के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुआ। इसी समय भारतीय सेना को 37 यात्रियों की क्षमता वाली पहली हाइड्रोजन ईंधन सेल से चालित बस सौंपी गई। एक बार में पूरे 30 किलोग्राम ईंधन के साथ बस 250-300 किलोमीटर की यात्रा कर सकती है।
विज्ञापन
7 of 19
अभ्यास ड्रोन का सफल परीक्षण
- फोटो : पीआईबी
DRDO के अभ्यास ड्रोन को मिली सफलता
इस साल का जून महीना भी सेना और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद अहम साबित हुआ। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने हाई स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (एचईएटी) ‘अभ्यास’ का विकासात्मक परीक्षण पूरा कर लिया। DRDO के मुताबिक उन्नत बूस्टर कॉन्फिगरेशन से लैस- अभ्यास ने सिस्टम की विश्वसनीयता दिखाई है। इसने 10 विकासात्मक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। ‘अभ्यास’ का डिजाइन डीआरडीओ के वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान, बंगलूरू ने तैयार किया है। इसका उत्पादन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और लार्सन एंड टुब्रो जैसी एजेंसियों ने मिलकर किया है। यह स्वदेशी प्रणाली एक ऑटो पायलट, विमान एकीकरण, प्री-फ्लाइट चेक और स्वायत्त उड़ान के लिए लैपटॉप-आधारित ग्राउंड कंट्रोल सिस्टम की मदद से स्वायत्त उड़ान के लिए डिजाइन की गई है। इसमें उड़ान के बाद के विश्लेषण के लिए उड़ान के दौरान डेटा रिकॉर्ड करने की सुविधा भी है। जून से पहले इसी साल 30 जनवरी से 02 फरवरी के बीच हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (हीट) – ‘अभ्यास’ के चार उड़ानों का सफल परीक्षण किया गया था।
8 of 19
समुद्र प्रताप का जलावतरण के समय मौजूद केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री
- फोटो : एएनआई
पहले स्वदेशी रूप से विकसित जहाज- समुद्र प्रताप का जलावतरण
29 अगस्त को भारतीय तटरक्षक बल के साथ भी उल्लेखनीय उपलब्धि जुड़ी। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत विकसित प्रदूषण नियंत्रक पोत ‘समुद्र प्रताप’ का गोवा में जलावतरण किया गया। भारत के इस पहले स्वदेशी रूप से विकसित जहाज भारतीय तटरक्षक बल (ICG) को रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ की उपस्थिति में सौंपा गया। उन्होंने कहा, देश को रक्षा उत्पादन क्षेत्र में पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनना ही होगा। इस जहाज का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) ने किया है। यह पोत देश के समुद्री तटों पर तेल रिसाव की घटनाओं का पता लगाने और उन्हें रोकने में सहायता करेगा। सरकार के मुताबिक देश पोत निर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन चुका है। अब दूसरे देशों के लिए भी जहाज बनाए जा रहे हैं। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड भारत का एक प्रमुख शिपयार्ड है। यहां भारतीय तटरक्षक बल के उपयोग के लिए 583 करोड़ रुपये की लागत से दो प्रदूषण नियंत्रक जहाजों का निर्माण किया जा रहा है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि इन जहाजों को स्वदेशी रूप से विकसित किया जा रहा है।
9 of 19
BHISHM क्रिटिकल ट्रॉमा केयर क्यूब को एयरलिफ्ट करने के बाद 15,000 फीट की ऊंचाई पर सटीक पैरा ड्रॉप
- फोटो : एएनआई
अपनी तरह का पहला सटीक पैरा-ड्रॉप परीक्षण
साल 2024 में ही भारतीय वायुसेना ने पहली बार थलसेना के साथ मिलकर पहली बार 'अपनी तरह का पहला सटीक पैरा-ड्रॉप परीक्षण भी किया।' सेना ने इस संयुक्त अभियान में 15,000 फीट की ऊंचाई पर बीएचआईएसएचएम (Bharat Health Initiative for Sahyog Hita & Maitri; संक्षेप में BHISHM) क्रिटिकल ट्रॉमा केयर क्यूब को एयरलिफ्ट करने के बाद पैरा-ड्रॉप किया। इस आरोग्य मैत्री हेल्थ क्यूब को प्रोजेक्ट बीएचआईएसएचएम (भारत स्वास्थ्य पहल सहयोग हित और मैत्री) के तहत स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। भारतीय वायुसेना ने उन्नत सामरिक परिवहन विमान सी-130जे सुपर हरक्यूलिस से क्यूब को भारतीय सेना की पैरा ब्रिगेड के सहयोग से पैरा-ड्रॉप किया। पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्नत सटीक ड्रॉप उपकरणों का उपयोग किया गया।
10 of 19
2024 में ही तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों ने स्वदेशी तेजस में भरी ऐतिहासिक उड़ान
- फोटो : पीआईबी / अमर उजाला
भारत में बने तेजस लड़ाकू विमान में तीनों सेनाओं के शीर्ष अधिकारियों की ऐतिहासिक उड़ान
साल के नौवें महीने यानी सितंबर में पहली बार इस देश में ऐसा लम्हा आया जब आजाद भारत के तीनों सेनाओं के उप-प्रमुखों ने ऐतिहासिक उड़ान भरी। 9 सितंबर के दिन थल सेना, नौसेना और वायु सेना के उप-प्रमुखों की ऐतिहासिक उड़ान को स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के लिए बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाता है। तीनों ने स्वदेश में निर्मित हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस में उड़ान भरी। उप वायु सेना प्रमुख (वीसीएएस) एयर मार्शल एपी सिंह ने प्रमुख लड़ाकू विमान उड़ाया और उप थल सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के साथ-साथ उप नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने दो सीट वाले तेजस में उड़ान भरी। इसका मकसद सभी सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाना सुनिश्चित करना और आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए एक साथ काम करना है। जोधपुर में भारतीय वायुसेना के बहुराष्ट्रीय अभ्यास- तरंग शक्ति 2024 के दौरान हुई यह संयुक्त उड़ान इसलिए भी अभूतपूर्व रही क्योंकि पहली बार तीनों सेनाओं के उप प्रमुखों ने एक ही अवसर पर उड़ान भरी जिससे देश की बढ़ती एकीकृत रक्षा क्षमता का प्रमाण मिलता है।
रक्षा आयात पर निर्भरता घटाने का प्रयास
आत्मनिर्भर भारत और 'मेक इन इंडिया' पहल का प्रतीक तेजस अत्याधुनिक और कई भूमिकाओं वाला लड़ाकू विमान है। इसका डिजाइन एयरोनॉटिकल डिजाइन एजेंसी (एडीए) ने तैयार किया है। इस स्वदेशी विमान को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने विकसित किया है। इसका मकसद विदेश से रक्षा आयात पर निर्भरता घटाना और भारत के सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करना है।
11 of 19
लाइट वेट टैंक जोरावर
- फोटो : अमर उजाला
इस लाइट टैंक का प्रदर्शन असाधारण
सितंबर में ही भारतीय सेना को हल्के वजन वाले टैंक- 'जोरावर' की सौगात मिली। डीआरडीओ ने 13 सितंबर को भारतीय लाइट टैंक- ‘जोरावर’ का सफल फील्ड फायरिंग परीक्षण किया। जोरावर के सफल प्रारंभिक ऑटोमोटिव परीक्षण के बाद रक्षा मंत्रालय ने कहा, रेगिस्तानी इलाकों में किए गए फील्ड परीक्षणों के दौरान, लाइट टैंक का प्रदर्शन असाधारण रहा। इसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तैनात किया जा सकता है। डीआरडीओ की इकाई- लड़ाकू वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (सीवीआरडीई) ने जोरावर को लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के सहयोग से विकसित किया। सरकार के मुताबिक अनेक भारतीय उद्योगों ने इसकी उप-प्रणालियों के विकास में योगदान दिया है जो भारत की स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमताओं को दिखाता है।
12 of 19
2024 में ही भारत ने खुले जल में अपनी तरह का पहला तैराकी अभियान भी पूरा किया
- फोटो : पीआईबी
साहसिक तैराकी के बाद 21 द्वीपों पर फहराया तिरंगा
इसी साल भारत ने खुले जल में अपनी तरह का पहला तैराकी अभियान भी पूरा किया। सेना और तटरक्षक बल के जवान इस अभियान में शामिल थे और उन्होंने परमवीर चक्र पुरस्कार विजेताओं के सम्मान में नामित अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के 21 द्वीपों पर तिरंगा फहराया। इसका मकसद परमवीरों की वीरता एवं बलिदान की कहानियों को देश की आम जनता और युवाओं के बीच पहुंचाना था। सेना और तटरक्षक बल के 11 कर्मियों ने पांच महीनों तक 300 किलोमीटर से अधिक यात्रा की।
संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानकों एवं नियमों के अनुसार पूरा हुआ अभियान
‘बिना सहायता के खुले जल में तैराकी’ करने वाले इन 11 जांबाज सैनिकों के दल का नेतृत्व विंग कमांडर परमवीर सिंह ने किया। परमवीर प्रसिद्ध खुले जल के तैराक एवं तेनज़िंग नॉर्वे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार विजेता रहे हैं। सभी तैराकों ने ‘बिना सहायता के खुले जल में तैराकी’ श्रेणी से संबंधित अंतरराष्ट्रीय मानकों एवं नियमों के अनुसार अभियान पूरा किया। उन्हें केवल स्विम ट्रंक, चश्मे और टोपी पहनने की अनुमति थी। 22 मार्च, 2024 को विश्व जल दिवस के अवसर पर शुरू हुआ अभियान 15 अगस्त, 2024 को 78वें स्वतंत्रता दिवस पर समाप्त हुआ। यह उपलब्धि इसलिए भी शानदार है क्योंकि इस अभियान में भाग लेने वाले अधिकांश कर्मी पहली बार खुले जल में समुद्री तैराकी कर रहे थे।
13 of 19
देश को 106 मीटर लंबे और 16.8 मीटर चौड़े पोत- समर्थक की सौगात मिली
- फोटो : पीआईबी
आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत एक और मील का पत्थर
देश को अक्तूबर में ही बहुद्देश्यीय पोत (एलएंडटी) परियोजना के तहत पहला जहाज- समर्थक भी मिला। 14 अक्तूबर को एलएंडटी, चेन्नई में जहाज का शुभारंभ शशि त्रिपाठी ने किया। भारतीय नौसेना के लिए एलएंडटी, शिपयार्ड दो बहुद्देश्यीय पोत बना रही है, जिसमें पहले का शुभारंभ तमिलनाडु के कट्टुपल्ली में हुआ। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 106 मीटर लंबे और 16.8 मीटर चौड़े पोत- समर्थक का इस्तेमाल समुद्र में जहाजों को खींचने, विभिन्न लक्ष्यों को लॉन्च और उन्हें दोबारा हासिल करने, स्वायत्त वाहनों को संचालित करने और विकसित किए जा रहे स्वदेशी हथियारों और सेंसरों के लिए परीक्षण में किया जा सकेगा। इसे भारत सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत एक और मील का पत्थर माना गया।
तटरक्षक बल को 'अदम्य' और 'अक्षर' की सौगात
अक्तूबर का महीना खत्म होने से पहले देश को स्वदेशी सामग्री से बनने वाले दो और जहाजों की सौगात मिली। गोवा शिपयार्ड लिमिटेड ने इन्हें तैयार किया है। भारतीय तटरक्षक बल (ICG) ने 28 अक्तूबर को दो फास्ट पैट्रोल वेसल जहाजों का जलावतरण किया जो 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से बने हैं। इनका नामकरण ‘अदम्य’ और ‘अक्षर’ के रूप में किया गया है। गोवा शिपयार्ड को ऐसे आठ जहाज बनाने का अनुबंध मिला है, जिनकी लागत लगभग 473 करोड़ रुपये होगी। इनकी मदद से तटरक्षक बल को सुरक्षा, निगरानी, नियंत्रण और निगरानी के अलावा अपतटीय संपत्तियों के साथ-साथ द्वीप क्षेत्रों की सुरक्षा में भी मदद मिलेगी। इन जहाजों को अमेरिकी शिपिंग ब्यूरो और भारतीय शिपिंग रजिस्टर के कड़े मानकों के तहत डिजाइन और निर्मित किया गया है। पहली बार, अत्याधुनिक शिप लिफ्ट सिस्टम का उपयोग करते हुए वैदिक मंत्रोच्चार के बीच एक साथ दो जहाजों का जलावतरण किया गया।
14 of 19
आकाशीय अभ्यास के मामले में भी 2024 भारत के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ
- फोटो : पीआईबी
INSV तारिणी से 240 दिनों का अभियान
नाविका सागर परिक्रमा (दुनिया भर में नौकायन अभियान) के लिए गोवा से दो महिला अधिकारी आईएनएसवी तारिणी पर सवार होकर रवाना हुईं। इस अभियान में लगभग 240 दिनों में चार महाद्वीपों, तीन महासागरों और तीन चुनौतीपूर्ण केप में 21,600 समुद्री मील से अधिक समुद्री नौकायन शामिल है।
विशेष आकाशीय एक्सरसाइज- ‘अंतरिक्ष अभ्यास-2024’
2024 का नवंबर महीना इसलिए खास बना क्योंकि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के कारण लगातार स्वरूप बदल रही चुनौतियों का बेहतर तरीके और मजबूती से सामना करने का संकल्प भी सामने आया। 11 नवंबर को देश में पहले आकाशीय अभ्यास ‘अंतरिक्ष अभ्यास–2024’ का आयोजन हुआ। रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इसे साकार किया। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि बढ़ते खतरों से निपटने के लिए 11 से 13 नवंबर तक अपनी तरह का पहला तीन दिवसीय विशेष आकाशीय एक्सरसाइज- ‘अंतरिक्ष अभ्यास-2024’ आयोजित किया गया। इससे अंतरिक्ष क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर के रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा आने वाले समय में जरूरत पड़ने पर सैन्य अभियानों में भारत की अंतरिक्ष क्षमता को भी एकीकृत किया जा सकेगा। जनरल चौहान ने कहा, 'अंतरिक्ष को कभी अंतिम सीमा माना जाता था, लेकिन अब यह भारत की रक्षा एवं सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।' सीडीएस ने भारत में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए DRDO, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों से लैस होने के बाद अंतरिक्ष में राष्ट्रीय हितों को सुरक्षित किया जा सकेगा।
15 of 19
फ्लीट सपोर्ट शिप नौसेना का हिस्सा बनने को तैयार, देश की 'ब्लू वाटर' क्षमता बढ़ेगी
- फोटो : पीआईबी
स्वदेशी प्रक्रियाओं पर आधारित MMIC: उन्नत तकनीक और बेहतर प्रदर्शन
11 नवंबर के दिन ही स्वदेशी मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट (MMIC) का निर्माण करने की नजर से भी यह साल उल्लेखनीय रहा। स्वदेशी प्रक्रियाओं पर आधारित MMIC को डीआरडीओ की एक प्रयोगशाला में विकसित किया गया है। भौतिक विज्ञान की प्रयोगशाला में तैयार यह सर्किट 4 इंच व्यास वाले सिलिकॉन कार्बाइड (एसआईसी) वेफर्स और जीएएन एचईएमटी पर आधारित है। इसमें 150W तक गैलियम नाइट्राइड (जीएएन) उच्च इलेक्ट्रॉन गतिशीलता ट्रांजिस्टर (एचईएमटी) का भी इस्तेमाल किया गया है। जीएएन/एसआईसी तकनीक रक्षा, एयरोस्पेस, 5जी नेटवर्क, उपग्रह संचार और अगली पीढ़ी की रणनीतिक मशीनरी तैयार करने के दृष्टिकोण से बेहद अहम है। स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में भी काम आने वाली यह उन्नत तकनीक बेहतर दक्षता, छोटे आकार, वजन और बेहतर प्रदर्शन के कारण अधिक उपयोगी है। एमएमआईसी पर स्वदेशी जीएएन को जीएईटीईसी हैदराबाद में स्थापित किया गया है। सरकार के मुताबिक एमएमआईसी तकनीक के विकास में स्वदेशी तरीके अपनाने से भारत में सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारतीय नौसेना के पहले बेड़ा समर्थित जहाज का शिलान्यास
इसी महीने की 14 तारीख को स्वदेशी डिजाइन अपनाने का एक और उदाहरण सामने आया। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के पहले बेड़ा समर्थित जहाज का शिलान्यास किया गया। इसमें अधिकांश स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल किया जाना है। जहाजों को पूरी तरह विकसित करने के बाद 2027 के मध्य तक भारतीय नौसेना को सौंपा जाएगा। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड और भारतीय नौसेना ने अगस्त 2023 में पांच फ्लीट सपोर्ट शिप के लिए अनुबंध किया था। फ्लीट सपोर्ट शिप के नौसेना का हिस्सा बनने के बाद देश की 'ब्लू वाटर' क्षमता बढ़ेगी। 40,000 टन से अधिक की क्षमता वाले इन जहाजों की मदद से ईंधन, पानी, गोला-बारूद और भंडार ले जाने में मदद मिलेगी। इससे बंदरगाह पर वापस आए बिना लंबे समय तक संचालन संभव हो सकेगा। आपातकालीन परिस्थिति में कर्मियों के रेस्क्यू, प्राकृतिक आपदा जैसे चुनौतीपूर्ण हालात में साइट पर राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भी इनका प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके लिए इन्हें मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों से सुसज्जित किया जाना है। सरकार के मुताबिक यह जहाज निर्माण परियोजना भारतीय जहाज निर्माण उद्योग को बढ़ावा देगी जो आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और मेक फॉर दी वर्ल्ड जैसे आह्वानों के तहत हो रहे सकारात्मक बदलावों को रेखांकित करता है।
16 of 19
देश की पहली लंबी दूरी वाली हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण
- फोटो : पीआईबी
भारत की पहली लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण
16 नवंबर की देर रात डीआरडीओ ने भारत की पहली लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। ओडिशा के तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से दागी गई इस मिसाइल को सशस्त्र बलों के लिए तैयार किया गया है। इनकी मदद से 1500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तक सटीक निशाना साधा जा सकेगा। अलग-अलग विस्फोटक सामग्री ले जाने में सक्षम इस हाइपरसोनिक मिसाइल के प्रदर्शन को डीआरडीओ ने 'अत्यधिक सटीक' बताया। पूरी तरह भारत में विकसित इस मिसाइल में हैदराबाद स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स की प्रयोगशालाओं के अलावा डीआरडीओ लैब्स और स्वदेशी उद्योगों की भी सक्रिय भागीदारी रही है।
17 of 19
भारतीय सेना के लिए के9 वज्र-टी स्व-चालित ट्रैक्ड आर्टिलरी गन- तोप की खरीद का फैसला
- फोटो : पीआईबी
रूस दौरे पर रक्षा मंत्री राजनाथ, भारत को INS तुशील की सौगात
दिसंबर में रूस में निर्मित जहाज- आईएनएस तुशील की सौगात मिली। नौसेना के बेड़े में 9 दिसंबर को शामिल हुआ बहु-भूमिका वाला स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट- आईएनएस तुशील 17 दिसंबर को रूस के कलिनिनग्राद से भारत के लिए रवाना हुआ। यह जहाज क्षेत्र में समुद्री डकैती वाले स्थानों सहित मार्ग में पड़ने वाली अनेक नौसेनाओं के साथ संयुक्त गश्ती और समुद्री साझेदारी अभ्यास करेगा।
के9 वज्र-टी स्व-चालित ट्रैक्ड आर्टिलरी गन की खरीद
इसके अलावा भारतीय सेना के लिए के9 वज्र-टी स्व-चालित ट्रैक्ड आर्टिलरी गन- तोप की खरीद का फैसला भी इसी महीने में हुआ। एलएंडटी के साथ 7,629 करोड़ रुपये का अनुबंध। 155 मिमी/52 कैलिबर की क्षमता वाले के9 वज्र-टी स्व-चालित ट्रैक्ड आर्टिलरी गन की खरीद से भारतीय तोपखाने के आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा। के9 वज्र-टी उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में शून्य से नीचे के तापमान में भी पूरी ताकत से हमले कर सकती है। चार साल के इस अनुबंध के दौरान नौ लाख से अधिक दिनों का रोजगार मिलेगा।
18 of 19
नौसेना के दूसरे अत्याधुनिक सर्वेक्षण पोत आईएनएस निर्देशक का जलावतरण
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय नौसेना के दूसरे अत्याधुनिक सर्वेक्षण पोत आईएनएस निर्देशक का जलावतरण हुआ। विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में दूसरे जहाज को औपचारिक रूप से शामिल किया गया। इस जहाज को हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करने, नेविगेशन में सहायता और समुद्री संचालन का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित, ये जहाज उन्नत हाइड्रोग्राफिक सिस्टम जैसे मल्टी बीम इको साउंडर्स, साइड स्कैन सोनार, ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (एयूवी), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (आरओवी) आदि से लैस है। जहाज का निर्माण भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो, जीआरएसई, एलएंडटी, सेल, आईआरएस ने मिलकर किया है। इसमें देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम ने भी योगदान दिया है जो आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है।
राष्ट्रपर्व वेबसाइट और मोबाइल एप लॉन्च
- फोटो : पीआईबी
राष्ट्रीय पर्व पर तकनीक की मदद से मिलेगी सटीक सूचना
इसी साल राष्ट्रपर्व वेबसाइट और मोबाइल एप लॉन्च किया जाना भी उल्लेखनीय पहल है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मशती के मौके पर इनका शुभारंभ किया। वेबसाइट की मदद से गणतंत्र दिवस, बीटिंग रिट्रीट समारोह, स्वतंत्रता दिवस आदि जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के आयोजन से जुड़ी जानकारी मिलेगी। वेबसाइट पर विजिट करने के लिए यूआरएल- https://rashtraparv.mod.gov.inकी मदद ली जा सकती है। इसके अलावा मोबाइल एप को सरकारी एप स्टोर (एम-सेवा) से डाउनलोड किया जा सकता है।